Indian Police System: भारतीय पुलिसिया सिस्टम आदमी की कास्ट और क्लास देख कर बिहेव करता है, इसलिए आम आदमी हमेशा पुलिस के झमेले में पड़ने से बचता है. लेकिन कई बार ऐसी सिचुएशन खडी हो जाती है जब पुलिस को बुलाना या थाने में जाना पड़ता है. ऐसी परिस्थिति में आम आदमी पुलिस को कैसे डील करे?
मिडिल क्लास हमेशा विवादों से दूरी बनाए रखता है. यही कारण है कि गलती न होने पर भी सामने वाली की धौंस सुन लेता है. कई बार किसी मामूली बात पर विवाद बढ़ जाए और मामला मारपीट तक पहुंच जाए तो भी लोग पुलिस को बुलाने से डरते हैँ. ‘क्यों फालतू झमेले में फंसे’, ‘पुलिस किसी की सगी नहीं होती’ सोच कर ज्यादातर लोग नुकसान उठा कर भी पुलिस के पास नहीं जाते. लेकिन कई बार इस तरह की सोच का खमियाजा उन्हें भुगतना पड़ जाता है.
विपिन अपनी बाइक अपने छोटे से मकान के बाहर खड़ी करता था. घर इतना छोटा था कि अंदर पार्किंग की जगह ही नहीं थी. विपिन के घर के सामने बड़ा सा मकान था. यह मकान अरविंद सिंह का था जो रियल एस्टेट का कारोबारी था. कालोनी में अरविद के कई मकान थे. अरविंद सिंह अपने पड़ोसियों से बात तक नहीं करता था और विपिन से तो वह हमेशा चिढ़ा रहता था. अरविंद सिंह ने नई कार खरीदी तब उस ने विपिन से कहा कि कल से वह अपनी बाइक घर के आगे नहीं लगा सकता क्योंकि उसे अपनी कार अपने घर में पार्क करते समय दिक्कत होगी. इस बात से विपिन टैंशन में आ गया. विपिन के पास घर के सामने बाइक खड़ी करने के अलावा विकल्प नहीं था. उस ने अरविंद की बात को गंभीरता से नहीं लिया. शाम को अरविंद नई कार ले कर आया तब तक विपिन अपनी बाइक ले कर घर नहीं आया था. अगली सुबह जब अरविंद को अपनी कार निकालनी पड़ी तब विपिन की बाइक सामने खड़ी थी. अरविंद ने कार का हौर्न बजाया. विपिन ने बाइक नहीं हटाई तो अरविंद ने गुस्से में विपिन की बाइक को सड़क पर घसीट कर पटक दी और अपनी कार ले कर चला गया.
विपिन घर से निकला तो उसे बेहद गुस्सा आया लेकिन अरविंद सिंह ताकतवर आदमी था. कई पुलिसवाले उस के करीबी थे. विपिन ने बाइक को सड़क से उठा कर घर के आगे खड़ी कर दी. शाम को जब अरविंद अपनी कार ले कर आया तब विपिन की बाइक सामने खड़ी देख उस का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. वह सड़क पर खड़े हो कर विपिन को गंदीगंदी गालियां बकने लगा. विपिन ने बाइक हटा ली लेकिन विपिन की पत्नी सुनीता को यह सब देख कर बहुत बुरा लगा. उस ने अरविंद सिंह से बहस शुरू कर दी. बात इतनी बढ़ गई कि सुनीता ने 112 डायल कर दिया. विपिन घबरा गया. पुलिस के आने से पहले ही गली में लोग इकट्ठे हो चुके थे. गलती तो विपिन की भी थी कि उस ने बाइक घर के बाहर लगाई थी हलांकि ऐसा करना उस की मजबूरी थी. अरविंद सिंह के पास गली में कई प्लौट और थे जिन में वह अपनी नई कार खड़ी कर सकता था लेकिन वह जानबूझ कर विपिन को नीचा दिखाना चाहता था.
थोड़ी देर में विपिन और अरविंद थाने में थे. सुनीता अपने पड़ोसी अरविंद को सबक सिखाना चाहती थी ताकि वह आगे से अपनी दौलत की धौंस किसी पर न झाड़ पाए. पुलिस वाले ने सुनीता को समझाने की कोशिश की कि इतनी मामूली बात पर एफआईआर न करे. इस बात पर सुनीता ने कहा कि अगर अरविंद माफी मांग ले और आगे से मेरे पति के साथ बदतमीजी न करने का वादा करे तो वह समझौता कर सकती है. लेकिन अरविंद माफी मांगने को तैयार न हुआ. सुनीता भी पीछे हटने को तैयार न थी. सुनीता ने एलएलबी किया हुआ था. कानून जानती थी. उस ने अरविंद के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज करवा दी.
1 -गालीगलौज, अपमान करना, धमकी देना- धारा 352, 504, धारा 351(2)/(3) आईपीसी 506
2 -सार्वजनिक स्थान पर अश्लील गाली दी गई थी, इस के लिए धारा 296, आईपीसी 294
3 -जानबूझ कर संपत्ति को नुकसान पहुंचाना- धारा 324(1) से 324(4) आईपीसी 425/426/427
4 – बीएनएस धारा 324 बाइक को जानबूझ कर नुकसान पहुंचाने के लिए
थाने में सुनीता ने एफआईआर में घटना का पूरा विवरण, समय, गवाहों के नाम, बाइक का नुकसान फोटो के साथ जमा कराया. अगर पुलिस एफआईआर दर्ज न करती, सुनीता सीधे मजिस्ट्रेट कोर्ट में धारा 223 सीआरपीसी /बीएनएसएस के तहत प्राइवेट कंप्लेंट कर देती.
विवादों से बचें लेकिन जरूरी हो तो कानून का इस्तेमाल जरूर करें.
मनोज ने एक लोकल फाइनैंसर से 2 लाख रुपए का कर्ज लिया हुआ था. नौकरी छूट जाने के कारण वह कई महीनों से ब्याज नहीं दे पा रहा था. फाइनैंसर लगातार मनोज को धमकी दे रहा था. मनोज मजबूर था, वह फाइनैंसर की रकम लौटाने के लिए गांव की जमीन बेचने के चक्कर में था लेकिन जमीन बिक नहीं रही थी. एक दिन जब मनोज काम पर था तब फाइनैंसर और उस के कुछ लोग मनोज के घर पहुंचे और उस की बीवी को धमकाने के बाद मनोज के एक कमरे में ताला लगा गए. मनोज घर लौटा तो उसे बेहद गुस्सा आया और उस ने तुरंत 112 डायल कर पुलिस को बुला लिया.
फाइनैंसर और उस के साथियों ने धमकी दी, घर में जबरदस्ती घुसे और एक कमरे में ताला लगा दिया था. सो, मनोज ने पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करवा दी.
धारा 503 और 506 के तहत किसी के द्वारा लगातार धमकी और बीवी को डरानाधमकाना कानूनन जुर्म है.
धारा 441 और 448 के तहत घर में बिना अनुमति घुसना और कमरे में ताला लगाना जुर्म है.
धारा 383 और 384 अगर धमकी दे कर जबरन पैसे वसूलने की कोशिश की गई, तो यह जबरदस्ती का मामला बनता है. यह कर्ज वसूली में आम है जहां धमकी से मजबूर किया जाता है.
अगर फाइनैंसर अनरजिस्टर्ड मनीलेंडर है, तो राज्य के मनी लेंडिंग एक्ट (जैसे महाराष्ट्र में महाराष्ट्र मनी लेंडिंग रैगुलेशन एक्ट) के उल्लंघन की शिकायत भी की जा सकती है. लेकिन एफआईआर आईपीसी के तहत होगी. मनोज कौल रिकौर्डिंग, गवाह, धमकी के मैसेज के साथ पुलिस के पास गया था. अगर पुलिस एफआईआर दर्ज न करती, तो मनोज मजिस्ट्रेट के पास धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत केस रजिस्टर करवा देता.
समाज में व्यवहार ऐसा रखिए कि पुलिस बुलाने की जरूरत ही न पड़े. लेकिन कई बार पुलिस बुलाना जरूरी हो जाता है. ऐसी परिस्थिति में जब थाने जाने की नौबत आए तो किसी जानकार वकील को साथ जरूर ले जाएं. हर आदमी सुनीता और मनोज की तरह कानून का जानकार नहीं होता, इसलिए वकील की मदद जरूरी हो जाती है.
छोटीमोटी बातों को शांति से सुलझा लेना चाहिए. गलती न होने पर भी सौरी बोल कर विवाद को खत्म करने में कोई अपमान की बात नहीं. छोटी बातों को ईगो पर नहीं लेना चाहिए. कई बार मामूली सी बात भारी पड़ जाती है, इसलिए जितना हो सके, झगड़े से बचना चाहिए. Indian Police System





