देश की ध्वस्त हो चुके एजुकेशन सिस्टम को पटरी पर लाने के लिए और एजुकेशन मिनिस्टर के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉक्रोच जनता पार्टी के समर्थन में सोशल एक्टिविस्ट, इंजीनियर और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक लद्दाख की ठंड से निकल कर दिल्ली की उमस और गर्मी में 20 दिन से भूखहड़ताल पर थे.
18 जुलाई को उन्हें दिल्ली पुलिस ने जबरन धरना स्थल से उठा कर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया है. मगर वांगचुक ने वहां भी मुँह या नाड़ियों द्वारा कुछ भी ग्रहण करने से इंकार कर दिया है. उनकी हालत खराब है, लेकिन मोदी सत्ता को फर्क नहीं पड़ रहा है.
अहंकार सत्ता के सर पर चढ़ कर नाच रहा है. जब लोकपाल बिल के लिए अन्ना ने इसी दिल्ली में अनशन किया था तो यही भारतीय जनता पार्टी और उसके तमाम गोदी चैनलों ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ हायतौबा मचा रखी थी. कांग्रेस के पास दिल था. उसने कई बार आंदोलनकारियों के समूह की बातचीत के लिए आमंत्रित किया था.
बातचीत सफल हुई. केंद्र सरकार ने जन लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए संयुक्त समिति बनाने पर सहमति जताई और करीब 12 दिन बाद अन्ना का अनशन तुड़वा दिया. आंदोलनकारियों की बात सुनने और मानने का दिल सिर्फ कांग्रेस के पास ही है.
1984 में जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं, तो इन्हीं सोनम वांगचुक के पिता सोनम वांग्याल लेह-लद्दाख में सरकार के खिलाफ अनशन किया था. तब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी खुद लेह-लद्दाख गईं, सोनम वांग्याल की मांग पूरी करने का आश्वासन दिया और जूस पिलाकर उनका अनशन खत्म करवाया.
सोनम वांग्याल की मांग थी कि लद्दाख के लोगों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया जाए. 1989 में लद्दाख के लोगों को अनुसूचित जाति का दर्जा मिल गया.
सोनम वांगचुक और देश की जनता को यह समझना चाहिए कि वे सरकारें दूसरी होती थीं जिनको किसी के मरने जीने से फर्क पड़ता था. ये वही मोदी सरकार है जिसे इसकी नाक के नीचे 750 किसानों की मौत से कोई फर्क नहीं पड़ा.
फर्क पड़ा तो सिर्फ तब जब सामने चुनाव आया. इस सरकार को ज़रा भी फर्क नहीं पड़ता कि नीट पर्चा लीक मामले से हताश होकर देश के 20 होनहार छात्रों ने अपनी जान दे दी. सरकार को ज़रा भी फर्क नहीं पड़ेगा यदि सोनम वांगचुक जैसा व्यक्ति जिसने गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए दिनरात काम किया, जिस व्यक्ति की पूछ विदेशों तक में है और जिसने लद्दाख में सेना को ठंड से बचाने के लिए गर्म कैंप बना कर दिए, अनशन के चलते मर जाए. मोदी सरकार सत्ता के मद चूर है. उसका घमंड सातवें आसमान पर है.





