वह पाकिस्तान है जहाँ की राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है.पाकिस्तान में यह चर्चा भी आम है कि सुप्रीम कोर्ट ने इमरान के विदेश भाग जाने का रास्ता खोल दिया है. ठीक वैसे ही जैसे कभी शाहबाज खान के लिए खोला था. उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी पाकिस्तान में इलाज के लिए लेकिन वे इलाज के लिए लंदन जो गए तो तभी लौटे जब इमरान अपदस्थ हुए.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर इमरान खान अस्पताल में रहें या फिर जेल में रहें सोचने उनके पास बहुत ज्यादा कुछ होगा नहीं. जेल में इमरान कई बीमारियों से ग्रस्त और त्रस्त थे उनमें से एनजायटी खास है जिसका पैमाना लेबल थ्री तक जा पहुंचा था.

साल 2023 के इसी अगस्त के महीने में इमरान को भ्रष्टाचार के मामलों में हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया था जहाँ उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही थी. इमरान की बहन डाक्टर उजमा खान ने पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर की थी कि इनके भाई को आँखों की बीमारी है और सेहत बहुत ख़राब है जो जेल में तो सुधरने से रही लिहाजा उन्हें शिफा इंटर नेशनल अस्पताल में शिफ्ट किया जाए. जिससे उनका इलाज हो सके ..इमरान की शिफ्टिंग के लिए लामबंद वकीलों की टीम में सदर लतीफ़ और उजैर करामत भंडारी जैसे नामी वकील शामिल थे.

73 साल का एक शख्स जेल में हो याकि अस्पताल में फुर्सत में क्या क्या क्या सोच सकता है. अपने बचपन के बारे में .स्कूल कालेज के बारे में, पेरेंट्स और भाई बहनों के बारे में , अपनी जमीन जायदाद के बारे में या सेहत के बारे में. मुमकिन है वह यही सब सोचे लेकिन वह शख्सियत इमरान खान हो तो उनके लिए सोचने के लेबल पर ये फिजूल की बातें हैं. इमरान सोचेंगे यह कि कैसे इलाज के लिए विदेश जाने का दांव खेला जा सकता है.और खाली वक्त में वे क्रिकेट के बारे में थोडा बहुत सोच सकते हैं और इसके बाद के खाली वक्त में वे सोच सकते हैं अपने अफेयर्स रोमांस और तीन अदद बीबियो के बारे में.

इनमे से तीसरी बीबी बुशरा बीती 19 अगस्त को इमरान से मिलने इस्लामाबाद की अडियाला जेल पहुंची थी और कोई 25 -30 मिनिट अपने शौहर से बातचीत की थी. क्या बातचीत की थी यह उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की हिदायत पर अमल करते हुए किसी को नहीं बताई.

इमरान खान के हाथ से केवल सत्ता ही नहीं छिनी थी बल्कि उनकी तीसरी पत्नी बुशरा मनेका भी छिन गईं थीं . बीती 10 अप्रेल 2022 को पाकिस्तान असेम्बली में अविश्वास प्रस्ताव पेश और पास होने के पहले से ही बुशरा और उनकी तांत्रिक क्रियाएं सुर्ख़ियों में थीं. मसलन यह कि वे इमरान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास न होने देने के लिए जिन्दा मुर्गे जलाने के साथ साथ और भी तांत्रिक क्रियाएं कर रही हैं .उम्मीद नहीं की जानी चाहिए कि धर्म और अक्ल के अन्धो को इन बेहूदी और बकबास बातों की हकीकत समझ आई होगी जिन्होंने इस मूर्खतापूर्ण अफवाह पर भी यकीन कर लिया था कि बुशरा की छवि दर्पण में नहीं दिखाई देती .

बुशरा की इकलौती खूबी उनका वेइतिहा कुदरती खूबसूरती की मालकिन होना हैं  संगमरमरी सांचे में ढला बदन, सुतवां नाक, मासूम बोलता चेहरा, हिरणी जैसी आंखें और पतली कमर पर झूलने बाल हर किसी की नजर उन पर ठहराने काफी हैं . वे 52 की होने जा रही हैं, लेकिन पांच बच्चों की माँ कहीं से नहीं लगतीं. लेकिन  इमरान खान के उन पर फ़िदा हो की दूसरी वजहें भी थीं .

साल 2018 का पहला दिन ही एक सनसनाती खबर लेकर आया था कि पूर्व नामी क्रिकेटर और पाकिस्तान तहरीके इंसाफ पार्टी के मुखिया इमरान खान ने बुशरा मनेका से शादी कर ली. इमरान खान को नजदीक तो क्या दूर से जानने वालों के लिए यह कतई हैरानी की बात नहीं थी . आशिक मिजाज इमरान ने इस खबर की न पुष्टि की थी और न ही इसे अफवाह बताया था लेकिन तब चूँकि आम चुनाव सर पर थे इसलिए तीसरी शादी की अटकलें उनकी इमेज बिगाड़ ही रही थीं. इसलिए एक महीने बाद ही उनके चहेते नेता पीटीआई के प्रवक्ता फराद चौधरी ने ही स्वीकार लिया था कि हाँ इमरान खान एक बार फिर शादी के बंधन में बंध चुके हैं. ये वही फराद हैं जो संसद के हंगामे के दौरान इमरान खान का बचाव करते नजर आए थे

यह बात कभी किसी सबूत की मोहताज नहीं रही कि इमरान खान विकट के अंधविश्वासी व्यक्ति हैं.  वे जादू टोनों और गंडा ताबीजों में आम पाकिस्तानियों जितना ही भरोसा करते हैं. बुशरा मनेका दरअसल में एक पीर हैं .  कुछ पढ़े लिखे लोग भले ही उन्हें आध्यात्मिक गुरु कहते रहे लेकिन हकीकत में वे एक ज्योतिषी और भविष्यवक्ता हैं और पाकिस्तान में अफवाह यह फैली हुई है कि यह सब यानि जादू टोना वगैरह की रूहानी ताकत उन्हें भारत के बागेश्वर टाइप के बाबाओं की तरह सीधे ऊपर बाले से मिली हुई हैं.  उनके बारे में मशहूर है कि उन्होंने दो जिन्न अपने वश में अर्थात सिद्ध कर रखे हैं जिनके जरिये वे कोई भी नामुमकिन काम करा सकती हैं .

पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के पाकपट्टन जिले में जन्मी बुशरा की पहली शादी बहुत कम उम्र में खाबर फरीद मनेका से हुई थी. खाबर कस्टम महकमे में  वरिष्ठ अधिकारी थे .  उनसे एक के बाद एक पांच बच्चे बुशरा को हुए लेकिन फिर तलाक हो गया.  तब बुशरा इस्लामाबाद में रहतीं थीं.  यह तलाक क्यों हुआ इसकी जानकारी किसी को नहीं . लेकिन कुछ बात है बुशरा में जो पांच बच्चों के जन्म के बाद भी उनकी फिटनेस और फिगर बरकरार रहे .

लाहौर के एचिसन कालेज से ग्रेजुएट बुशरा का रूझान तलाक के बाद आध्यात्म में हो गया और वे लोक परलोक की बातें करने लगीं. अल्लाह , दीन और इमान जैसी बातों  में तो आजकल कोई ख़ास दिलचस्पी लेता नहीं लेकिन बुशरा मशहूर हुईं अपनी भविष्यवाणियों और ज्योतिष से जिसके चलते उनके इर्द गिर्द बच्चा चाहने वालों से लेकर तबादला कराने वालों और कुर्सी के ख्वाइशमंदों तक की भीड़ जमा होने लगी. कुछ तीर और कुछ तुक्कों से उनका कारोबार चल निकला और लोग श्रद्धा से उन्हें पिंकी बीवी और बुशरा बीवी बुलाने लगे.  दौलत खुद ब खुद चलकर उनके पास आने लगी पर शोहरत उतनी नहीं हुई थी जितनी कि वे चाहती थीं.

इमरान ने भी उनके चर्चे सुने और एक दिन उनके दरबार में जा पहुंचे.  यह महज इत्तफाक की बात थी लेकिन इसके बाद जो हुआ वह इत्तफाक नहीं बल्कि एक साजिश भरा ड्रामा लगता है. साल 2015 में लोधरन में एनए-154 सीट के लिए उपचुनाव था जिसमें इमरान अपनी पार्टी पीटीआई के उम्मीदवार जहांगीर तरीन के लिए चुनाव प्रचार कर रहे थे . यहीं दोनों की पहली मुलाकात हुई.
इमरान ने बुशरा के बारे में सुना और उनसे हार जीत के बारे में पूछा तो बुशरा ने उनके उम्मीदवार की जीत की भविष्यवाणी कर दी जो सच साबित हुई.

तभी से इमरान बुशरा की रूहानी ताकत के मुरीद और कायल हो गए. अभी तक उन्होंने बुशरा की सूरत नहीं देखी थी क्योंकि वे अक्सर सफ़ेद बुर्के में रहती थीं और सर पर हैट लगाती थीं.   तब कहा यह भी जाता था कि बुशरा चेहरा सिर्फ अपने पति को ही दिखा सकती हैं किसी गैर मर्द को नहीं . एक इंटरव्यू में खुद इमरान ने स्वीकारा था कि उन्होंने अपनी आध्यात्मिक गुरु को शादी के पहले नहीं देखा था एक पुराना फोटो देख उनके बारे में अपनी राय कायम की थी .

बुशरा के रहस्मय किरदार की तरह उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी कम दिलचस्प नहीं जो उन्हें महत्वाकांक्षी बनाती है . उनके पहले पति खाबर फरीद मनेका के पिता यानि उनके ससुर गुलाम फरीद मनेका पाकिस्तान सरकार में मंत्री रह चुके हैं और खुद बुशरा पंजाब के प्रतिष्ठित रियाज वट्टू वंश से ताल्लुक रखती हैं.   उनकी बड़ी बेटी मेहरू पंजाब प्रांत के सांसद मियाँ अट्टा मोहम्मद मानिका की बहू थी.

अपने दौर के मशहूर पंजाबी सूफी गुरु गुलाम फरीद की कविताएं पढक़र बुशरा प्रसिद्ध होने लगीं और धीरे धीरे उनकी एक चमत्कारिक छवि भी स्थापित हो गई.  लेकिन बुशरा महज इतने से संतुष्ट नहीं थीं कि ताबीज बांटती रहे भभूत देती रहें या वेऔलादों को औलाद दिलवाती रहें या फिर नीचे वालों की दुआएं कबूल होने ऊपर वाले को फारवर्ड करती रहें.
जो वे चाहती थीं वह उन्हें इमरान से मिला.

जहांगीर तरीन की जीत ने इमरान का भरोसा उनमें पुख्ता कर दिया.  यह वह वक्त था जब इमरान के पाकिस्तानी प्रधानमंत्री बनने को लेकर चरचा तो होती थी लेकिन एक हिचकिचाहट के साथ.  कोई यह मानने तैयार नहीं होता था कि वे इस पद तक पहुँच पाएंगे . पाकिस्तानी राजनीति में उन्हें आज जितना गंभीरता से कभी नहीं लिया गया था.
इश्क कम डील ज्यादा
इसे एक और दिल्लगी कह लें या प्रधानमंत्री बनने की ख्वाहिश कह लें लिए इमरान हर कभी बुशरा के दरबार में हाजिरी लगाने लगे. इसी दौरान एक दिन बुशरा ने इमरान को पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनने का टोटका बताया कि वे उनसे शादी कर लें तो बात बन जाएगी. शायद ही कभी लोकतांत्रिक इतिहास में ऐसा अनूठा रास्ता किसी आध्यात्मिक गुरु ने किसी राजनेता को बताया हो .  यह शर्त या आफर कुछ भी कह लें आकर्षक था जिसमें कुर्सी मिलने की ग्यारंटी भले ही कहने को थी, लेकिन एक निहायत ही खूबसूरत संगमरमरी हसीना ग्यारंटेड मिल रही थी लिहाजा इमरान जैसे रंगीन मिजाज शख्सियत के तो न कहने का तो सवाल ही नहीं उठता था .

तीन साल की मेल मुलाकातों में दोनों के बीच तय है या तो डील हो चुकी थी या फिर प्यार के बीज अंकुरित हो चुके थे . आखिर 18 फरबरी 2018 को बुशरा इमरान की तीसरी बीवी बनकर उनके घर आ गई.  शादी गुपचुप तरीके से उनके भाई के घर पर हुई . उस वक्त भी वे बुर्के में ही थीं और तीसरी बार दूल्हा बने इमरान ने पठानी सलवार सूट पहना हुआ था. सुर्ख गुलाबी रंगत के चेहरे वाले 65 वर्षीय इमरान को देख तब सहज ही लगा था कि औरतों की नजाकत और खूबसूरती पर तो खूब साहित्य रचा गया है लेकिन जाने क्यों मर्दाना कशिश पर कलम कम ही चलाई गई.  बुशरा से शादी करने के पहले 2 बीवियों को तलाक दे चुके इमरान खान के चेहरे पर नए दूल्हों जैसे ही शर्म  थी .

बुशरा की भविष्यवाणी का अन्धविश्वासी जनता पर उम्मीद के मुताबिक असर पड़ा और पीटीआई ने पंजाब से उम्मीद के मुताबिक सीटें हासिल कीं जिसकी वजह से कुछ छोटे दलों के समर्थन से ही सही 18 अगस्त 2018 को इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बन गए  . इसके तुरंत बाद से ही बुशरा का रुतबा बढ़ता गया और लोग उन्हें पीटीआई की गाड़ मदर तक कहने लगे थे .
इमरान के दाम्पत्यों की दिलचस्पी और सस्पेंस किसी रोमांटिक उपन्यास से कम नहीं है . लोगों की यह आशंका सच साबित हई कि पहली शादी तो जैसे तैसे 9 साल चल गई थी और दूसरी दस महीने तक घिसट गई थी कहीं ऐसा न हो कि तीसरी का अंजाम इससे भी कम मियाद का हो.

आम और ख़ास लोगों की यह आशंका गलत नहीं निकली क्योंकि तीन चार महीनों में ही बुशरा इमरान का घर छोडक़र अपने घर वापस चली गईं . इस बार  पति से अलगाव की वजह पालतू कुत्ते थे जो उनकी आध्यात्मिक राह में भौक भौक कर भी रोड़े अटकाते थे. इमरान खान पर तीसरी बीवी के भी चले जाने का कोई असर क्यों नहीं हुआ और कैसे वे अपनी पत्नी के आशीर्वाद से प्रधानमंत्री बने यह बात अब समझ आने लगी है कि यह एक धार्मिक पाखंड था

जिसके चलते लोग पीटीआई को वोट करे. सिर्फ कुत्तों की वजह से बुशरा इमरान का घर छोडक़र गई थी यह बात कहीं से भी गले उतरने बाली नहीं है. हालाँकि सच यह भी है कि इमरान अपने पांच पालतू कुत्तों से बेइंतिहा प्यार करते थे कभी कभी तो ये कुत्ते उनके दफ्तर और मीटिंगों में भी साथ में जाते थे. इनमें से एक तो उन्हें तत्काकिन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने तोहफे में दिया था  . उनके इस कुत्ता प्रेम की आलोचना पाकिस्तानी संसद में भी हुई थी .  तब हालाँकि चर्चा यह भी रही थी कि इस अलगाव की जड़ में इमरान की बहनें भी हैं.

अब बीती 19 अगस्त को बुशरा जेल उनसे मिलने गईं तो एक बीबी की हैसियत से ही गईं थीं क्योंकि इमरान से कभी उनका तलाक हुआ ही नहीं था. हाँ बुशरा के पहले पति खावर मानेका ने जरुर आरोप लगाया था कि बुशरा ने इद्दत की मियाद पूरी किये बगैर ही इमरान से शादी कर ली थी जो कि सरासर शरीयत के खिलाफ है. इस पर निचली अदालत ने इमरान और बुशरा को 7-7 साल की सजा सुनाई थी. लेकिन जुलाई 2024 में इस्लामाबाद के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए इन दोनों की शादी को जायज करार दिया था. दरअसल में बुशरा इमरान को छोड़कर अपने घर चलीं गईं थीं. .

लेकिन इस अलगाव ने इमरान की पहली 2 शादियों और कई इश्क के किस्सों की याद ताजा कर दी थी जिससे इमरान खान का एक अलग ही चेहरा बेनकाब होता है. और यह साबित करता है कि वे वाकई एक रोमांटिक शख्सियत के मालिक हैं और पूरी शिद्दत से इश्क फरमाते तो रहे हैं लेकिन निभा कभी नहीं पाए. यह बात भी कम दिलचस्प नहीं कि इमरान खान के इश्किया किस्से जांत पांत धर्म और सीमाओं से बंधे हुए नहीं हैं.

बेरहम निकलीं रेहम

एक तरफ जहां बुशरा बी को इमरान के लिए लकी लेडी के तौर पर जाना जाता था तो दूसरी तरफ उनकी पश्तून मूल की दूसरी पत्नी रेहम नैयर खान ने इमरान का जीना दूभर कर दिया था जिन्होंने उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद भी जहर उगलना नहीं छोड़ा था. यह सिलसिला बीती 10 अप्रेल के बाद तक जारी रहा था . 1 अप्रेल 2022 को जब इमरान की विदाई की स्क्रिप्ट मुक्कमल तौर पर लिखी जा चुकी थी तब रेहम ने संयुक्त विपक्ष की भाषा बोलते हुए कहा था , देश के लोगों को इमरान खान द्वारा बनाई गई गंदगी को साफ़ करने के लिए एक साथ खड़े होने पर ध्यान देना चाहिए . 2018 में नया पाकिस्तान बनाने के वादे के साथ वे सत्ता में आए थे लेकिन विफल रहे.

रेहम का एक बड़ा आरोप यह था कि इमरान अव्वल दर्जे के अय्याश शख्स हैं और वे समलैंगिक भी हैं.  शुक्र तो इस बात का रहा कि रेहम ने सीधे सीधे इमरान को औरतखोर मर्द नहीं कहा. 2018 में जब पाकिस्तान में चुनाव प्रचार शवाब पर था तब भी रेहम तरह तरह से इमरान के खिलाफ जहर उगल रही थीं जिससे एक वक्त में लगने लगा था कि इमरान का प्रधानमंत्री बनने का सपना अधूरा न रह जाए. एक तरफ बुशरा के कथित टोटके और जिन्न थे तो दूसरी तरह रेहम के हमले थे जो एक चोट खाई नागिन की तरह पेश आ रहीं थीं

लेकिन रेहम इमरान का जरूरत से ज्यादा बिगाड़ नहीं पाईं जिससे साबित होता है कि एक पिछड़े देश में जहां धर्म के नाम पर सेना की हुकूमत चलती हो वहां के लोग आलोचनाओं और प्रशंसा में कोई खास फर्क नहीं करते.  पाकिस्तान जैसे रूढ़िवादी और कट्टरपंथी देश में खुलेआम प्यार और उसका इजहार  करना किसी गुनाह से कम नहीं माना जाता. ऐसे में इमरान खान की जीत यह एहसास तो करा गई थी कि वोटर ने उनकी इस इमेज से कोई वास्ता नहीं रखा था.

रेहम खान की पहली शादी महज 19 साल की उम्र में ही हो गई थी उनके पति एजाज रहमान उनके चचेरे भाई भी थे और पेशे से मनोचिकित्सक थे. रेहम का परिवार साठ के दशक में लीबिया जा बसा था वहीँ उनका जन्म हुआ  लेकिन उसका पाकिस्तान से नाता नहीं टूटा था. खूबसूरत रेहम पेशावर के जिन्ना कालेज फार वूमेन में पढ़ी थीं.  संपन्न पारिवारिक पृष्ठभूमि वाली रेहम की रूचि पत्रकारिता में थी और वे बीबीसी पर मौसम का हाल सुनाती थी. इसके लिए लोग उन्हें बीबीसी वेदर गर्ल भी कहने लगे थे .

महत्वाकांक्षी होने के साथ साथ रेहम प्रतिभाशाली भी थीं. उनकी उर्दू के साथ साथ हिंदी और अंग्रेजी पर भी अच्छी पकड़ थी. एजाज से शादी कर उन्होंने एक सामान्य गृहिणी की तरह रहना चाहा और इस बाबत कोशिश भी की लेकिन कामयाब नहीं हो पाईं. तीन बच्चों की माँ रेहम को उस वक्त जिंदगी की कडवी हकीकत से सामना हुआ जब एजाज ने उन्हें तलाक दे दिया.  रेहम उन प्रगतिशील महिलाओं में से एक हैं जो यह मानती हैं कि औरत को मर्द से दबना नहीं चाहिए. एजाज का पूरा गुस्सा वे आज तक इमरान पर उतार रहीं थीं तब लगा ऐसा था कि उन्होंने मोहब्बत की ही नफरत करने के लिए थी .

पाकिस्तान में तलाक की कोई घोषित या क़ानूनी वजह होना अनिवार्य नहीं है. इसलिए कोई भी अंदाजा नहीं लगा पाया कि एजाज ने रेहम को तलाक क्यों दिया था.  जहां तलाक पति की मर्जी होता हो वहां औरतों की दुर्दशा क्या होती होगी इसका सहज अंदाजा रेहम को देख लगाया जा सकता था.   रेहम हालातों से हार मानने वाली महिलाओं में से नहीं थीं.  उन्होंने कई मीडिया संस्थानों में काम किया लेकिन उनकी पहचान बीबीसी से बनी . पाकिस्तान के कई चैनल्स पर भी उन्होंने काम किया और एक टीवी पत्रकार और शो मेकर के रूप में अच्छा नाम और पैसा भी कमाया.  2 पाकिस्तानी फिल्मों में भी उन्होंने काम किया.

इमरान खान से उनकी शादी जनवरी 2015 में हुई थी लेकिन महज दस महीनों में ही नौबत तलाक तक आ पहुंची थी . इमरान के परिवारजन इस शादी के लिए सहमत नहीं थे. अक्टूबर 2015 में दोनों का तलाक हो गया और रेहम एक बार फिर बेघर हो गईं. तलाक क्यों हुआ इस बाबत रेहम ने इस दफा कुछ छिपाया नहीं. तलाक के बाद उन्होंने एक बयान में कहा था कि इमरान खान शादी निभाना नहीं जानते. वे अच्छे क्रिकेटर और राजनेता हो सकते हैं लेकिन वे एक  अच्छे लाइफ पार्टनर नहीं हैं.

बात यहीं खत्म नहीं हो गई थी क्योंकि तलाक के बाद रेहम को पाकिस्तान छोडऩा पड़ा था . उन्हें कथित तौर पर धमकियां मिल रही थीं. इस बाबत उन्होंने आखिरी ट्वीट 2 जनबरी 2022 को किया था कि जब वह अपने भतीजे की शादी से वापस लौट रहीं थीं तब इस्लामाबाद में एक बन्दूक के हमले से बाल बाल बचीं. उनकी कार पर मोटर साइकल पर सवार दो लोगों ने गोली दाग दी थी. यह वह वक्त था जब शाहबाज खान और बिलावल खान भुट्टो आपसी मतभेद भुलाते इमरान खान को हटाने एक हो चुके थे .इमरान अब तक कमजोर और अलग थलग पड़ने लगे तो रेहम ने खुले आम कहना शुरू कर दिया था कि उन पर जानलेवा हमलों के पीछे इमरान का हाथ है.

इसमें कोई शक नहीं कि कई छोटे बड़े मीडिया घरानों में काम करने के बाद भी रेहम की पहचान सिमटी हुई थी जिसे विस्तार इमरान से शादी और तलाक के बाद मिला था. हालांकि यह अप्रिय था लेकिन रेहम के हिस्से में स्वभाविक तौर पर शोहरत आई, क्योंकि वे इमरान खान की पत्नी थीं. साल 2018 के चुनाव प्रचार के दौरान रेहम ने इमरान के बारे में जो कहा उसे देख लगता नहीं कि महज दस महीने के वैवाहिक जीवन में वे इमरान के बारे में इतना जानने लगी होंगी या उन्हें इतना समझने लगी होंगी जितना कि वे दावा कर रही थीं.

अपनी किताब जिसका शीर्षक उनके नाम का ही है `रेहम खान` में रेहम ने जो जहर इमरान के खिलाफ उगला है उसे देख लगता है कि रेहम किसी भी कीमत पर इमरान को इतना बदनाम कर देना चाहती थीं कि वे जीत न पाएं. बकौल रेहम इमरान के पांच नाजायज बच्चे हैं जिनमें से कुछ भारतीय भी हैं. इस आत्मकथा में रेहम ने इमरान को खुले तौर पर अय्याश और ड्रग एडक्ट बताया है जो कोकीन और हेरोइन जैसी ड्रग्स के आदी हैं.

बुशरा से शादी करने के बाद इमरान की इमेज एक धार्मिक व्यक्ति की बन रही थी इस पर प्रहार करते रेहम ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि इमरान कुरान तक का पाठ नहीं करते और इतने अंधविश्वासी हैं कि काले जादू में विश्वास करते हैं और एक बार तो एक पीर की सलाह पर उन्होंने अपने पूरे शरीर पर काली दाल लगा ली थी. रेहम की जिंदगी का अधिकतर वक्त लीबिया और इंग्लेंड में गुजरा है इसलिए वे अंदाजा नहीं लगा पाईं कि इमरान को अंधविश्वासी बताकर वे एक तरह से उनका प्रचार ही कर रही हैं. वजह पाकिस्तान के अधिसंख्य लोग गंडा, ताबीज और जादू टोने की गिरफ्त में हैं. ऐसे में उन्हें इसी मिजाज का प्रधानमंत्री मिल जाए तो बात सोने पे सुहागा जैसी हो गई थी.

बात अकेले पाकिस्तान की नहीं बल्कि पूरी दुनिया उसमें भी खासतौर से दक्षिणी एशिया की हालत यही है कि उन्हें एक धार्मिक और अंधविश्वासी इमेज वाला शासक चाहिए रहता है. फिर भले ही वह देश और अर्थ व्यवस्था का बंटाधार कर दे इससे लोग मतलब नहीं रखते और जब होश आता है तब उनके हाथ कुछ रह नहीं जाता. इमरान वाकई विकट के अंधविश्वासी हैं यह बात तब भी उजागर हुई थी जब बुशरा की सलाह पर उन्होंने 2015 से लेकर 2018 की गर्मियां पहाड़ी इलाकों में गुजारी थीं. इससे भी पहले साल 1979 में ओल्ड इज गोल्ड क्रिकेट सीरिज खेलने 28 साल बाद भारत आई पाकिस्तानी टीम के दौरे के दौरान उन्होंने काले जादू का जिक्र किया था. हालाँकि इसमें उन्होंने अपने दौर के धाकड़ बल्लेबाज जाहिर अब्बास को भी घसीट लिया था .

पीटीआई की जीत के बाद रेहम ने इमरान के राजनैतिक भविष्य का आकलन भी यह कहते किया था कि उन्हें चलाने वाले लोग दूसरे यानि फौज के होंगे . यह भी कोई नई बात नहीं थी क्योंकि पाकिस्तान के राजनैतिक इतिहास में जरा सी भी दिलचस्पी रखने बाले बेहतर जानते हैं कि अय्यूब खान से लेकर परवेज मुशर्रफ तक वहां फौजी हुकुमत ही रही है और चुने गए प्रधानमंत्रियों चाहे वे जुल्फिकार अली भुट्टो हों नवाज शरीफ हों या बेनजीर भुट्टो हों में से कोई भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया .

रेहम ने इसी इतिहास के आधार पर ही कहा होगा कि इमरान बहुत ज्यादा दिनों तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नहीं रह पाएंगे और जब उनकी कुर्सी जाएगी तो इज्जत भी चली जाएगी. इमरान ने धर्म के नाम पर वोट मांगे हैं जबकि पर्सनल लाइफ में वे कतई धार्मिक नहीं हैं. प्रधानमंत्री रहते इमरान कभी रेहम के बारे में नहीं बोले लेकिन 30 अप्रेल 2022 को वे बुरी तरह फट पड़े थे. उन्होंने रेहम के बारे में साफ़ कहा कि वह एक माफिया है और `शरीफ परिवार` के इशारे

पर नाच रही है . यह आरोप भी उन्होंने लगाया कि रेहम को उनके खिलाफ किताब लिखने के लिए पैसे दिए गए थे . यह एक सियासी बात भी हो सकती है लेकिन 30 अप्रेल को मुल्तान में आयोजित एक रैली में जज्बाती होते उन्होंने अपनी पहली पत्नी का भी जिक्र किया कि जेमिमा को पाकिस्तान में कोर्ट के मामलों में फसाया गया और `शरीफ माफिया` ने यहूदी लाबी का सदस्य होने का आरोप लगाकर उन्हें बदनाम किया .

क्यों याद आई जेमिमा – 
यह पहला मौका था जब इमरान ने सार्वजनिक तौर पर अपनी पत्नियों का जिक्र किया . जेमिमा को लेकर वे भावुक हुए तो लगता है कि वे अपनी तीनों पत्नियों का तुलनात्मक अद्ध्य्न कर एक निष्कर्ष सा पेश कर रहे थे. शायद उन्हें लगा होगा कि जेमिमा ज्यादा ईमानदार और वफादार थीं जिन्होंने उनके लिए धर्म तक बदल डाला था  .दुनिया भर की दर्जनों महिलाओं के साथ इमरान का नाम जुड़ा और उनके इश्क के चर्चे हमेशा आम रहे और इतने रहे कि लगता है कि 69  में से 50 साल वे इश्क ही फरमाते रहे हैं.

इमरान की जिंदगी में बहैसियत एक औरत सबसे ज्यादा वक्त गुजारने वाली जेमिमा ने उन्हें प्रधानमंत्री बनने के बाद बधाई देते कहा था मेरे बेटों के पिता को बधाई जो प्रधानमंत्री बनेंगे. इसके बाद जेमिमा अपनी दुनिया और बेटों में रम गईं इमरान प्रधानमंत्री बनने से पहले उनसे मिलते रहे थे  . जेमिमा ने इमरान को तलाक देकर पाकिस्तान क्यों छोड़ा था इस सवाल का जबाब भी अप्रेल की ही उठापटक के दौरान मिला था जब नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग -(  नवाज ) के कार्यकर्ताओं ने लंदन स्थित उनके घर के बाहर डेरा डालते इमरान के विरोध में नारेबाजी की थी . इस से आहत जेमिमा ने ट्वीट किया था मेरे घर के बाहर विरोध प्रदर्शन , मेरे बच्चों को निशाना बनाना , सोशल मीडिया पर यहूदी विरोधी गाली देना , यह लगभग वैसा ही है जैसे मैं 90 के दशक में लाहौर वापस आ गई हूँ .

पाकिस्तान के पिछड़ेपन कट्टरवाद और संकीर्णता की इतने कम शब्दों में व्याख्या शायद ही कोई और कर पाए .  गौरतलब है कि साल 1995 में जेमिमा और इमरान की शादी एक चर्च में हुई थी तब जेमिमा की उम्र महज 21 साल थी और इमरान उम्र में उनसे लगभग दो गुने थे . इमरान और जेमिमा की शादी का खासा तहलका मचा था. एक रईस ब्रिटिश फायनेंसर जेम्स गोल्ड स्मिथ की बेटी जेमिमा भी पेशे से पत्रकार थीं जिन्होंने कई स्थापित पत्रिकाओं के लिए लेखन कार्य किया यह वह वक्त था जब इमरान क्रिकेट से सन्यास ले चुके थे इसके पहले उन्होंने अपनी कप्तानी में 1992 में पाकिस्तान को विश्वकप जितवाया था.

जेमिमा इमरान पर हद से ज्यादा फिदा थीं तो कहा जा सकता है कि यह एक कम उम्र अपरिपक्व और अल्हड़ युवती की दीवानगी और जुनून था. लेकिन शादी के बाद इस्लाम अपनाते हुए जेमिमा ने खुद को अप्रत्याशित तरीके से बदला और पूरी तरह इस्लामिक रंग ढंग में ढल गईं.  तब ऐसा लग रहा था कि एक कामयाब क्रिकेटर की जिंदगी गृहस्थी में रम गई है.  खुले विचारों वाली जेमिमा जल्द ही पाकिस्तान के लोगों का दिल जीत लिया . उन्होंने न केवल पाश्चात्य परिधान बल्क् पश्चिमी तौर तरीकों से भी तोबा कर ली .  दरअसल में जेमिमा चाहती थीं कि पाकिस्तान और इस्लाम दोनों उन्हें कुबूल कर लें और अपनी इस कोशिश में फौरी तौर पर वे कामयाब भी रहीं. इमरान के क्रिकेटर साथी सहित पूरा पाकिस्तान उन्हें भाभी कहने लगा था.  अगर जेमिमा पाकिस्तान और इमरान के लिए बदलीं थीं तो इसका भरपूर रिस्पांस भी उन्हें मिला था.

इमरान से उन्हें 2 बेटे हुए .  यह इमरान की भटकती जिंदगी का सुकून वाला दौर था जिसमें उन्होंने पत्नी बच्चों और गृहस्थी का सुख भोगा. इसी दौरान इमरान पर समाज सेवा का भूत सवार हुआ तो उन्होंने अपनी माँ की याद में कैंसर अस्पताल खोल डाला. इस नेक काम में भी जेमिमा उनके साथ थीं. बेमकसद जिंदगी जीना इमरान की फितरत कभी नहीं थी. खेती किसानी और पशु पालन जैसे व्यवसाय वे करते थे लेकिन इससे उन्हें संतुष्टि नहीं मिल रही थी. एक बैचेनी उन्हें घेरे रहती थी जिससे छुटकारा पाने उन्होंने राजनीति में कदम रखते 1996 मे पाकिस्तान तहरीके ए इंसाफ पार्टी ( पीटीआई ) का गठन कर डाला.  इमरान की लोकप्रियता के चलते पीटीआई को शुरुआती दौर में ही पूछ परख मिली तो साफ दिखने लगा था कि यह पार्टी आज नहीं तो कल  पाकिस्तानी सियासत में हलचल मचाएगी.

शुरुआत में इमरान ने वही किया जो आमतौर पर नए दल बनाने वाले करते हैं, मसलन धरने प्रदर्शन सरकार का विरोध और तब्दीली की बात करना.  कहने को तो बदलाव और इंसाफ के लिए पीटीआई बनी थी लेकिन इमरान के पास स्पष्ट राजनैतिक सोच का अभाव था.  पीटीआई के बढ़ते प्रभाव को देखते नवाज शरीफ और परवेज मुशर्रफ ने उन्हें अपने साथ मिलाने की कोशिशें कीं थीं लेकिन इमरान ने मन ही मन जो ठान रखा था वह 2018 के नतीजों से उन्हें हासिल भी हुआ जब वे प्रधानमंत्री बन गए. जेमिमा इमरान को लगातार प्रोत्साहित करती रहीं थी और एक अच्छी पत्नी की तरह उनका साथ भी देती रहीं. शौहर के साथ उन्होंने पूरा पाकिस्तान घूम डाला.  इस दौरान वही हुआ जिसका कुछ तजुर्बेकार लोगों को डर था.

बचपन से खुले माहौल में रही जेमिमा को पाकिस्तानी माहौल में घुटन और बैचेनी महसूस होने लगी .अपनी तरफ से जितना त्याग और एडजेस्टमेंट हो सकता था उन्होंने किया  .पर कट्टर इस्लामिक समाज की बंदिशें उनके व्यक्तित्व को निगलने लगीं तो साल 2004 में उन्होंने इमरान से तलाक ले लिया और दोनों बेटों के साथ ब्रिटेन चली गईं. वहां जाकर वे लेखन और पत्रकारिता में जुट गईं .
जेमिमा और इमरान का तलाक बेहद स्वस्थ ढंग से सहमति से हुआ था तय है इमरान जेमिमा की मनोदशा समझ रहे थे कि वे उन्हें तो चाहती हैं लेकिन रूढि़वाद से और ज्यादा तालमेल नहीं बैठा पा रही है.  दोनों ने बेहद दोस्ताना अंदाज में वैवाहिक विच्छेद करते मिलते जुलते रहने के वादे किए और इस पर अमल भी किया.

इमरान के बेटै कभी कभार पाकिस्तान आते थे और खुद इमरान और उनसे मिलने ब्रिटेन चले जाते थे. यहाँ सोचने बाली बात यह भी है कि जब जेमिमा इमरान के लिए काफी कुछ बदल गईं थीं तो इमरान को भी उनके लिए थोडा बहुत ही सही बदलना चाहिए था आखिर सारी उम्मीदें औरत से ही क्यों. इन दोनों के बीच कोई खटास या कटुता आज भी नहीं है, इसलिए इमरान के प्रधानमंत्री घोषित किये जाने के बाद जेमिमा ने उनके संघर्ष को तरह तरह से ट्वीट करते उन्हें बधाई दी थी और खुद के पति की जगह बेटों के पापा पीएम बनेंगे जैसी बात कही थी.

ब्रिटेन जाकर जेमिमा ने इस्लामिक लबादा उतार फेंका और वे फिर तन और मन दोनों से पाश्चात्य रंग ढंग में ढल गईं.  इमरान के साथ बिताया वक्त उनके लिए एक सपने की तरह था यह उम्र का उन्माद था या फिर वाकई प्यार था यह तो वही जानें लेकिन कभी भी उन्होंने इमरान की शान में गुस्ताखी नहीं की और न ही रेहम की तरह कड़वा बोला, उलटे जब रेहम इमरान पर आक्रामक हो रही थीं तब उन्होंने रेहम को अदालत में घसीटने तक की धमकी भी दी थी .

ये चोंचले चुनाव तक ही सिमटे रहे. इमरान की जीत के साथ ही तू तू मैं मैं बंद हो गई अब हर कोई उत्सुकता से इमरान की तरफ देख रहा था कि वे प्रधानमंत्री बनने के बाद क्या करेंगे कौन सी तब्दीली पाकिस्तान में आएगी और इमरान क्या क्या बदलेंगे . इमरान कुछ नहीं बदल पाए इससे ज्यादा अफ़सोस की बात यह रही कि उनके साढ़े तीन साल के कार्यकाल में पाकिस्तान की अर्थ व्यवस्था चरमराकर रह गई . गले गले तक कर्ज में डूबी पाकिस्तान की जनता त्राहि त्राहि कर उठी जिसका पूरा फायदा विपक्ष ने उठाया और अविश्वास प्रस्ताव लाकर उन्हें चलता कर दिया .
बेनजीर के होते होते रह गए थे

एक वक्त में पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के साथ भी उनके रोमांस के किस्से चटखारे लेकर सुने जाते थे कहा जाता है कि बेनजीर उन पर हद से ज्यादा फिदा थीं .  इमरान की जिंदगी पर किताब लिखने वाले ब्रिटश मूल के लेखक क्रिस्टोफर सैंडफोर्ड ने इस चर्चित प्रेम प्रसंग के बारे में अपनी किताब `इमरान खान द क्रिकेटर द सेलिब्रेटी द पालिटीयिशन` में लिखा है कि बेनजीर और इमरान के बीच शारीरिक संबंध भी बने थे लेकिन क्रिस्टोफर इस बात की पुष्टि नहीं करते लाहौर के शेर का खिताब बेनजीर ने ही इमरान को दिया था.

जानने बाले जानते है कि बेनजीर भुट्टो एक आजाद ख्यालों वाली महिला थीं और एक वक्त में उनकी छवि पीपीपीपी यानी परमानेंट प्रिगनेट प्राइम मिनिस्टर की थी. 1975 के लगभग ब्रिटेन में दोनों पढ़ते थे और अक्सर साथ भी दिखते थे लेकिन राजनीति में दोनों एक दूसरे का विरोध करते रहे. साल 2007 में जब बेनजीर की मौत हुई तब जाकर यह सिलसिला थमा लेकिन बेनजीर का विरोध करते रहने वाले इमरान को इससे काफी लोकप्रियता मिली थी.

इमरान की माँ शौकत खान की इच्छा थी कि इमरान और बेनजीर की शादी हो. इस बाबत उन्होंने कोशिशें भी की थीं लेकिन बेनजीर इमरान से कहीं ज्यादा आक्रामक स्वभाव की थीं. वे समझ गई थीं कि इमरान कभी उनकी अधीनता नहीं स्वीकारेंगे लिहाजा यह प्रेम प्रसंग शादी में तब्दील नहीं हो पाया. अब तक इमरान की प्लेबाय की इमेज भी बन चुकी थी वह भी बेनजीर को पसंद नहीं थी.
इमरान का दूसरा मशहूर इश्क बौलीवुड की बोल्ड अदाकारा जीनत अमान के साथ था सत्तर अस्सी के दशक के दौरान पाकिस्तान क्रिकेट टीम के भारतीय दौरे इमरान जीनत के इश्क के चर्चों के चलते भी सुर्खियों में रहते थे एक वक्त में तो दोनों की शादी की अफवाह भी उड़ी थी, लेकिन यह महज अफवाह ही साबित हुई. क्रिकेट और फिल्म प्रेमी तब यह जानने के लिए बैचेन रहते थे कि इस इश्क का नया अफसाना क्या है.

तब जीनत और इमरान दोनों का कैरियर शवाब पर था . ड्रेसिंग रूम में इमरान के साथी खिलाड़ी तब मानते थे कि मैदान पर इमरान खान ज्यादा थके थके नजर आते हैं क्योंकि पिछली रात ही वे जीनत से मिलने गए थे. ब्रिटिश कलाकार एमा सार्जेंट अस्सी के दशक में इमरान के बेहद नजदीक थीं. इन दोनों की मुलाकात एक पार्टी में हुई थी. वहां आंखें मिलीं और दोनों मे हिंदी फिल्मों सरीखा प्यार हो गया. अक्सर ऐमा और इमरान जंगलों से लेकर पार्टियों तक में साथ दिखने लगे थे,  लेकिन ऐमा एक प्रतिभाशाली कलाकार के अलावा समझदार महिला भी थीं.
कहा जाता है कि इमरान से शादी उन्होंने इसलिए नहीं की थी कि वे पाकिस्तान की घुटन भरी जिंदगी और माहौल में रह नहीं पातीं. रेहम की तरह ऐमा भी नहीं चाहती थीं कि उनकी पहचान पति के नाम से हो इसलिए हर स्तर पर भरपूर प्यार कर लेने के बाद दोनों जुदा हो गए.

अकेली सीता व्हाइट ऐसा नाम था जिससे इमरान पल्ला नहीं झाड़ पाए थे .सीता व्हाइट का असली नाम  ऐना लूसिया था जिनकी इमरान से मुलाक़ात जर्मन स्ट्रीट नाईट क्लब में हुई थी  सीता और इमरान बिना शादी किए लम्बे समय तक पति पत्नी की तरह रहे थे. 1987 के लगभग यह प्रेम प्रसंग उजागर हुआ था और 1992 में सीता ने इमरान से एक बेटी को जन्म दिया था. एक फोटोग्राफर की तलाकशुदा सीता व्हाइट इमरान पर मरती थीं और उनके लिए कुछ भी करने को तैयार रहती थीं. जिसमें बगैर शादी किए साथ रहना भी शामिल था. बेटी का नाम उन्होंने टिरियन रखा और इमरान से उसे अपनाने की गुजारिश की तो इमरान साफ साफ मुकर गए थे.

कुछ अर्से तक सीता चुप रहीं पर बार बार कहने पर भी इमरान ने टिरियन को बेटी नहीं माना तो वे अदालत जा पहुंची .केलिफोर्निया की एक अदालत में  मुकदमा चला और 1997 में यह साबित हो गया कि इमरान ही टिरियन के पिता हैं. खुद इमरान ने भी इस सच को स्वीकार लिया था. लेकिन टिरियन को बेटी होने के वैधानिक अधिकार नहीं दिए थे.  एक जेमिमा को छोड़ इमरान की जिंदगी में जितनी भी औरतें आईं वे या तो शादीशुदा थीं या फिर इमरान की ही तरह उनके इश्किया किस्से मीडिया की सुर्खियां बनते रहते थे और दिलचस्प बात यह कि सभी उम्र में उनसे आधी थीं . सीता व्हाइट इसका अपवाद नहीं थीं लेकिन टिरियन को लेकर वे गंभीर थीं और उसे हक दिलाना चाहती थीं.

जीते जी तो वे ऐसा नहीं कर पाईं लेकिन साल 2004 में हार्ट अटैक से हुई उनकी मौत के बाद इमरान ने टिरियन को बेटी मान लिया था . इसकी वजह सिर्फ यह नहीं थी कि इमरान पसीज गए थे या उनका जमीर जाग उठा था बल्कि यह है कि पाकिस्तान में उनका विरोध इस प्रेम प्रसंग और नाजायज बेटी  को लेकर राजनैतिक स्तर पर होने लगा था . नवाज शरीफ को जब भी इमरान को सार्वजनिक तौर पर नीचा दिखाना होता था तो वे सीता व्हाइट का नाम ले देते थे .  इमरान की प्रेमिकाओं की सूची में और जो प्रमुख नाम शामिल हैं उनमें एक्ट्रेस स्टैफनी बीजम, गोल्डी हान, लीजा केम्पबेल, पत्रकार केरोलिन केलेट, सुजाना कांस्टाइन और बालीबुड की मशहूर ऐक्ट्रेस रेखा वगैरह वगैरह हैं.

अब आगे क्या हैरत की एक और बात यह है कि इमरान की पत्नियों और प्रेमिकाओं की राय उनके बारे में कभी अच्छी नहीं रही सिवाय जेमिमा गोल्ड स्मिथ के जिन्होंने नौ साल ही सही पत्नी धर्म पूरी ईमानदारी से निभाया इससे जाहिर होता है कि जेमिमा ने वाकई प्यार किया था और जितना हो सका उन्होंने इसे निभाया भी   प्यार करना गुनाह नहीं न ही बहुतों से प्यार करने को व्यभिचार कहा जा सकता . इस लिहाज से इमरान कोई अपराधी नहीं लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की भूमिका में वे खरे नहीं उतर पाए. वे जानबूझकर इस सच से भागते रहे कि पाकिस्तान की असल समस्या पिछड़ापन और कट्टरवाद है. सेना के साए में रहते इन चीजों से निपटना किसी चुनौती से कम नहीं था  पर उन्होंने इस बाबत कोई कोशिश न करने का गुनाह तो कर ही डाला जो दरअसल में असेम्बली में उनकी हार की वजह थी . रही बात महंगाई की तो उसे मेनेज किया जा सकता था .

अच्छी बात यह भी है कि इमरान अभी भी जूझ रहे हैं और उनके पास फिर से वापसी करने का मौका भी है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से ही पाकिस्तान में चर्चाओं और अफवाहों का बाजार गर्म है. इसी गर्मी में तड़का इमरान की शादियों तलाकों और इश्किया किस्सों का भी लगता रहता है. रही बात राजनीति की तो सबसे उपर ही कह दिया गया है कि वह पाकिस्तान है जहाँ की राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है. Imran Khan Love Stories

 

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