Women Rights: सड़े हुए संस्कारों की आड़ में
सडांध भरे
खोखले आदर्शो के नाम पर
घिनौनी परंपराओं के खोल में
मर्दवादी
पाशविक मानसिकता को
चाहे जितना भी छुपा लो
चाहे जितना भी दबा लो
लेकिन
पुरुषवादी
धार्मिक व्यवस्था में
नारी की अस्मिता
हमेशा नंगी हुई है
और होती रहेगी.

नार्यस्तु पूज्यन्ते का कितना भी
ढिंढोरा पीट लो
महिला अधिकारों की
कितनी भी
बकैती कर लो
स्त्री शशक्तिकरण की
कितनी भी पैरवी कर लो
तुम्हारी
घृणित नारीविरोधी संस्कृति में
नारी सिर्फ एक देह है
उपभोग की सामग्री है
इससे ज्यादा
उसकी कोई औकात नही.

औरत को दांव पर लगाकर
उसके कान नाक काटकर
उसकी अग्निपरीक्षा लेकर
उसे घर से निकालकर
अनेकों औरतों से
यौन कुंठा मिटाकर
नाबालिग बच्चियों से
विवाह रचाकर
तुम्हारे खोखले
आदर्श पुरुषों ने
क्या साबित किया है ?

यही न कि
नारी सिर्फ एक देह है
उपभोग की सामग्री है
इससे ज्यादा
उसकी कोई औकात नही.

भरे दरबार मे
धर्म के रक्षकों के बीच
समाज के
प्रतिष्ठित पुरुषों के बीच
जब एक नारी नंगी होती है
तो ये नंगापन
उस नारी का नंगापन नही
उसके चरित्र का नंगापन नही
बल्कि
यह अंधे राजा के
अंधे साम्राज्य का नंगापन है

फिर भी इसे धर्म कहते हो
और उस औरत के
नंगेपन के दोषी को
धर्मराज कहते हो
तो ये उस औरत का
नंगापन नही बल्कि
तुम्हारा दोगला पन है.

जब एक औरत
भरे बाजार
या भरे दरबार
नंगी होती है
या की जाती है
तो असल मे
ये उस बेबस औरत का
नंगापन नही बल्कि
उस समाज के
सभी पुरुषों का
नंगापन होता है
ये नग्नता
सिर्फ
एक औरत की नग्नता नही
तुम्हारे
धर्म, समाज, न्याय
और राजनीति की
दरिद्रता भी है

बदबूदार
धार्मिक ग्रंथो की आड़ में
जड़ हो चुकी
थोथी मान्यताओं के नाम पर
अपवित्र आयतों और
नापाक श्लोकों के मकड़जाल में
अपनी
हैवानियत भरी
पौरुषवादी सोच को
चाहे जितना भी छुपा लो
चाहे जितना भी दबा लो
लेकिन तुम्हारी
अराजकतावादी व्यवस्था में
स्त्री की आबरू
हमेशा नंगी हुई है
और होती रहेगी. Women Rights

 

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