CJP Protest: इसकी 2 बड़ी वजह हैं. NEET में 60 फीसदी से ज्यादा लड़कियां हैं. पेपर लीक और रैंक की गड़बड़ी से उनका नुकसान सबसे ज्यादा हुआ. 2 साल की मेहनत एक दिन में खत्म हो गई तो गुस्सा भी सबसे ज्यादा उसी का है.

दूसरी वजह यह है कि लड़कियों के लिए 1 साल ड्रॉप लेना घर-परिवार के प्रेशर की वजह से और भी मुश्किल होता है इसलिए वो सबसे ज्यादा सड़कों पर उतरी हैं. दिल्ली, पटना, कोटा, हैदराबाद हर जगह प्रोटेस्ट में लड़कियां बैनर लेकर आगे ख़डी हैं. नारे लगा रही हैं और सोशल मीडिया कैंपेन लीड कर रही हैं.

पहले के छात्र आंदोलन सिर्फ लड़कों के आंदोलन हुआ करते थे इस बार माहौल बदला सा नजर आ रहा है इतनी बड़ी तादात में लड़कियाँ निकल पड़ी हैं कि इन्हे इग्नोर करना मुश्किल है इसलिए सरकार पर प्रेशर बढ़ रहा है.

CJP प्रोटेस्ट को एक हद तक सफल जरूर माना जाएगा क्योंकि इसने NEET और NTA के मुद्दे को नेशनल डिबेट का टॉपिक बना दिया. पेपर लीक के बाद सरकार और सुप्रीम कोर्ट पर जो दबाव बना, ग्रेस मार्क्स वापस हुए, CBI जांच शुरू हुई और शिक्षा मंत्री को संसद में जवाब देना पड़ा, ये सब सड़कों पर उतरे छात्रों की वजह से ही हुआ लेकिन अगर मांगों के पैमाने पर देखें तो आंदोलन अभी अधूरा है. छात्रों की मुख्य मांग थी NEET और NTA को भंग करना.

वो पूरी नहीं हुई. सरकार ने सिर्फ रिफॉर्म और सिक्योरिटी बढ़ाने की बात की है, स्ट्रक्चर वही है इसलिए प्रोटेस्ट ने आवाज तो बुलंद कर दी, सरकार की किरकिरी भी करवा दी, पर ठोस बदलाव अभी बाकी है इसलिए फिलहाल इस आंदोलन को सेमी-सफल कहना ज्यादा सही होगा. इसने सरकार को झुकाया जरूर है पर घुटने अभी नहीं टेकवाए हैं. CJP Protest

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...