Religion and Society: आम लोगों को धर्म ने पट्टी पढ़ाई हुई है कि पैसा, सुख और सेहत पूजापाठ व तीर्थयात्राओं से आते हैं. यह जताने के लिए प्रधानमंत्री, मंत्रिमंडल के मंत्री, मुख्यमंत्री, बड़े उद्योगपति जैसे मुकेश अंबानी, गौतम अडानी, बड़े ऐक्टर जैसे अमिताभ बच्चन, रणबीर कपूर वगैरह मंदिरों के चक्कर लगाते रहते हैं और बाकायदा आज के जमाने के हिसाब से वे अपने फोटो, वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर डालते/डलवाते रहते हैं और समाचारपत्रों में फोटो सहित समाचार छपवाते हैं.
असल में ये सब बड़े सफल लोग अपना समय इन चोंचलों में खर्च नहीं करते. वे लगातार पढ़ते हैं. उन लोगों को बुलाते हैं जिन्हें जानकारियां होती हैं. ये भारत में बैठेबैठे अंटार्कटिका और सहारा की जानकारी रखते हैं. एनवीडिया और अल्फाबेट कंपनियां एकसाथ क्या काम कर रही हैं? बोइंग क्या नए एरोप्लेन बना रही है? रिपब्लिकन पार्टी कैसे गैरीमैंडरिंग के जरिए सीनेट और कांग्रेस के चुनावों के लिए चुनाव क्षेत्रों की सीमाएं अमेरिका में अदलबदल रही है? साउथ अफ्रीका की खानों में क्या हो रहा है? चीन में डाइवोर्स रेट क्या है? बड़े लोग ये सब जानकारी रखते हैं.
धर्म के नाम पर कुछ पैसा इधर दे दिया, कुछ उधर दे दिया पर मुख्य काम पर इन की पकड़ पूरी बनी रहे, इस के लिए वे मोटी किताबें पढ़ते हैं, रिपोर्टें पढ़ते हैं, रिसर्च पेपर्स पढ़ते हैं.
न्यूयौर्कर, इकोनौमिस्ट, फौरेन अफेयर्स, गार्जियन जैसे अखबारों पर ये नजर डालते हैं, देश के कौन से हिस्से में कौन सी छोटी कंपनी क्यों सफल हो रही है, कौन असफल क्यों हो गया आदि उन्हें पता होता है. तभी तो भारत में भी ये समाचारपत्रों, मैगजीनों, मोटी रूखी किताबें बिकती हैं. दिल्ली की खान मार्केट की बाहरीसंस की किताबों की दुकान में जाएं, दोदो हजार रुपए की किताबें भी दिख जाएंगी जिन को लिखने में लेखकों ने वर्षों रिसर्च की. ये लोग उन किताबों को अपने विशाल घरों की लाइब्रेरी में रखते हैं, पढ़ते हैं.
आम लोगों को एक साजिश के तौर पर आजकल व्हाट्सऐप पर फौरवर्ड करने और इंस्टाग्राम पर रील्स बनाने के लिए लगा दिया गया है जबकि ये बड़े लोग ईरान पर डाले गए 2 बमों और यूक्रेन के ड्रोनों का हिसाब रखते हैं, चीन के ताइवान पर हमले के बारे में ये पता करते रहते हैं.
आम लोगों को बेवकूफ बनाए रखने के लिए दूरदर्शन ने कभी रामायण और महाभारत की कहानियां सुनाई थीं. फिर ‘कौन बनेगा करोड़पति’ की नौलेज वाली लौटरी चलाई थी. आजकल जम कर आईपीएल का तमाशा बेचा जा रहा है. साथसाथ, 4 धाम की महत्ता, अयोध्या के राममंदिर की सुविधाओं, तिरुपति के लड्डुओं, अंबेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण का काम करवाया जा रहा है. आम लोगों को मूर्ख बनाए रखने व सही जानकारी पर कब्जा रखने के लिए ही इंटरनैट मुफ्त में दिया जा रहा है.
जो डेटा आप लोग इस्तेमाल कर रहे हैं, असल में बहुत महंगा है. असल में यह बिजनैसों के लिए है, ईकौमर्स के लिए है, बैकों के लिए हैं, जनता पर नजर रखने के वास्ते सरकार के लिए है. ये वे महंगी जंजीरें हैं जिन्हें पुलिस हथकडि़यों और जेलों में इस्तेमाल करती है जबकि अमीर, नेता और सरकार उस का इस्तेमाल जनता को कंट्रोल में रखने में करते हैं. वे उस पर खर्च करते हैं ताकि जनता गुलाम बन कर बेवकूफ बनी रहे.
आम जनता को बेवकूफ और मंदबुद्धि रख कर उस से गुलामी करवाने के लिए जानकारी और ज्ञान, तर्क, फिलौसफी, फिजिक्स, कैमिस्ट्री, इंजीनियरिंग साइकोलौजी ऊंचों की बपौती रहे, इस के लिए हिंदू धर्म ने बड़ी मेहनत की है.
हिंदू धर्म में कहीं औरतों के हकों की बात नहीं, गरीबों को नया काम करने की तकनीक नहीं सिखाई गई. औरतों को सिर्फ सेवा करने का पाठ पढ़ाया गया. शूद्रों और अछूतों को दास बना कर महान बना दिया गया. उन्हें उन मंत्रों के पास फटकने नहीं दिया गया जिन में असल में ये सब नहीं था. लोगों को यह भ्रम ही था कि ये ज्ञान के भंडार हैं.
ये बातें इतनी बार दोहराई गईं कि लोग न पढ़ने को ही संस्कार और संस्कृति मानने लगे हैं. बिहार के शिक्षा मंत्री व भाजपा के नेता मिथिलेश तिवारी तो साफ कहते हैं कि औरतें शिक्षा पा कर क्या करेंगी. यही बात बाल गंगाधर तिलक ने 1881 में कही थी जब उन्होंने म्यूनिसिपल स्कूलों में अंगरेजों द्वारा लड़कियों और शूद्रों व अछूतों के बच्चों को प्रवेश करने की बात अपने समाचारपत्रों- मराठा (अंगरेजी) और केसरी (मराठी)- में 1880 के दशक में कई बार कही.
आज इसे मौजूदा भारत सरकार पूरे देश में पूरी तरह लागू कर रही है. आज सही तथ्यों से अनजान, ब्रेनवाश्ड युवाओं की भीड़ पैदा हो गई है जो एग्जाम भी 4 में से 1 सही पर दांव लगाने को ज्ञान मान कर चल रही है. सही जानकारी लोगों तक न पहुंचे, इस के लिए सरकारों और अमीरों को टैक्नोलौजी की खूब मदद मिल रही है जबकि गरीबों को चढ़ावे की डलिया मिलना बंद सा हो गया है. Religion and Society





