Hindi Poetry: आँख की पुतली पे कुछ विश्वास लिख
भोर के मस्तक पे दिन की आस लिख
आज कवि कुछ खास लिख
भटकते नंगे बदन काँटों के वन में
शब्द सूली पर पिरोये हैँ कलम ने
उनके चेहरे पर तनिक उल्लास लिख
आज कवि कुछ खास लिख
जिस्म से रिस स्वेद-कण पत्थर को सींचे
सुलगती राहें थके पगतल के नीचे
गुदगुदी सी धूप का अहसास लिख
आज कवि कुछ खास लिख
देख कर कठिनाईयों के दौर अनगिन
कीच से ही कमाल उबरेगा किसी दिन
झोंपड़ी के द्वार पर आवास लिख
आज कवि कुछ खास लिख
धूप बेशक धरी दोपहरी के सिर पर
पवन के आँचल में पसरेगी बिखर कर
हृदय की वीणा पे तू मधुमास लिख
आज कवि कुछ खास लिख
(अगला पृष्ठ देखिये)
मन निराशा की गुफाओं से पुकारे
स्याह सायों में सिमटते शब्द सारे
ज्योत्सना करती कहीं परिहास लिख
आज कवि कुछ खास लिख
अंधी गलियाँ हर तरफ देती दिखाई
पढ़ न पाए सूर्य-किरणों की लिखाई
सिर उठा तारों भरा आकाश लिख
आज कवि कुछ खास लिख
कुछ भला था कुछ बुरा गुजरा ज़माना
थक चुके हैँ सुनते सुनते ये तराना
लिखना है तो अब नया इतिहास लिख
आज कवि कुछ खास लिख Hindi Poetry
लेखक – शाम लाल मेहता
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