Reverse Aging: हजारों साल से इंसान अमरता का सपना देखता आया है. कभी देवताओं के अमृत की कहानियां गढ़ी गईं, कभी तपस्या और चमत्कारों के किस्से सुनाए गए. राजाओं ने अपनी अमरता के लिए बड़ेबड़े यज्ञ करवाए. बादशाहों ने हज किए, मसजिदें बनवाईं. हकीमों के कहने पर खजाना लुटा दिया लेकिन न यज्ञ काम आए न दुआएं काम आईं. आज पहली बार ऐसा लग रहा है कि बुढ़ापे को चुनौती देने का काम मंदिरों, मजारों और चमत्कारों से नहीं बल्कि प्रयोगशालाओं से संभव है.

हाल ही में वैज्ञानिकों ने चूहों पर ऐसे प्रयोग किए हैं जिन में बूढ़े चूहों के कुछ ऊतकों और कोशिकाओं में फिर से जवानी जैसे लक्षण दिखाई दिए. इसे आम भाषा में रिवर्स एजिंग कहा जा रहा है. इस प्रयोग का मतलब यह नहीं कि चूहे बच्चे बन गए या अमर हो गए बल्कि इस नए एक्सपैरिमैंट से चूहों के शरीर के कुछ हिस्सों में उम्र बढ़ने के प्रभाव कम होते दिखाई दिए.

वैज्ञानिकों ने पाया कि उम्र बढ़ने के साथ कोशिकाओं की मरम्मत करने की क्षमता घटती जाती है, डीएनए को नुकसान पहुंचता है, कोशिकाएं कमजोर होती जाती हैं और अंग धीरेधीरे अपनी प्रोडक्टिविटी खोने लगते हैं. इसी नैचुरल प्रोसैस को बुढ़ापा कहा जाता है. अब वैज्ञानिक ऐसे तरीकों पर काम कर रहे हैं जो इस नैचुरल प्रोसैस को धीमा कर सकें.

सदियों तक धर्म और परंपराएं मृत्यु और बुढ़ापे को ईश्वर की इच्छा बताती रहीं. लोगों को समझाया गया कि यह प्रकृति का अटल नियम है और इस का समाधान केवल परलोक में मिलेगा. लेकिन विज्ञान ने बारबार यह साबित किया है कि जिन चीजों को कभी ईश्वरीय व्यवस्था कहा जाता था वे असल में प्राकृतिक प्रक्रियाएं हैं जिन्हें समझा और बदला जा सकता है.

एक समय चेचक को देवी का प्रकोप माना जाता था. आज वह बीमारी लगभग समाप्त हो चुकी है. कभी प्रैग्नैंसी के दौरान बड़ी तादाद में औरतें मर जाती थीं और इसे भाग्य से जोड़ कर देखा जाता था लेकिन मईडिकल साइंस ने उस मृत्युदर को बहुत कम कर दिया है. यह सारा चमत्कार मंदिरों या मसजिदों में नहीं हुआ बल्कि विज्ञान की प्रयोगशालाओं में हुआ. अब विज्ञान की प्रयोगशालाओं में बुढ़ापे पर भी रिसर्च शुरू हो चुकी है जिस का नतीजा मानव सभ्यता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा देगा. हालांकि, चूहों में सफलता का मतलब यह नहीं है कि इंसानों में भी वही नतीजे मिलेंगे. चिकित्सा इतिहास ऐसे अनेक उदाहरणों से भरा पड़ा है जहां जानवरों पर किया गया प्रयोग सफल रहा लेकिन वही प्रयोग इंसानों के मामले में फेल हो गया. इसलिए यह दावा कि चूहों पर प्रयोग से अमरता आ गई, फिलहाल वैज्ञानिक दावा नहीं है.

फिर भी यह शोध एक बड़े बदलाव की ओर इशारा जरूर करता है क्योंकि पहली बार इंसान बुढ़ापे को चैलेंज कर उसे समझने व धीमा करने की कोशिश कर रहा है. भविष्य में उम्र से जुड़ी बीमारियां कम हो सकें, लोग अधिक समय तक स्वस्थ रह सकें और जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो सके तो यह मानव इतिहास की सब से बड़ी उपलब्धियों में से एक होगी.

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन उम्र बढ़ने को धीमा करने और जीवन को काफी लंबा करने वाली तकनीक अपना रहे हैं. इस के लिए रूस ने लगभग 26 अरब डौलर का एक बड़ा लौन्गेविटी कार्यक्रम शुरू किया है. इस कार्यक्रम में जीन थेरैपी द्वारा कोशिकाओं की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा किया जा रहा है. 3डी बायोप्रिंटिंग से मानव ऊतकों और अंगों का निर्माण करने की कोशिश हो रही है.

2025 में एक कार्यक्रम के दौरान पुतिन और शी जिनपिंग इसी विषय पर बातचीत करते नजर आए. इस बातचीत में दोनों नेताओं ने यह संभावना जताई कि भविष्य में मनुष्य 150 वर्ष तक जी सकता है. पुतिन ने कहा कि लगातार आर्गेन ट्रांसप्लांट से अमरता मुमकिन है लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो पुतिन की बात सही नहीं है.

अमरता अभी बहुत दूर की बात है क्योंकि उम्र बढ़ना केवल किसी एक अंग के खराब होने का मामला नहीं है. यह पूरे शरीर और इस की कोशिकाओं का बेहद कौम्पलैक्स सिस्टम है, इसलिए ज्यादातर वैज्ञानिक मानते हैं कि आने वाले दशकों में उम्र तो बढ़ाई जा सकती है लेकिन असली अमरता हासिल होना अभी विज्ञानकथा ही है. असल में पुतिन अमर होने का कोई जादुई तरीका नहीं अपना रहे. वे ऐसे साइंस में इन्वैस्ट कर रहे हैं जिस का लक्ष्य मानव जीवन को लंबा और स्वस्थ बनाना है.

सब से दिलचस्प बात यह है कि जीवन को बढ़ाने की दिशा में जो भी प्रगति हो रही है वो प्रार्थनाओं से नहीं, प्रयोगों से हो रही है. चमत्कारों से नहीं, आंकड़ों से हो रही है और आस्था से नहीं, प्रमाणों से हो रही है. अगर भविष्य में इंसान बुढ़ापे पर जीत हासिल करता है तो यह किसी परमात्मा का उपहार नहीं होगा बल्कि यह मानव बुद्धि, जिज्ञासा और वैज्ञानिक पद्धति की जीत होगी. अमरता मिले या न मिले इतना तय है कि इंसान ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि समस्याओं का समाधान धर्मस्थलों में नहीं, प्रयोगशाला में है. यही विज्ञान और धर्म के बीच सब से बड़ा अंतर है. Reverse Aging

 

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