BJP Government: साल 2004 से 2014 तक यूपीए सरकार ने सूचना का अधिकार, मनरेगा, शिक्षा का अधिकार, खाद्य सुरक्षा कानून और आधार जैसी कई योजनाएँ शुरू कीं थीं जिसका सीधा फायदा आम जनता को मिला लेकिन दूसरे कार्यकाल के दौरान कांग्रेस सरकार पर 2जी स्पेक्ट्रम, कॉमनवेल्थ गेम्स, कोयला आवंटन जैसे मामलों में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हालांकि बाद में कई मामलों में अदालतों के फैसले आये जिनमें पता चला की भ्रष्टाचार के ज्यादातर आरोप बेबुनियाद थे लेकिन इन फैसलों के आने से पहले ही जनता के मन में सरकार की छवि ख़राब हो चुकी थी.

कांग्रेस के भ्रष्टाचार, अन्ना आंदोलन और निर्भया कांड के बाद कांग्रेस के खिलाफ नेरेटिव इतना मजबूत हुआ की 2014 में बीजेपी सत्ता में आई. 2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस के भ्रष्टाचार, महिलाओं का सम्मान और सबका साथ सबका विकास का नारा दिया था. आरएसएस की पूरी मशीनरी भी सिर्फ इन्हीं बातों पर केंद्रित रही. आरएसएस और भाजपा के लाखों कार्यकर्ता गाँव-गाँव तक पहुँचे. सोशल मीडिया का पहली बार इतने बड़े स्तर पर चुनावी इस्तेमाल हुआ. व्हाट्सऐप, फेसबुक, ट्विटर और डिजिटल प्रचार ने चुनावी राजनीति की दिशा बदल दी. 2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी को हिन्दूवादी नेता के तौर पर नहीं बल्कि विकास पुरुष के रूप स्थापित करने की कोशिश की गई थी.

जनता के पास कोई विकल्प नहीं रह गया था इसलिए 2014 में भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई. जनता को बेवकूफ बनाकर सत्ता हासिल करने का जो तरीका अपनाया गया वह बीजेपी के लिए तो कारगर रहा लेकिन लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक साबित हुआ. पुरानी सरकार की हर कमी को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया जबकि अपनी सरकार के दौरान वही गलतियाँ दोहराई गईं या और उससे भी बड़ी गलतियाँ की गईं. झूठे नैरेटिव बनाए गए. जनता के बीच नफरत और डर का माहौल बनाया गया ताकि महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे असली मुद्दों पर बात ही न हो.

सत्ता में आते ही बीजेपी ने हिन्दू मुस्लिम का सांप्रदायिक नेरेटिव पूरे देश तक पहुँचाने का काम किया. इसके लिए अपर कास्ट मानसिकता वाली मेनस्ट्रीम मीडिया को पूरी तरह कंट्रोल कर उन्हें खुली छूट दे दी गई. दिन रात टेलीविजन पर हिंदुत्व का ऐसा प्रोपगेंडा शुरू हुआ जो आज तक चल रहा है. मंदिर मस्जिद, गऊ मांस, लव जिहाद, थूक जिहाद, लैंड जिहाद और न जाने कौन कौन से जिहाद प्राइम टाइम में दिखाए जाने लगे.

लाईव डिबेट में मुसलमानों के खिलाफ नफ़रत की भाषा बोली जाने लगी. नफ़रत का यह सिलसिला लगातार चलता रहा. यह बीजेपी के लिए मास्टरस्ट्रोक था. मीडिया को गोद में बिठाने से बाकी का काम आसान हो गया. न शिक्षा पर काम हुआ, न स्वास्थ्य पर, न रोजगार पर और न ही आम जनता से जुड़ी किसी भी समस्या को सुलझाने के लिए कोई ठोस जमीनी कदम उठाये गये सिर्फ बयानबाजी हुई, इवेंटबाजी हुई, नफ़रत फैलाई गई, झूठे वादे किये गये और झूठे प्रचार हुए. BJP Government

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