Shimla Murder Case: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली स्थित सरस्वती पैराडाइज इंटरनैशनल पब्लिक स्कूल की प्रशासक और संचालिका मनीषा मित्तल की शनिवार 13 जून, 2026 को स्कूल के गेट पर दिनदहाड़े गोली मार कर हत्या कर दी गई थी. सीसीटीवी देखने के बाद यह बात सामने आई कि 2 नकाबपोशों ने गोली मार कर मनीषा मित्तल की हत्या की थी.

शिमला का मनीषा मित्तल मर्डर केस रिश्तों के कत्ल और लालच की एक ऐसी बेहद खौफनाक दास्तान है, जिस में मृतका मनीषा का सगा छोटा भाई हिमांक मित्तल ही अपनी बहन का कातिल और मुख्य मास्टरमाइंड निकला. जिस छोटे भाई की कलाई में मनीषा बचपन से रक्षासूत्र बांधती आई थी, वही अपनी बहन का असली कातिल निकला.

पुलिस ने जब इस सनसनीखेज केस की गहन तकनीकी जांच की तो इस पूरे मर्डर केस की मुख्य वजह पैसे और करोड़ों रुपए की प्रौपर्टी का विवाद निकला. असल में मनीषा मित्तल की हत्या करवाने के पीछे 500 करोड़ रुपए की प्रौपर्टी का विवाद था. हरियाणा के रोहतक और संजौली, शिमला में सरस्वती पैराडाइज इंटरनैशनल पब्लिक स्कूल के नाम से 10.3 एकड़ में फैली इस विशाल संपत्ति को अकेले हड़पने के लिए छोटे भाई हिमांक मित्तल ने अपनी ही बहन को रास्ते से हटाने का खौफनाक फैसला कर लिया था.

हिमांक मित्तल ने खुद को कानून की नजरों से बचाने के लिए एक बेहद शातिर और वेल-प्लांड खूनी साजिश रची थी, जिस में उस ने तकनीक और भाड़े के हत्यारों (कौन्ट्रैक्ट किलर्स) का बखूबी सहारा लिया था.

अपनी बड़ी बहन मनीषा को रास्ते से हटाने के लिए हिमांक मित्तल ने अपने बिजनैस पार्टनर गोविंद के साथ मिल कर इस वारदात का तानाबाना बुना. इस हत्याकांड को सही रूप से कार्यान्वित करने के लिए हिमांक मित्तल ने संजौली, शिमला स्थित सरस्वती पब्लिक स्कूल के सीसीटीवी कैमरों का सहारा लिया था.

दरअसल, हिमांक मित्तल के पास संजौली के सरस्वती स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरों का आनलाइन (पी टू पी नेटवर्किंग) एक्सेस था. इस औनलाइन एक्सेस से हिमांक खुद रोहतक में बैठ कर मनीषा के आनेजाने की हर गतिविधि और मूवमेंट ट्रैक कर रहा था. हिमांक ने यह औनलाइन एक्सेस अपने पार्टनर को दिया और गोविंद ने इसे भाड़े के हत्यारों को शेयर किया, ताकि वे सही समय पर हमला कर के मनीषा की हत्या कर सकें.

हिमांक मित्तल ने अपने आप को इस मर्डर से शक के दायरे से बाहर रखने के लिए बेहद शातिराना प्लान (घटना के वक्त कहीं और मौजूद होने का बहाना) तैयार किया था. इसलिए मर्डर से कुछ दिन पहले पहली जून, 2026 को खुद के ऊपर अज्ञात लोगों से जानबूझ कर एक खतरनाक हमला करवाया था.

इस हमले में उस के हाथ और पैर में फ्रैक्चर हुआ और वह पूरी तरह बैड रेस्ट पर था. वह सोच रहा था कि हौस्पिटल में बिस्तर पर पड़े रहने के कारण पुलिस उस के ऊपर कभी शक नहीं करेगी, लेकिन डिजिटल सबूतों ने उस का झूठ अंत में पकड़ ही लिया.

शुरुआत में यह सनसनीखेज मामला एक ब्लाइंड मर्डर और प्रोफेशनल शूटआउट सा प्रतीत हो रहा था, लेकिन शिमला पुलिस की एसआईटी की सूझबूझ, बेहतरीन तकनीकी  और वित्तीय जांच के कारण यह पेचीदा लगने वाला केस महज कुछ ही दिनों में पूरी तरह से सुलझ गया. पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि हिमांक के बिजनैस पार्टनर गोविंद ने रोहतक, हरियाणा से 2 शूटरों आशीष अहलावत और दीपक को काम पर रखा और उन के लिए अवैध पिस्तौल और किराए की स्विफ्ट कार का इंतजाम किया, ताकि वारदात के बाद वे दोनों आसानी से फरार हो सकें.

पुलिस ने वारदात के 39 घंटे के भीतर सब से पहले रोहतक के दोनों शूटरों आशीष और दीपक को धर दबोचा और दोनों से हत्या में इस्तेमाल किए हथियार बरामद कर लिए. शूटरों से पूछताछ और पुलिस खोजबीन में यह पता चला कि घटना के कुछ दिन पहले हिमांक मित्तल ने 8.5 लाख रुपए की धनराशि अपने बिजनैस पार्टनर गोविंद के खाते में ट्रांसफर की थी. यह रकम शूटरों को देने और वारदात के इंतजामों के लिए दी गई थी.

साजिशकर्ता गोविंद इस वारदात को अंजाम देने के बाद विदेश भाग गया था, लेकिन वह पुलिस की रडार पर आ चुका था. इसलिए जैसे ही वह भारत लौटा और उस ने छिपने की कोशिश की, पुलिस ने उसे 28 जून, 2026 को गिरफ्तार कर लिया.

कडिय़ों को जोड़ते हुए और सीसीटीवी के एक्सेस के पक्के सबूत मिलने के बाद शिमला पुलिस की एसआईटी ने मुख्य मास्टरमाइंड मृतका मनीषा के छोटे भाई हिमांक मित्तल को 29 जून, 2026 को गिरफ्तार कर लिया. Shimla Murder Case

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