UP TET: उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनने का सपना देख रहे हजारों स्टूडेंट्स के लिए इस बार यूपी टीईटी का एग्जाम सिर्फ कठिन नहीं था बल्कि विवादों से भी भर गया. जब नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है तो यूपी जैसे राज्य के एग्जाम का क्या हाल होगा? अभी हाल ही में यूपी-टीईटी के एग्जाम के बाद भी गजब की लापरवाही नजर आई जब एक साधारण से मुहावरे का ऐसा अर्थ निकाला गया जिसे देखकर अभ्यर्थी हैरान रह गए.

3 जुलाई को आयोजित यूपी टीईटी की परीक्षा में हिंदी का एक सवाल पूछा गया- “एक आंख से देखना” मुहावरे का अर्थ क्या है? 8 जुलाई को जारी आंसर की में आयोग ने इसका सही उत्तर “अंधाधुंध करना” बताया. यहीं से विवाद शुरू हो गया. स्टूडेंट्स का कहना है कि “एक आंख से देखना” का सामान्य अर्थ “सबके साथ समान व्यवहार करना”, “पक्षपात न करना” या “सबको बराबर समझना” होता है जबकि “अंधाधुंध करना” का अर्थ बिल्कुल अलग है. बिना सोचे-समझे, बिना विवेक के कोई काम करना यानी दोनों का आपस में कोई सीधा संबंध नहीं है. असल में आयोग ने एक आँख से देखकर ही बिना सोचे-समझे, बिना विवेक के अंधाधुंध जवाब देकर यह साबित किया है कि आयोग में समझदार और पढ़े लिखे लोगों का अभाव है.

हिंदी की ज्यादातर डिक्शनरी, शब्दकोशों और मुहावरा-संग्रहों में “एक आंख से देखना” का अर्थ समान दृष्टि रखना या भेदभाव न करना ही है. दूसरी ओर “अंधाधुंध” शब्द का अर्थ है, बिना सोचे-समझे काम करना या बिना किसी नियंत्रण के अंधेपन की तरह काम करना. दोनों अर्थ अलग-अलग हैं इसलिए अभ्यर्थियों का यह कहना कि आंसर की में गलती हुई है बिलकुल सही है. मामला सिर्फ एक गलत सवाल का नहीं अभ्यर्थियों ने संस्कृत के एक प्रश्न पर भी आपत्ति जताई है.

प्रश्न था, “निम्न में से ऊष्म-वर्ण कौन सा है?” आंसर की में आयोग ने “न” को सही माना जबकि एसपेरेंट्स का कहना है कि संस्कृत ग्रामर के अनुसार “ष” ऊष्म-वर्ण है. यदि यह दावा सही है तो यह भी उत्तरकुंजी की बड़ी गलती होगी.

जिस परीक्षा से सेकेंडरी और सीनियर सेकंडरी स्कूलों के शिक्षक चुने जाते हैं अगर उसी एग्जाम की उत्तरकुंजी पर इतने बुनियादी सवाल उठने लगें तो शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है. हजारों अभ्यर्थी वर्षों मेहनत करते हैं. कई लोग नौकरी छोड़कर तैयारी करते हैं. ऐसे में अगर उत्तरकुंजी ही गलत हो जाए तो उनके भविष्य पर सीधा असर पड़ता है.

अब यह सवाल उठना लाज़िमी है कि क्या आंसर की जारी करने से पहले एक्सपर्ट की समीक्षा हुई? यदि हुई, तो इतनी सामान्य गलती कैसे रह गई? यदि नहीं हुई, तो लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य किस भरोसे छोड़ा गया? हालांकि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने अभ्यर्थियों को 14 जुलाई तक ऑनलाइन आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया है. यह आयोग का एक सकारात्मक कदम है लेकिन सवाल यह भी है कि यदि आंसर की पहले ही सावधानी से तैयार की जाती तो हजारों लोगों को आपत्ति दर्ज कराने की जरूरत ही क्यों पड़ती?

यह विवाद केवल एक मुहावरे का मामला भर नहीं है यह उस व्यवस्था का आईना है जिसमें लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा होता है. अगर आंसर की में गलती हुई है तो आयोग को बिना किसी अहंकार के उसे तुरंत सुधारना चाहिए क्योंकि शिक्षक वही बनेंगे जो आगे लाखों बच्चों को भाषा, व्याकरण और ज्ञान सिखाएंगे यदि शुरुआत ही गलत उत्तर से होगी तो शिक्षा की नींव कैसे मजबूत होगी? वैसे सच बात तो यह है कि उत्तरप्रदेश की डबल इंजन की सरकार का पूरा ध्यान हिन्दू-मुस्लिम, बुलडोजर और विपक्ष को नीचा दिखाने में लगा है ऐसे में सरकार के पास शिक्षा पर ध्यान देने या जवाबदेही तय करने की फुर्सत कहाँ है? UP TET

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