Crime Stories: 12 जून, 2026 को बदौसा थाने में काउंसलिंग सत्र के दौरान जब शिवानी चौहान अपने पेरेंट्स के दबाव के वावजूद भी अपने पति ललित वर्मा के साथ ही रहने की जिद पर अड़ी रही तो शिवानी के 55 वर्षीय पिता सत्यकुमार चौहान ने तैश में आ कर अपने कपड़ों के अंदर छिपा कर लाया चाकू निकाल लिया और पुलिसकर्मियों के सामने ही अपनी बेटी शिवानी के ऊपर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया. सारे लोग हक्केबक्के हो कर देखते रह गए.

पेट और हाथ में चाकू के गंभीर वार लगने के कारण बदौसा थाना पुलिस शिवानी चौहान को तुरंत अतर्रा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गई, लेकिन उस की गंभीर हालत को देखते हुए उसे बांदा के मैडिकल कालेज रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उस की मौत हो गई.

यह लोमहर्षक और दर्दनाक घटना समाज की संकीर्ण मानसिकता से ले कर पुलिसप्रशासन की ढिलाई पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है.

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के अंतर्गत बदौसा थाने में 12 जून, 2026 को थाने के अंदर 19 वर्षीय शिवानी चौहान की नृशंस हत्या यानी कि औनर किलिंग और पुलिस अभिरक्षा में सुरक्षा चूक का यह  बेहद गंभीर मामला सामने आया है.

19 वर्षीय शिवानी चौहान ने 18 मई, 2026 को अपने पड़ोसी व प्रेमी 20 वर्षीय ललित वर्मा के साथ घर से भाग कर एक मंदिर में प्रेम विवाह कर लिया था. उस के बाद शिवानी के फेमिली वालों की शिकायत पर बांदा जिले के बदौसा थाने की पुलिस ने प्रेमी जोड़े को मध्य प्रदेश के सतना जिले से बरामद कर लिया.

इस के बाद दोनों को पकड़ कर कानूनी औपचारिकताएं, प्रेमी जोड़े व परिवारों के बयान दर्ज कराने के लिए पुलिस उन्हें बदौसा थाने ले कर आ गई. इस बीच दोनों के फेमिली वाले भी बदौसा थाने में पहुंच चुके थे.

भारतीय समाज में छोटी जाति और ऊंची बिरादरी का विभाजन सदियों पुरानी जाति व्यवस्था और वर्ण व्यवस्था पर आधारित है. समय के साथ कानून बदले हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर दोनों वर्गों के बीच आज भी टकराव देखने को मिलता है. जब छोटी जाति के युवा पढ़लिख कर या रोजगार कर आर्थिक रूप से मजबूत और स्वतंत्र होते हैं और समाज में बराबरी और सम्मान की मांग करते हैं तो सदियों से चले आ रहे उच्च वर्ग के वर्चस्व को ठेस पहुंचती है, जिस से नित नए विवाद पैदा होते रहते हैं.

बांदा की यह घटना इस का प्रत्यक्ष उदाहरण है. यदि उच्च बिरादरी की लडक़ी किसी दलित या पिछड़ी जाति या उस से छोटी जाति के लडक़े से विवाह कर लेती है तो इसे उच्च वर्ग अपने ‘पारिवारिक गौरव’ और ‘जातिगत शुद्धता’ पर हमला मान लेता है.

इस केस में युवक और युवती पूरी तरह से वयस्क थे और उन्होंने अपनी मरजी से शादी की थी. इस के लिए उन्होंने अपने सारे दस्तावेज भी पुलिस के समक्ष प्रस्तुत भी किए थे, लेकिन इस के बावजूद एक पिता अपनी बेटी की स्वतंत्र इच्छा और पसंद को स्वीकार नहीं कर पाया और समाज में अपनी तथाकथित झूठी शान के लिए अपनी ही संतान का कातिल बन गया.

एक थाने को कानूनव्यवस्था और सुरक्षा का सब से सुरक्षित स्थान माना जाता है, लेकिन वहीं पर हत्या हो जाना बेहद ही चिंताजनक है. आरोपी पिता थाने के अंदर धारदार चाकू ले कर प्रवेश करने में कैसे सफल रहा. यह पुलिस की सुरक्षा जांच की एक बहुत बड़ी विफलता को साबित करता है, साथ ही पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद पिता को हमला करते समय क्यों नहीं रोका जा सका? यह भी एक गंभीर सवाल है.

पुलिस कस्टडी में सुरक्षा की इतनी बड़ी लापरवाही पाए जाने पर पुलिस विभाग ने त्वरित काररवाई करते हुए एसएचओ और अन्य दोषी पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया था.

यह दुखद घटना यह साबित करती है कि आज के इस आधुनिक युग में भी बालिग जोड़ों को अपनी मरजी से जीवनसाथी चुनने पर सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर जान का जोखिम उठाना पड़ रहा है. ऐसे संवेदनशील मामलों में पुलिस को अब उन के परिजनों को सीधे या उन के साथ काउंसलिंग करने के बजाय उन्हें तत्काल वन स्टौप सेंटर या न्यायिक सुरक्षा में भेजना चाहिए, ताकि सुरक्षा में ऐसी घातक चूकों को दोबारा होने से रोका जा सके. Crime Stories

 

 

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