Hindi Stories: अमित ने कप उठा कर मुसकराते हुए बोला, ‘‘कितनी अजीब बात है, इतनी बार साथ चाय पी, लेकिन कुछ बातें अब तक अधूरी ही हैं.’’

नंदिनी हंसती हुई बोली, ‘‘क्यों, तुम्हारे भीतर भी किसी शायर की सोच आ गई है क्या आज?’’

अमित ने जवाब दिया, ‘‘शायद. आज कुछ कहने की हिम्मत जुटा ली है मैं ने. बारिश मदद कर रही है शायद.’’

नंदिनी गंभीर होती हुई बोल पड़ी, ‘‘क्या बात है अमित, आज बड़ी अलग सी बात कर रहे हो?’’

चाय की आखिरी चुस्की लेते हुए अमित ने धीमी आवाज में कहा, ‘‘हर बार जब तुम चाय का पहला घूंट लेती हो न, तुम्हारे चेहरे पर जो सुकून आता है वह मु?ो हमेशा रोक देता था, तुम से कुछ कहने से. डर लगता था कि कहीं यह सुकून छिन न जाए.’’

आश्चर्यचकित नंदिनी मुसकराहट के साथ बोली, ‘‘और आज?’’

आंखों में सच्चाई लिए अमित ने सपाट कहा, ‘‘आज मैं चाहता हूं कि वह सुकून मेरी वजह से हो. मैं बरसों से इंतजार कर रहा सही पल का, सही लफ्ज का. सच यह है कि सही चाय की तरह सही प्यार भी धीरेधीरे उबलता है, पकता है. और फिर, वह खुद बोल उठता है.’’ नजरें ?ाकाती हुई नंदिनी धीरे से बोली, ‘‘और मैं भी. हर बार तुम्हारे साथ चाय पीते हुए यही सोचती थी कि यह चाय इतनी अच्छी क्यों लगती है. अब सम?ा आया कि साथ तुम्हारा जो होता है.’’

अमित हैरान होते हुए बोल पड़ा, ‘‘तो, मतलब?’’

नंदिनी शरमाती हुई बोली, ‘‘मतलब यह कि अगली बार की चाय हम ‘प्रेमी’ बन कर पिएंगे. क्या कहते हो?’’

मुसकराहट के साथ एक और चाय का कप उठाते हुए अमित ने कहा, ‘‘तो एक और चाय हो जाए, इस बार ‘प्यार’ के साथ.’’

बाहर बारिश रुक गई थी लेकिन इन दोनों की आंखों में अब भी कुछ बूंदें थीं – भावनाओं की, बरसों के इंतजार की. और चाय? उस में तो अब सिर्फ दूधशक्कर नहीं, प्यार भी घुला था. Hindi Stories

लेखक – संजय सिंह चौहान

 

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