Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद एफआईआर दर्ज हुई, कई लोगों की गिरफ्तारी हुई और एसआईटी भी बनाई गई. पिछले कुछ दिनों से यह खबर सभी अख़बारों में प्रमुखता से छप रही है और मेनस्ट्रीम मीडिया लगातार इस घपले पर बात करती हुई नजर आ रही है लेकिन सवाल यह है कि इतनी बड़ी खबर सबसे पहले किसने उठाई? इस मुद्दे को सबसे पहले न किसी बड़े टीवी चैनल ने उठाया, न किसी बड़े अखबार ने और न ही हर रात प्राइम टाइम पर ब्रेकिंग न्यूज़ का शोर मचाने वाले बड़े एंकरों ने बल्कि दावा यह है कि इस मामले को सबसे पहले स्वतंत्र पत्रकार और यूट्यूबर अभिषेक उपाध्याय ने अपने यूट्यूब चैनल “टॉप सीक्रेट” पर उठाया.
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा स्वतंत्र पत्रकार और यूट्यूबर अभिषेक उपाध्याय की हुई. लगभग दो दशक तक टीवी पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने अपना यूट्यूब चैनल “टॉप सीक्रेट” शुरू किया. अभिषेक उपाध्याय का दावा है की उन्हें 5 जून 2026 को ही अंदरूनी सूत्र से जानकारी मिली कि चढ़ावे में भारी गड़बड़ी हो रही है. उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट से बात कर इस मामले की पुष्टि करने कि कोशिश की लेकिन जब कोई जवाब नहीं मिला तो अभिषेक ने इस मुद्दे पर वीडियो बनाया और एक गवाह का इंटरव्यू भी सामने रखा. इसके बाद से ही यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया और जांच एजेंसियों को कार्रवाई करनी पड़ी.
अभिषेक उपाध्याय का दावा कितना सही है यह जांच का विषय है लेकिन अभी तक मौजूद रिपोर्टों के अनुसार यह जरूर कहा जा सकता है कि उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल टॉप सीक्रेट पर इस घोटाले को शुरुआत में ही लगातार उठाया, कई इनसाइडर इंटरव्यू किए और घपले के आरोपों को देश के सामने रखा. बाद में मामला बड़े पैमाने पर उछला और पुलिस, एसआईटी और मुख्यधारा की मीडिया ने भी इसे कवर करना शुरू किया.
अभिषेक उपाध्याय का दावा है कि उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर चढ़ावा चोरी के बारे में शुरुआती वीडियो उस समय अपलोड किए थे, जब राष्ट्रीय टीवी मीडिया में यह मामला उठा भी नहीं था. अभिषेक ने यह दावा भी किया कि उनके चैनल ने सबसे पहले यह खबर “ब्रेक” की थी. एक इंटरव्यू में अभिषेक ने बताया कि उन्हें 5 जून 2026 को एक अंदरूनी सूत्र से सूचना मिली थी, उन्होंने ट्रस्ट से इस बारे में जानकारी लेने की कोशिश की लेकिन जब उन्हें ट्रस्ट से जवाब नहीं मिला तब उन्होंने वीडियो अपलोड किया. अभिषेक उपाध्याय का दावा कितना सही है यह आने वाले वक़्त में पता चल जाएगा लेकिन अभी उपलब्ध जानकारी के अनुसार तो यही लगता है कि अभिषेक उपाध्याय इस मामले को शुरुआती चरण में ही उजागर करने वाले पत्रकारों में थे क्योंकि उनके कुछ वीडियोज मेनस्ट्रीम मीडिया कवरेज से पहले सामने आए हैं.
अगर यह साबित भी हो जाये कि अभिषेक उपाध्याय राम मंदिर चोरी को उजागर करने वाले पहले व्यक्ति नहीं थे तो भी इस घटना ने मेनस्ट्रीम मीडिया की रही सही छवि उजागर तो कर ही दी है. देश का मेनस्ट्रीम मीडिया सत्ता से जुड़े मामलों पर कभी पत्रकारिता नहीं करता. इसी वजह से इन्हें गोदी मीडिया” कहा जाता है. इस मामले के उजागर होने के बाद बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर करोड़ों रुपये के घोटाले की खबर मेनस्ट्रीम मीडिया ब्रेक नहीं कर पाती तो करोड़ों रुपये के स्टूडियो, सैकड़ों रिपोर्टर और चौबीस घंटे चलने वाले न्यूज़ चैनल किस काम के हैं?
पत्रकारिता का काम सिर्फ सरकार की चाटुकारिता करना नहीं, बल्कि सत्ता, विपक्ष, धार्मिक ट्रस्ट, बड़े उद्योगपतियों और हर ताकतवर संस्था से सवाल पूछना है. जब मीडिया सवाल पूछना छोड़ देती है तो लोकतंत्र बेमौत मारा जाता है इसलिए यह मामला सिर्फ चढ़ावा घोटाले का नहीं है बल्कि मीडिया की विश्वसनीयता का भी है. भारतीय मीडिया वर्ल्ड रैकिंग में यूँही 157 वे नंबर पर नहीं पहुंचा. Ram Mandir Donation Scam





