Youth Power Nation Power: जिस प्रकार आज समाज में भ्रष्टाचार चरम पर है, ठीक उसी प्रकार नशे का धंधा भी अपने चरम पर है. नशा करने वालों की संख्या में बेलगाम वृद्धि हो रही है. यों तो नशे के आदी हर वर्ग, हर उम्र के लोग हैं लेकिन वर्तमान में नशे का क्रेज युवाओं के सिर चढ़ कर बोल रहा है. कारण, अभिभावकों का बच्चों के प्रति उदासीन होना या बिना कारण जाने बच्चों को आवश्यकता से अधिक पैसे देना है.
बच्चों के प्रति प्रत्येक मातापिता का कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों की हर गतिविधि पर नजर रखें. साथ ही, नशा जैसी गंदी आदतों के नुकसान के बारे में डांटफटकार कर नहीं, बल्कि प्यारदुलार से बताएं. युवा शक्ति ही किसी भी सफल राष्ट्र की पहली शक्ति होती है.
लेखक – विमल वर्मा
अच्छी कहानी
जून (द्वितीय) अंक में प्रकाशित लेख ‘दहेज हत्या की जड़ में दान का दानव’ बहुत सटीक लिखा गया है. भले ही दहेज को ले कर कानून बने हैं पर आज भी शादियों में दहेज के रूप में पैसों, गहनों और तमाम तरह के सामान का लेनदेन हो रहा है.
सब से बड़ी बात कि लड़की वाले कितने ही धनसंपत्ति वाले हों, लड़की कितनी ही एजुकेटेड, जौब वाली हो या मौडल हो, शादी के बाद एक लड़की के लिए उस का मायका पराया घर बन कर रह जाता है, इतना पराया कि वह वहां बिना मांबाप और भाई की मरजी से आ कर रह नहीं सकती कुछ दिन.
कहने को देश तरक्की कर रहा है, औरतों को मायके में बराबरी का हक मिलने लगा है. लेकिन यह सब सिर्फ कागजों तक ही सीमित है. लेख ‘विधवा की संपत्ति हड़पना आसान नहीं’ और ‘पापा की प्रोफाइल’ कहानी काफी अच्छी लगीं. इन्हें आजमाइए स्तंभ के अंतर्गत जो छोटेछोटे टिप्स दिए जाते हैं वे काफी काम के होते हैं.
लेखक – मिनी सिंह
दिल छूने वाली कहानी व लेख
जून (द्वितीय) अंक में छपी कहानी ‘तैयारी जीत की’ पढ़ने को मिली. स्त्री की ऊहापोह को दर्शाती यह कहानी पढ़ कर ऐसा लगा मानो मेरे अड़ोसपड़ोस या इर्दगिर्द की ही बातें हो रही हैं. इस के अलावा ‘दहेज हत्या की जड़ में दान का दानव’ शीर्षक से प्रकाशित लेख समाज की सच्चाई को उजागर करता है. पढ़ेलिखे लोग भी दहेज मुंह खोल कर मांगते हैं. लेखिका – राशि
हवाहवाई और आमजन
हाइवे पर फोर लेन व सिक्स लेन बना कर लोगों का सफर महंगा कर दिया गया है. कहा गया है कि इस से सफर आसान होगा, रोड पर जाम से मुक्ति मिलेगी, लोग कम समय में बस या अपनी गाड़ी से दूसरे स्थान पर पहुंच जाएंगे.
फोर या सिक्स लेन बनने से रोड पर वाहन फर्राटा भरते दिखते हैं जिस से बहुत ही खतरनाक एक्सिडैंट होने की संभावना बढ़ गई है. इन हाईवेज या एक्सप्रैसवेज से दूसरे शहर जाने की दूरी बढ़ी भी है. लोग अपने गंतव्य शहर जाने के लिए हाईवे पर अकसर भटकते हैं. बस वाले बढ़ी दूरी का किराया यात्री से वसूल लेते हैं.
हां, यह बात जरूर है कि फोर या सिक्स लेन बनने से लोग यह जरूर कहते हैं कि सरकार काम कर रही है. आज भी बस अड्डे पर बस वाले सवारी को आवाज लगाते हैं. एक तरफ गरीबी की बातें, दूसरी तरफ फोर व सिक्स लेन की बातें हैं. वहीं, सरकार द्वारा आम आदमी के लिए हवाई यात्रा सुलभ होने का दावा भी किया जाता है, जो बिलकुल खोखला है. ये सब आम आदमी के लिए सपना है. उस के लिए घर के आसपास की दुनिया काफी है.
लेखिका – सीमा गुप्ता
बच्चों के मुख से
मैं अपनी लड़की को स्कूल की बस में बैठाने के लिए मेन रोड तक गई थी. सुबह का समय था. 5-6 रिकशा वाले दातून कर रहे थे. उस ने पहली बार दातून करते हुए देखा था. उस ने मुझे से पूछा, ‘‘मम्मी, ये लोग लकड़ी क्यों चबा रहे हैं?’’
यह सुन कर मुझे हंसी आ गई. मैं ने उसे दातून के बारे में बताया व उस के महत्त्व को भी समझाया. गया मालू
मेरा भतीजा बहुत नटखट है. हर दम शैतानी करता रहता है. साथ ही, जब भी कोई मुझ से मिलने आता, उस की बातों को बड़े गौर से सुनता है.
एक दिन पड़ोसिन आई. बैठते ही वह अपनी सास की बुराई करने लगी. उस की बात सुनतेसुनते मेरे सिर में दर्द होने लगा. जब वह चली गई, मैं ने झल्ला कर कहा अपना सासपुराण मत खोलिए. मेरा भतीजा मेरी यह बात सुन रहा था.
कुछ दिनों बाद मेरे पति के मित्र की पत्नी आईं. जैसे ही वे घर में घुसीं, भतीजा बोला, ‘‘सासपुराण तो नहीं लाई हैं?’’
वे बालीं, ‘‘सासपुराण क्या होता है?’’ जब मैं ने उन्हें सारी बात बताई तो वे बहुत देर तक हंसती रहीं. अंजू
मेरी बहन का 3 वर्षीय लड़का टीवी देखने का बहुत शौकीन है. वह बहुत देर तक टीवी के सामने बैठा रहता है. एक दिन उस की पसंद का कार्यक्रम आ रहा था. इतने में लाइट चली गई. वह पहले तो बोला, ‘‘यह क्या हुआ?’’ फिर मुझ से कहने लगा, ‘‘मौसी, जल्दी टौर्च ढूंढ़ कर ले आओ, मुझे टीवी देखना है. आप टौर्च टीवी के पास ही रखा करो ताकि प्रोग्राम मिस न हो.’’
लेखिका – डा. कल्पना चुघ
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