NEET Paper Leak 2026: फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ में इंपीरियल कालेज औफ इंजीनियरिंग के प्रिसिंपल वीरू सहस्त्रबुद्धे यानी वायरस का मशहूर डायलौग था ‘लाइफ इज ए रेस…’ यानी जिंदगी एक रेस है अगर तेज नहीं भागोगे तो कोई तुम्हें कुचल कर आगे निकल जाएगा. सरकारी नीतियां युवाओं को कुछ इसी तरह से तैयार होने को प्रेरित कर रही हैं. दूसरे को कुचल कर आगे निकलने के लिए छात्र कोचिंग संस्थाओं के झांसे में फंस कर उन की मुंहमांगी कीमत देने को तैयार हो जाते हैं. दूसरे को कुचल कर आगे निकलने की होड़ से कोचिंग और एनटीए का गठजोड़ मजबूत हो रहा है. इसी गठजोड़ का नतीजा है कि लाखों रुपए की अवैध कमाई की चाहत में पेपर लीक कराए जाते हैं.
पहले मैडिकल में प्रवेश के लिए स्टेट लैवल पर पीएमटी और औल इंडिया लैवल पर सीपीएमटी प्रवेश परीक्षाएं होती थीं जिन में 12वीं की पढ़ाई के आधार पर सवाल होते थे. छात्रों को किसी कोचिंग करने की जरूरत नहीं होती थी. जैसे ही मैडिकल में प्रवेश के लिए नीट परीक्षा का आयोजन हुआ, छात्रों को कोचिंग की जरूरत पड़ने लगी. कोचिंग संस्थाओं का काम पढ़ाना नहीं बल्कि छात्र को नीट के लिए तैयार करने का हो गया. अब छात्र कक्षा 9 से ही नीट की तैयारी करने लगते हैं. इस में सफल होने के लिए कोचिंग सस्थाओं ने पेपर लीक करने शुरू कर दिए. नीट को ले कर सुधार न होता देख अब इस को खत्म करने की मांग भी शुरू हो गई है.
3 मई, 2026 को आयोजित नीट परीक्षा के पेपर आउट होने के बाद इस परीक्षा को 12 मई को रद्द कर दिया गया. इस में 22 लाख 75 हजार 11 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था. 96 फीसदी यानी 22 लाख 5 हजार 35 छात्रों ने परीक्षा दी थी. देश के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में 5,400 सैंटरों पर परीक्षा आयोजित हुई थी. परीक्षा के 4 दिनों बाद 7 मई को एनटीए को पता चला कि नीट के पेपर आउट हो चुके हैं.
राजस्थान में एक गेसपेपर बाजार में आया था. गेसपेपर के 410 में से 120 सवाल नीट पेपर से मिलतेजुलते थे. पेरैंट्स नीट के पेपर को पहले पाने और सही जवाब हल कराने के लिए 50-60 लाख रुपए देने को तैयार थे. पेपर लीक को ले कर छात्र बवाल जरूर करेंगे, इस डर को देखते हुए एनटीए ने खुद ही पहल कर के न केवल परीक्षा रद्द कर दी बल्कि सीबीआई को जांच भी दे दी. बड़ा सवाल यह है कि क्या एनटीए इतना ताकतवर है कि वह सीबीआई को आदेश दे सकती है, जिस से आननफानन सीबीआई ने जांच के काम को शुरू कर दिया? इतनी जल्दी तो पुलिस भी मुकदमा नहीं लिखती?
सीबीआई से जांच के लिए केंद्र सरकार के गृह विभाग से सिफारिश की जाती है. इस के बाद वह आदेश देता है तब सीबीआई जांच शुरू करती है. नीट मामले में इस तेजी के पीछे की वजह लीपापोती करना तो नहीं? सीबीआई की जांच जैसेजैसे आगे बढ़ने लगी, एनटीए और कोचिंग का गठजोड़ सामने दिखने लगा. ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस बार पेपर लीक के केंद्र में राजस्थान और महाराष्ट्र प्रदेश हैं जहां ‘डबल इंजन’ की सरकारें हैं.
पेपर लीक की कैसे खुली पोल
सीबीआई ने जांच शुरू करने के दो दिनों बाद 14 मई को मनीषा वाघमारे को गिरफ्तार किया. वहां से सीबीआई को क्लू मिलने शुरू हुए. मनीषा वाघमारे से पूछताछ के बाद सीबीआई ने 15 मई, 2026 को प्रहलाद विट्ठलराव कुलकर्णी उर्फ पी वी कुलकर्णी को पुणे से गिरफ्तार किया था. वहां से सीबीआई मनीषा मांढ़रे तक पहुंची. वो एनटीए में नीट के पेपर बनाने की प्रक्रिया से जुड़ी थी. सीबीआई को यह खोजना था कि पेपर छात्रों तक कैसे पहुंचा. सीबीआई कड़ी दर कड़ी नीट यूजी परीक्षा 2026 में पेपर लीक का परदाफाश करने के लिए तह तक पहुंच गई.
पेपर आउट खेल के मास्टरमाइंड पी वी कुलकर्णी मूल रूप से लातूर के रहने वाले थे. वहां वे लातूर के दयानंद कालेज में रसायन विज्ञान पढ़ाते थे. 27 साल पढ़ाने के बाद 2022 में जब वे रिटायर हुए तब से पुणे में ही रहने लगे. कालेज में पढ़ाने के बाद उन्होंने लातूर में अपनी क्लासेज शुरू कीं. इस के अलावा, पी वी कुलकर्णी पुणे स्थित एमसीएएस नामक संस्था से भी जुड़े थे. एमसीएएस नीट, जेईई, जेईई मेन और एमएचटी सीईटी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मौक टैस्ट, क्वेश्चन सैट और गाइडैंस मुहैया कराते थे.
अप्रैल 2026 के आखिरी सप्ताह में पी वी कुलकर्णी के पुणे स्थित घर पर कुछ स्टूडैंट्स के लिए खास कोचिंग सैशन चलाए गए थे. यहां कुलकर्णी ने कुछ स्टूडैंट्स को पैसे के बदले ‘गेसपेपर’ दिए थे. पी वी कुलकर्णी मनीषा वाघमारे के जरिए मनीषा मांढ़रे को जानता था. इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने मनीषा मांढ़रे को गिरफ्तार किया. मनीषा मांढ़रे की गिरफ्तारी बेहद अहम थी क्योंकि मनीषा मांढ़रे नीट यूजी 2026 की परीक्षा के पेपर बनाने की प्रक्रिया से जुड़ी हुई थीं.
नैशनल टैस्टिंग एजेंसी यनरी एनटीए ने उन को बौटनी और जूलौजी एक्सपर्ट के तौर पर नियुक्त किया था. इस वजह से उन को बौटनी और जूलौजी के पेपरों तक पूरी एक्सेस दी गई थी. मनीषा मांढ़रे 5-6 सालों से एनटीए के पैनल थीं. अप्रैल 2026 के दौरान मनीषा मांढ़रे ने पुणे में मनीषा वाघमारे के जरिए नीट उम्मीदवारों को इकट्ठा किया. अपने घर पर नीट के लिए विशेष कोचिंग क्लास चलाई. इन कक्षाओं में मनीषा मांढ़रे ने बौटनी और जूलौजी के कई सवाल समझाए और उन की जानकारी दी. छात्रों से कहा गया कि वे इन सवालों को अपनी नोटबुक में लिखें और किताबों में भी मार्क करें. जांच में पाया गया कि इन में से ज्यादातर सवाल 3 मई, 2026 को हुई नीट यूजी 2026 परीक्षा के प्रश्नपत्र के सवालों से मिलते थे.
मनीषा मांढ़रे पुणे के मौडर्न कालेज औफ आर्टस, साइंस और कौमर्स में बौटनी की प्रोफैसर के रूप में काम कर रही थीं. उन के रिटायमैंट में 7 माह बाकी थे. मौडर्न कालेज भाजपा और आरएसएस के करीबी लोगों द्वारा चलाया जा रहा है. समस्त हिंदू आघाड़ी से संबंध रखने वाले मिलिंग एकबोटे के भाई गजानन एकबोटे कालेज के चेयरमैन हैं. कालेज की प्रिसिंपल प्रोफैसर डाक्टर निवेदिता गजानन एकबोटे भाजपा युवा मोरचा की वाइस प्रैसिडैंट हैं. डाक्टर निवेदिता गजानन एकबोटे की सोशल मीडिया पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ फोटो वायरल होने लगी.
इस के बाद अपनी सफाई देते निवेदिता एकबोटे ने कहा कि सीनियर प्रोफैसर मनीषा मांढ़रे पिछले 24 वर्षों से यहां काम कर रही थीं और एनटीए के साथ गोपनीय शर्तों के तहत जुड़ी हुई थीं. मनीषा मांढ़रे 7 महीने बाद रिटायर होने वाली थीं. एनटीए, नीट परीक्षा और प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है. मनीषा मांढ़रे के साथ कालेज और मैनेजमैंट का कोई रिश्ता नहीं था. एनटीए से कालेज का कोई संबंध नहीं था. कालेज ने मनीषा मांढ़रे को निलंबित कर दिया है.
सीबीआई ने पकड़े गए लोगों पेपर टेल बनाते कहा कि नीट पेपर लीक के मास्टर माइंड पी वी कुलकर्णी ने मनीषा मांढ़रे के जरिए पेपर हासिल किए. इस के बाद मनीषा वाघमारे के जरिए धनंजय लोखंड़े को अपने ग्रुप का हिस्सा बनाया. धनंजय लोखंड़े को सीबीआई ने अहल्यानगर जिले से गिरफ्तार किया. सीबीआई के मुताबिक, धनंजय लोखंड़े ने मनीषा वाघमारे से नीट परीक्षा से संबंधित पेपर हासिल किया और उसे शुभम खैरनार को दे दिया था.
शुभम खैरनार और धनंजय लोखंड़े एकदूसरे को जानते थे. बाद में शुभम ने धनंजय लोखंड़े से मिले पेपर जयपुर में जमवारामगढ़ के रहने वाले मांगीलाल बिवाल को दिए. मांगीलाल बिवाल का बेटा विकास बिवाल सवाई माधोपुर के मैडिकल कालेज में एमबीबीएस पहले साल में पढ़ाई कर रहा है. सीबीआई का यह आरोप भी है कि नीट 2025 में भी हरियाणा के यश यादव के जरिए मांगीलाल बिवाल ने पेपर खरीदा था.
इसी परीक्षा में मांगीलाल बिवाल के परिवार से 5 बच्चों का सिलैक्शन हुआ था. दिनेश बिवाल मांगीलाल बिवाल का भाई है जबकि विकास बिवाल बेटा है. दिनेश बिवाल को जयपुर से ही गिरफ्तार किया गया. वह भाजपा के युवा मोरचा का पदाधिकारी है. नीट परीक्षा पेपर लीक मामले में गिरफ्तार यश यादव गुरुग्राम का रहने वाला है. वह उत्तरकाशी से बीएएमएस (बैचलर औफ आयुर्वेदिक मैडिसिन एंड सर्जरी) की पढ़ाई कर रहा था.
सीबीआई ने नासिक के रहने वाले शुभम खैरनार को भी पकडा. शुभम खैरनार नासिक में ही एस आर एजुकेशन कंसल्टैंसी नाम से अपना बिजनैस चला रहा था. शुभम खैरनार ने 29 अप्रैल, 2026 को धनंजय लोखंड़े से मिले नीट पेपर की पीड़ीएफ यश यादव को दी. शुभम तीसरे वर्ष का मैडिकल छात्र है और नासिक में प्रैक्टिस करता है. शुभम ने मैडिकल में पढ़ाई के लिए दाखिला तो लिया था पर उस ने एक भी सेमेस्टर पढ़ाई नहीं की थी. इस के बाद भी उस ने डाक्टरी करनी शुरू की. इस के साथ ही साथ एस आर एजुकेशन कंसल्टैंसी भी चलाने लगा.
सीबीआई ने 18 मई को लातूर से ही रेनूकाई कैरियर कोचिंग सैंटर के संस्थापक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया. शिवराज को 3 मई को हुई परीक्षा के पेपर और उस के जवाब 10 दिनों पहले ही मिल गए थे. शिवराज की मिलीभगत एनटीए के परीक्षा कराने वाले मुख्य कर्ताधर्ताओं से थी जिस से ही पेपर लीक हो सका और परीक्षा के पहले ही शिवराज को पेपर और उस के हल मिल गए.
एनटीए के खोखले दावे
सीबीआई की जांच ने एनटीए के चेहरे को बेनकाब कर दिया है. वैसे, नीट परीक्षा पहली बार विवादों में नहीं घिरी है. 2024 में पेपर लीक ओर ग्रेस मार्क्स विवाद हुआ था. नीट परीक्षा कराने वाली एनटीए परीक्षा की गोपनीयता को ले कर बड़ेबड़े दावे करती रही. वह इस परीक्षा को मल्टीलेयर सिक्योरिटी सिस्टम बताती थी. लगातार परीक्षा का विवादों में होना बताता है कि उस के दावे खोखले हैं. नीट परीक्षा के पेपर तैयार करने के लिए गोपनीयता के साथ देशभर के वरिष्ठ प्रोफैसरों, वैज्ञानिकों और विषय विशेषज्ञों की एक गुप्त समिति बनती है.
पेपर तैयार होने के बाद दूसरा सब से मुख्य स्टैप इस की प्रिंटिंग होती है. टैंडर द्वारा प्रिंटिंग प्रैस का चुनाव होता है. प्रोटोकौल बेहद सख्त होता है. जिस प्रिंटिंग प्रैस को यह काम सौंपा जाता है, कंपोजिंग से ले कर प्रिंटिंग और पैकेजिंग तक सारा काम एनटीए के अधिकारी अपनी निगरानी में कराते हैं. प्रैस परिसर में हर जगह सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं और इन का कम से कम एक साल तक बैकअप सुरक्षित रखा जाता है. प्रिंटिंग प्रैस की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती.
प्रिंटिंग प्रैस के कर्मचारियों को मोबाइल फोन या कैमरा लाने की अनुमति नहीं होती. प्रश्नपत्र डिजिटल एनक्रिप्टेड फौर्म में प्रैस तक पहुंचता है. हर पन्ने पर एक यूनिक कोड होता है ताकि किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में तुरंत उस के सोर्स तक पहुंचा जा सके. अगर प्रिंटिंग के दौरान कोई भी कौपी मिसप्रिंट हो जाती है तो उसे भी एनटीए की जानकारी में ला कर तुरंत नष्ट कर दिया जाता है. छपाई पूरी होने के बाद प्रश्नपत्रों को लोहे के बक्सों में सीलबंद कर दिया जाता है.
नीट परीक्षा के लिए आमतौर पर 3 सैट तैयार किए जाते हैं ताकि परीक्षा के दौरान किसी एक सैट के आधार पर नकल या गड़बड़ी न हो सके. प्रिंटिंग के बाद प्रश्नपत्रों को पूरी तरह सील कर के पहले वाहनों से स्ट्रौंगरूम और फिर परीक्षा केंद्रों तक भेजा जाता है. इस दौरान भी हर मूवमैंट रिकौर्ड की जाती है. परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र तय समय से पहले नहीं खोले जाते और वहां भी निगरानी के कई स्तर होते हैं.
जहां भाजपा वहां पेपर लीक
सीबीआई की छानबीन से पता चलता है कि पेपर लीक करने में एनटीए के लोगों का ही हाथ हो सकता है. इस से यह भी पता चला कि 2024 और 2025 में भी जब नीट परीक्षा में धांधली हुई तो एनटीए की मिलीभगत से ही हुई थी. इस के बाद भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान एनटीए को क्लीन चिट देते रहे. वे यह मानते रहे कि नीट बहुत सुरक्षित हाथों में है. धर्मेंद्र प्रधान के ऐसा कहने के पीछे का राज यह है कि एनटीए के चेयरमैन प्रदीप कुमार जोशी और शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग में सचिव के रूप में आईएएस अफसर विनीत जोशी काम देखते हैं. दोनों पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पूरा भरोसा है.
एनटीए के चेयरमैन प्रदीप कुमार जोशी आरएसएस प्रचारक होने के साथ ही साथ आरएसएस के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी के जबलपुर प्रमुख रहे हैं. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के राजनीतिक कैरियर की शुरुआत भी एबीवीपी से हुई थी. प्रदीप कुमार जोशी 2006 में मध्य प्रदेश लोकसेवा आयोग यानी एमपीएससी के अध्यक्ष भी रहे हैं. मध्य प्रदेश के व्यापमं घोटाले में भी इन का नाम चर्चा में था.
नीट धांधली के चलते 2 साल में 3 बार एनटीए के डीजी बदले गए. 2024 में पेपर लीक विवाद के बाद डीजी सुबोध कुमार सिंह को हटा दिया गया. इस के बाद आईटीपीओ के चेयरमैन को डीजी एनटीए बनाया गया. 2025 में आईएएस राजेश लखानी को डीजी बनाया गया. नीट यूजी परीक्षा 2026 से पहले ही आईएएस अभिषेक सिंह को एनटीए का डीजी बना दिया गया. एनटीए के डीजी भले ही बदलते रहे हों पर इस के चेयरमैन प्रदीप कुमार जोशी को हटाया नहीं गया. प्रदीप जोशी लंबे समय से चेयरमैन की कुरसी पर बने हुए हैं.
एनटीए की अपनी 10 सदस्यों वाली गवर्निंग बौडी बनी है. इस में अलगअलग संस्थाओं के भारीभरकम लोगों को शामिल किया गया है. चेयरमैन प्रदीप कुमार जोशी और डीजी आईएएस अभिषेक सिंह के अलावा 3 डायरैक्टर आईआईटी से हैं. 2 डायरैक्टर एनआईटी से हैं. 2 डायरैक्टर आईआईएम, डायरैक्टर आईआईएसईआर पूणे, वाइस चांसलर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, वाइस चांसलर इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी, चेयरमैन एनएएसी और हरीश पांडेय एमडी डाक्टर हीरानंदानी अस्ताल मुंबई से हैं. भारीभरकम टीम और ढांचे के बाद भी एनटीए पेपर लीक को रोक नहीं पाई है.
एनटीए का गठन करते समय सरकार ने इस का 25 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया था. 10 साल में एनटीए के पास 500 करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि है. एनटीए का काम भी पारदर्शी नहीं है. इन की वैबसाइट देखने पर ही तमाम गड़बड़ी दिखती है. टैंडर फाइलें ओपन नहीं होती हैं. एक जगह दिखा कि एनटीए द्वारा ओएमआर शीट स्कैनर की खरीदारी की गई जिन के मौडल और उन की कीमतों में लंबा अंतर दिखता है. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 3 मई, 2026 को रद्द की गई परीक्षा 21 जून, 2026 को कराने की बात करते कहा कि 2027 से नीट की परीक्षा कंप्यूटर पर ली जाएगी.
एनटीए के पास अभी केवल एक लाख 50 हजार छात्रों की एकसाथ परीक्षा लेने के लिए कंप्यूटर क्लासेस हैं. ऐसे में या तो 22 लाख छात्रों के लिए कंप्यूटर क्लासेस बनेंगी या फिर यह परीक्षा 15 बार में कराई जाएगी. इस के लिए एनटीए को बड़ी संख्या में कंप्यूटर चाहिए होंगे. ऐसे में इन की खरीदारी में भी गड़बड़ी हो सकती है. सो, एनटीए की गहन जांच होनी चाहिए. इस की व्यवस्था को अधिक से अधिक पारदर्शी बनाया जाए जिस से इस की वैबसाइट को देखने से ही सच्चाई दिख सके.
9 साल बाद भी पेपर लीक रोकने में असफल
वर्ष 2026 में नीट परीक्षा में धांधली सामने आने के बाद की सरकार की नाकामी ही नहीं, उस की मिलीभगत भी सामने आ रही है. पहली बार सीधे एनटीए से जुड़े लोगों को सीबीआई ने गिरफ्तार किया है. नीट यूजी परीक्षा में गड़बड़ियों को ले कर राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि, ‘नीट प्रवेश परीक्षा का रद्द होना यह दिखाता है कि इस में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई थी. राजस्थान की भाजपा सरकार ने जानबूझ कर दो सप्ताह तक इसे छिपाने की कोशिश की. इस से भाजपा सरकार का असली चेहरा बेनकाब हो गया है.’
भारत में पिछले 15 सालों में पेपर लीक के मामले चिंताजनक रूप से बढ़े हैं. केंद्र और राज्य स्तर की परीक्षाओं को देखें तो यह संख्या सैकड़ों में हैं. 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार 2017 से 2024 के बीच 70 से अधिक परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं. इस से लगभग एक करोड़ 70 लाख छात्र प्रभावित हुए. सब से अधिक पेपर लीक के मामले उन राज्यों में हुए जहां भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं. इन में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र शामिल हैं.
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि, ‘भ्रष्ट भाजपाई व्यवस्था ने 22 लाख छात्रों के सपनों को कुचल दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तथाकथित अमृतकाल ‘विषकाल’ बन गया है. छात्र आत्महत्या कर रहे हैं. यह आत्महत्या नहीं सिस्टम द्वारा की गई हत्या है. 2015 से ले कर 2026 तक 148 परीक्षा घोटाले हुए. 87 परीक्षाएं रद्द हो गईं जिस से 9 करोड़ बच्चों का भविष्य खराब हो गया. 148 घोटालों में केवल एक को सजा हुई. सीबीआई ने 17 मामले लिए और ईडी ने 11 लिए. इन में से किसी को सजा नहीं हुई. नीट और एआईपीएमटी में अकेले 15 घोटाले हुए. इन के जिम्मेदार अफसरों और मंत्रियों को कभी सजा नहीं दी गई.’
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, ‘पेपर लीक की बारबार हो रही घटनाओं से लाखों छात्र और उन के परिजन नाराज हैं. क्या गारंटी है कि परीक्षा दोबारा करवाने पर प्रश्नपत्र लीक नहीं होगा. नीट की परीक्षा के रद्द होने की घटना से लाखों बच्चों और परिजनों के बीच भाजपा की भ्रष्टाचारी व्यवस्था के विरुद्ध बेहद आक्रोश और हताशा है. जब तक भाजपा सरकार रहेगी, परीक्षा होती रहेगी लीक, भाजपा के जाने के बाद ही परीक्षा प्रणाली होगी ठीक. भाजपा सरकार मतलब नाकाम सरकार.’
कैसे हुआ नीट का गठन
21 दिसंबर, 2010 को मैडिकल काउंसिल औफ इंडिया यानी एमसीआई और डैंटल काउंसिल औफ इंडिया यानी डीसीआई ने मैडिकल परीक्षाओं को कराने के लिए अधिसूचना जारी की. इस अधिसूचना में मैडिकल प्रवेश के लिए पूरे देश में एकसमान परीक्षा ‘नीट’ कराने की बात कही गई थी. अधिसूचना में निजी कालेजों की अलगअलग परीक्षाएं खत्म करने को कहा गया था. इस का उद्देश्य कैपिटेशन फीस और मैडिकल प्रवेश की सीट की बिक्री को रोकना बताया गया था. इस को लागू करने के लिए इंडियन मैडिकल काउंसलिग एक्ट का प्रयोग कर के ग्रेजुएट मैडिकल एजुकेशन रैगुलेशन 1997 में संशोधन किया गया था.
इस का सब से अधिक विरोध क्रिश्चियन मैडिकल कालेज, प्राइवेट मैडिकल कालेज और अल्पसंख्यक कालेजों ने किया था. इन का तर्क था कि इस से मैडिकल प्रवेश परीक्षा का केंद्रीयकरण होगा जिस से राज्यों और अल्पसंख्यक संस्थानों के अधिकार खत्म हो जाएंगे. यह परीक्षा सीबीएसई पैटर्न पर होनी थी जिस से स्टेट बोर्ड में पढ़ने वाले छात्रों के परीक्षा में पिछड़ने का खतरा था. एमसीआई और डीसीआई के इस फैसले के खिलाफ क्रिश्चियन मैडिकल कालेज सुप्रीम कोर्ट गया.
18 जुलाई, 2013 को चीफ जस्टिस अलमतास कबीर, जस्टिस विक्रमजीत सेन और जस्टिस ए आर दवे की पीठ ने 2-1 के बहुमत से एमसीआई और डीसीआई की अधिसूचना को रद्द कर दिया. इस से नीट परीक्षा का खतरा भी टल गया था. जस्टिस अलमतास कबीर, जस्टिस विक्रमजीत सेन ने इस के पक्ष में और जस्टिस ए आर दवे इस के विपक्ष में थे. कोर्ट ने कहा कि एमसीआई को सभी कालेजों पर एकपरीक्षा थोपने का अधिकार नहीं है. इस से निजी और अल्पसंख्यक कालेजों की स्वतंत्रता प्रभावित होती है.
इस के बाद केंद्र में सरकार बदल चुकी थी. कांग्रेस की डाक्टर मनमोहन सिंह सरकार की विदाई हो चुकी थी. एनडीए गठजोड़ की सरकार बनी. इस के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा नेता और गुजरात राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके थे. सरकार बदलने के साथ ही साथ विचारधारा भी बदल चुकी थी. नीतियों में भी बदलाव आ गया था. अल्पसंख्यकों को ले कर सरकार की सोच में बदलाव आ चुका था.
भाजपा के पीछे काम करने वाली आरएसएस की सोच अपनी विचारधारा को फैलाने की होती है. इस के लिए कई रास्तों में सब से प्रमुख शिक्षा होती है. आरएसएस को पता था कि भारत के अलगअलग राज्यों की शिक्षा व्यवस्था का जब तक केंद्रीयकरण नहीं होगा, उस को एक जगह से संभाला नहीं जा सकता. भारत के अलगअलग प्रदेशों में अलगअलग विचारधारा को मानने वाले लोग हैं. ऐसे में राज्यों तक सीधे पहुंचना सरल नहीं है. केंद्र सरकार के आधीन काम करने वाली व्यवस्था इस में मददगार हो सकती है.
11 अप्रैल, 2016 को मैडिकल काउंसिल औफ इंडिया और संकल्प चैरिटेबल ट्रस्ट ने मैडिकल परीक्षा वाली अधिसूचना को ले कर रिव्यू पिटीशन सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की. संकल्प चैरिटेबल ट्रस्ट ने अपने वकील अमित कुमार के जरिए पीआईएल दाखिल की थी. संस्था ने कोर्ट से मांग की कि नीट मैडिकल प्रवेश परीक्षा एकसाथ पूरे देश में लागू हो. निजी मैडिकल कालेज अपनी अलगअलग परीक्षाएं न कराएं ताकि छात्रों को कई परीक्षाओं के बोझ से राहत मिले.
जस्टिस ए आर दवे, जस्टिस शिवकीर्ति सिंह और जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के नीट को ले कर 2013 में दिए गए फैसले को रिकौल कर लिया. इस से नीट के फिर से लागू होने का रास्ता साफ हो गया. सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई, 2016 को नीट पर अपना फैसला विस्तार से सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एमबीबीएस और बीडीएस में प्रवेश केवल नीट के जरिए ही मिलेंगे. इस को निजी, सरकारी, डीम्ड और अल्पसंख्यक सहित सभी कालेजों में लागू कर दिया गया. 2016 में औल इंडिया नीट को फेज 1 माना गया. नीट फेज 2 कराने का आदेश दिया गया जिस से कि उस दौरान हुई परीक्षा में शामिल हुए छात्रों को कोई नुकसान न हो.
कोर्ट ने कहा कि नीट आयोजित न करने को ले कर किसी भी कोर्ट द्वारा पहले पारित आदेश इस निर्णय के सामने प्रभावी नहीं रहेंगे, यही आदेश लागू माना जाएगा. कोर्ट ने यह दलील भी दी कि क्रिश्चियन मैडिकल कालेज बनाम भारत संघ 2014 2 एससीसी 305 के फैसले को देखते हुए नीट आयोजित कराना उचित नहीं होगा और इस आदेश का असर लंबित मामलों पर नहीं पड़ना चाहिए.
कोर्ट ने कहा कि मैडिकल काउंसिल औफ इंडिया बनाम क्रिष्चियन मैडिकल कालेज, वल्लोर 2016 4 एससीसी 342 वापस लिया जा चुका है. इसलिए 21.12.2010 की अधिसूचनाए वर्तमान में प्रभावी हैं और लागू मानी जाएंगी.
तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, जम्मूकश्मीर, पश्चिम बंगाल और गुजरात सहित कई राज्यों ने इस का कड़ा विरोध किया था. उन का तर्क जायज था. स्टेट एजुकेशन बोर्ड का सिलेबस अलगअलग था. नीट परीक्षा सीबीएसई पैटर्न पर होती थी तो इस से गांव से आने वाले छात्रों को पिछड़ने का खतरा था. इस के साथ ही साथ क्षेत्रीय भाषाओं की समस्या भी थी. इन के विरोध को खारिज कर दिया गया. अब नीट के जरिए पूरे देश में मैडिकल शिक्षा की प्रवेश परिक्षा को पूरे देश में एकसाथ कराने का रास्ता खुल चुका था.
भाजपा सरकार को इतने से राहत नहीं मिलने वाली थी. वह ‘एक देश एक चुनाव’ और ‘एक देश एक टैक्स‘ की तर्ज पर ‘एक देश एक परीक्षा’ की तर्ज पर काम करने की सोच रही थी. वह पूरे देश के छात्रों के लिए एक परीक्षा कराने की व्यवस्था बनाने की सोच रही थी. इस सोच के बाद ही नैशनल टैस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए बनाने का काम शुरू हो गया. 2016 के केंद्रीय बजट भाषण में वित्त मंत्री अरूण जेटली ने नैशनल टैस्टिग एजेंसी बनाने की घोषणा की. अरुण जेटली ने कहा कि इस का उद्देश्य प्रवेश परिक्षाओं को प्रोफैशनल तरीके से आयोजित करना होगा. यह संस्था टैक्नलौजी आधारित प्रवेश परीक्षा कराएगी.
एनटीए बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई. जे पी नड्डा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री थे. बैठक में इंडियन मैडिकल काउंसिल (अमेंडमैंट) आर्डिनैंस 2016 पारित किया गया. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इस को लागू करने की अनुमति दी. इस को सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत स्वायत्त संस्था के रूप में शिक्षा मंत्रालय के अधीन गठित किया गया. 2018 से एनटीए ने काम करना शुरू किया. एक तरह से यह संस्था सरकारी नियंत्रण से बाहर एक स्वतंत्र संस्था है, शिक्षा मंत्रालय का एक विभाग नहीं. ऐसा शायद इसलिए किया गया है ताकि इस में अनमने ढंग से नियुक्तियां की जा सकें और किसी तरह का औडिट न किया जाए.
नरेंद्र मोदी की सरकार एक देश एक चुनाव, एक देश एक टैक्स और एक राशन कार्ड जैसे बदलाव कर रही थी. वह राज्यों को अधिकार देने की जगह अधिकारों का केंद्रीयकरण कर रही थी तो उसे एक प्रवेश परीक्षा के रूप में नीट भी पसंद आई. इस को आयोजित कराने के लिए जिस एनटीए का गठन हुआ उस के जिम्मे और भी परीक्षाएं कराने का काम सौंप दिया गया. अब एनटीए देश की सब से बड़ी परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था बन गई. इस पर सरकार का नहीं बल्कि पार्टी यानी भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अपरोक्ष कंट्रोल है.
एनटीए के जिम्मे जौइट एंट्रैंस एग्जाम यानी जेईई मेन, नैशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रैंस टैस्ट यानी नीट, कौमन यूनिवर्सिटी एंट्रेस टैस्ट यानी सीयूईटी यूजी और यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन नैशनल एलिजिबिलिटी टैस्ट यानी यूजीसी नेट परीक्षा कराने का काम आ गया. नैशनल टैस्टिंग एजेंसी का काम छात्रों के लिए प्रवेश परीक्षा कराने का काम किया गया. इन में से कुछ परीक्षाएं वर्ष में एक बार तो कुछ साल में 2 बार आयोजित की जाती हैं. एनटीए ने प्रवेश परीक्षा फौर्म भरने के पैटर्न में पहला बदलाव किया. साधारण हाथ से फौर्म भरा जाना बंद हो गया. कंप्यूटर पर औनलाइन फौर्म भरना कठिन काम हो गया.
आसान नहीं है परीक्षा फौर्म भरना
एनटीए ने परीक्षा देने की प्रक्रिया को इतना जटिल कर दिया कि परीक्षा प्रवेश फौर्म भरने के समय से ही कोचिंग का खेल शुरू हो जाता है. सब से अधिक परेशानी ग्रामीण इलाकों से आने वाले छात्रों को होती है. परीक्षा फौर्म भरने के लिए छात्रों को कोचिंग, साइबर कैफे या एजेंट्स के ऊपर निर्भर रहना होता है. कोचिंग दुकानें इस के लिए रजिस्ट्रेशन कैंप लगाती हैं. वे इस सुविधा को अपने पैकेज में शामिल कर लेती हैं. छात्रों को कोचिंग दुकानों की मदद की दरकार इसलिए होती है कि छोटी सी भूल से परीक्षा फौर्म रद्द हो सकता है.
ग्रामीण इलाकों से आने वाले छात्रों को औनलाइन फौर्म भरने में दिक्कत आती है. उन को डिजिटल फौर्म भरने का तरीका नहीं पता होता. औनलाइन फौर्म इंग्लिश में भरना होता है तो पढ़ने और समझने में दिक्कत होती है. औनलाइन फौर्म भरने में सहयोग करने वाले इस के बदले मोटे पैसे भी लेते हैं. साइबर कैफे वाले 100-200 रुपए लेते हैं. कई दस्तावेज और हस्ताक्षर स्कैन करने पड़ते हैं. कोचिंग वाले अपने पैकेज में ही 2 हजार रुपए इस के लिए जोड़ लेते हैं. ये पैसे नीट की अधिकृत फीस से अलग होते हैं.
सस्ती नहीं है नीट की तैयारी
एनटीए नीट परीक्षा फौर्म भरने वाले सामान्य छात्रों से 1,700 रुपए, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस से 1,600 और एससी व एसटी से 1,000 और अगर विदेश में परीक्षा केंद्र है तो 9,500 रुपए फीस के रूप में लेती है. फीस के अलावा परीक्षा फौर्म भरने की फीस 200 रुपए से 2,000 रुपए तक होती है. दस्तावेज की फोटोकौपी और प्रिंटआउट के लिए 100 से ले कर 500 रुपए खर्च हो जाते हैं. परीक्षा देने के लिए अगर सैंटर अपने शहर में मिल जाए तो 100 रुपए से ले कर 1,000 रुपए तक खर्च आता है. अगर दूसरे शहर में जाना हो तो 2,000 से ले कर 15,000 रुपए तक का खर्च आता है.
नीट की तैयारी में कोचिंग की फीस के बाद स्टडी मैटीरियल सब से मंहगा होता है. इस में किताबें, टैस्ट सीरीज और इंटरनैट का खर्च आता है. यह खर्च 5,000 से 30,000 रुपए के बीच आता है. औनलाइन कोचिंग का खर्च 10 हजार से 60 हजार रुपए का होता है. औफलाइन कोचिंग का खर्च 2 लाख से 10 लाख रुपए के बीच आता है. यह खर्च कोचिंग और छोटेबड़े शहर के अनुसार घटताबढ़ता रहता है. नीट की परीक्षा के बाद भी खर्च होता है. इस में काउंसलिंग, रजिस्ट्रेशन, चौइस फीलिंग, सिक्योरिटी डिपौजिट और कालेज रिपोर्टिंग पर भी पैसा लिया जाता है. काउंसलिंग फीस अलगअलग राज्यों में अलग है. यह 5 हजार रुपए तक है.
हर साल 22-24 लाख छात्र नीट की तैयारी करते हैं. एक छात्र 1 से 3 साल का समय खर्च करता है. बड़ी संख्या में छात्रों को दूसरे शहरों में जा कर पढ़ना पड़ता है. इस से कोचिंग ही नहीं, पूरा एक बाजार बन जाता है. जिन जगहों पर कोचिंग होती है वहां खानेपीने की दुकानों में सब से अधिक ब्रेडरोल की दुकानें खुल जाती हैं. छात्र कोचिंग से निकलते हैं, ब्रेडरोल हाथ में लेते हैं, चलते हुए खातेखाते मंजिल तक पहुंच जाते हैं. नीट की तैयारी केवल परीक्षा भर नहीं रह गई है, यह एजुकेशन इकोनौमी बन गई है. पैसा बढ़ने से इस में भ्रष्टाचार और अपराध बढ़ता जा रहा है. लाखों छात्र परीक्षा की तैयारी, कोचिंग, किताबों, होस्टल, औनलाइन क्लास और टैस्ट सीरीज का सहारा लेते हैं.
निशाने पर क्यों हैं कोचिंग संस्थान
नीट पेपर लीक के पीछे का काला सच सामने आने के बाद यह साफ हो गया है कि नीट केवल एक परीक्षा भर नहीं है. यह हजारों करोड़ रुपयों के कोचिंग कारोबार का आधार बन चुकी है. नीट और जेईई की तैयारी कराने वाली कोचिंग संस्थाओं ने अपना एक पैरेलल एजुकेशन सिस्टम बना लिया है. इस का आधार कई राज्यों की शिक्षा व्यवस्था से भी बड़ा है. औनलाइन टैस्ट प्रैप और कोचिंग बिजनैस 2025 तक 45 हजार करोड़ से 55 हजार करोड़ रुपए के बीच पहुंच गया है. जिस तरह से शहरों में छोटे डाक्टर की प्रैक्टिस बंद हो गई, उस की जगह बड़े कौर्पोरेट अस्पतालों ने ले ली ठीक उसी तरह से शिक्षकों के नाम से जाने जानी वाली कोचिंग संस्थाए खत्म हो गई हैं. उन की जगह ब्रैंडेड कोचिंग संस्थानों ने ले ली है.
ये कोचिंग दुकानें दिल्ली और कोटा के साथ ही साथ पूरे देश में फैल गई हैं. बड़ी कोचिंग में एलन, कैरियर, आकाश, फिजिक्सवाला, फिटजी, नारायण ग्रुप और सर चैतन्य प्रमुख हैं. 2024 में एलन का राजस्व 3,200 करोड़ रुपए, आकाश का 2,000-4,000 करोड़ रुपए और फिजिक्सवाला का 2,000 करोड़ रुपए बताया जाता है. नीट, क्यूट और जेईई जैसी परीक्षाओं में हर साल 60 लाख से अधिक छात्र एनटीए के माध्यम से परीक्षा देते हैं. इन सभी छात्रों के बीच आगे निकलने की रेस होती है. इस भारी रेस ने कोचिंग संस्थानों को एक बड़े बिजनैस में बदल दिया है. ऐसे में यह साफ नजर आने लगा है कि नीट के गठन के पीछे कोचिंग करोबार को बढ़ाना भी एक कारण था.
प्रतियोगी परीक्षाओं के घोटालों में कोचिंग संस्थानों या उन से जुड़े लोगों के नाम पहले भी सामने आते रहे हैं. मध्य प्रदेश का व्यापमं घोटाला देश के सब से चर्चित परीक्षा घोटालों में गिना जाता है. इस में सौल्वर गैंग, फर्जी अभ्यर्थी और परीक्षा नैटवर्क का खुलासा हुआ था. जांच में कई बिचैलियों और कोचिंग से जुड़े लोगों के नाम सामने आए थे. यह बात और है कि इस के मुख्य कर्ताधर्ता गायब रहे और यह राज फाइलों में दब कर रह गया. इस के अलावा बिहार, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के पेपर लीक मामले सामने आते रहे हैं. पुलिस ने ऐसे गिरोह पकड़े जिन का संबंध कोचिंग सैंटरों या ट्यूटर नैटवर्क से था. ये छात्रों से लाखों रुपए ले कर उन को पेपर देते हैं. टैक्नलौजी के दौर में व्हाट्सऐप और टैलीग्राम के जरिए प्रश्नपत्र भेजना सरल हो गया है.
शिक्षा व्यवस्था में जैसेजैसे केंद्रीयकरण होने लगा, फौर्म भरने से ले कर परीक्षा देने तक का काम छात्रों के लिए कठिन होने लगा. इस काम को सरल करने का काम कोचिंग संस्थाओं ने शुरू किया. जो छात्र स्टेट बोर्ड से 12वीं की परीक्षा पास कर के नीट, जेईई और क्यूट जैसी प्रवेश परीक्षा देते हैं उन के लिए जरूरी है कि वे प्रवेश परीक्षा के पैटर्न को समझें. 12वीं तक की परीक्षाओं में छात्रों को लिखने के लिए कहा जाता है. नीट, जेईई और क्यूट में छात्र को चार में से एक सवाल के सामने गोला करना होता है. इस में उस को दिक्कत होती है क्योंकि उसे 180 सवालों के उत्तर देने होते हैं. कोचिंग दुकानें इस की प्रैक्टिस कराती हैं.
मसला केवल प्रवेश परीक्षा तक नहीं होता. आगे की पढ़ाई के लिए अच्छा रैंक लाना होता है. इसलिए छात्र मजबूर हो कर कोचिंग जौइन करते हैं. कई कोचिंग संस्थाएं रैंक की गारंटी देती हैं. कोचिंग सफल तभी होगी जब उन के यहां से अधिक से अधिक छात्र सिलैक्ट होंगे. इस के लिए वे कोचिंग परीक्षा कराने वाली संस्थाओं से संपर्क करती हैं. इन के टारगेट पर परीक्षा केंद्र कर्मचारी, प्रिंटिंग प्रैस, आईटी सिस्टम से जुड़े लोग, पेपर बनाने वाले शिक्षक और बिचैलिए होते हैं. पेपर बनने से ले कर छात्र तक पहुंचने में किसी न किसी लैवल पर पेपर लीक करने की सेंधमारी संभव हो सकती है. इस को रोका नहीं जा सकता है.
पेपर लीक का पूरा नैटवर्क संगठित गिरोह की तरह काम करते हैं. कोचिंग संस्थानों के पास बड़ी संख्या में छात्रों का डेटा और संपर्क नैटवर्क होता है. उन को जरूरत केवल पेपर की होती है. पेरैंट्स इस के लिए पूरी कीमत देने को तैयार होते हैं. ऐसे में पैसे की कोई कमी नहीं होती. रैंक और रिजल्ट कोचिंग संस्था का सब से बड़ा प्रचार करते हैं. तभी छात्रों की भीड़ बढ़ती है और छात्र मुहंमागी कीमत देने को तैयार होते हैं. इस दबाव में अनैतिक तरीकों की आशंका बढ़ती है.
एनटीए और कोचिंग संस्थाओं का खतरनाक गठजोड जिस तरह से नीट परीक्षा में सामने आ रहा है कि उस से निबटने के लिए कंप्यूटर बेस्ड टैस्टिंग से परीक्षा लेना कोई हल नहीं है. शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की जरूरत है. परिक्षाओं को पहले की तरह से स्टेट लैवल पर आयोजित किया जाए ताकि 12वीं पास करने वाले बच्चों को कोचिंग न करनी पड़े. अपने प्रदेश में रह कर वे पढ़ेंगे तो बड़े शहरों में रह कर पढ़ने के खर्च से बच जाएंगे. छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कालेजों की संख्या और सीटों की संख्या को बढ़ाया जा सकता है. सरकारी शिक्षा के कमजोर होने पर छात्र महंगी कोचिंग पर निर्भर हो जाते हैं. इस दिशा में काम करने की जरूरत है.
जितनी बड़ी परीक्षा होगी उस में गड़बड़ी की उम्मीद भी उसी हिसाब से बड़ी होगी. यह परीक्षा आधारित बाजार बन जाता है. पेपर ट्रांसपोर्ट, डिजिटल सुरक्षा, परीक्षा केंद्र निगरानी जैसे काम बढ़ जाते है. इन में सेंधमारी करने के लिए माफिया सक्रिय हो जाते हैं. परीक्षाएं स्टेट लैवल पर होंगी तो उन पर नियंत्रण करना सरल होगा. अगर पेपर एक जगह आउट भी हो गया तो कम छात्रों का नुकसान होगा. जैसे अलगअलग राज्यों में अलगअलग समय में चुनाव होते हैं तो गडबड़ी कम होती है.
अगर एकसाथ पूरे देश में चुनाव होंगे तो व्यवस्था करना सरल नहीं होगा. सरकार को केंद्रीयकरण की जिद छोड़नी चाहिए. डिजिटल जमाने में एक ही जगह से चीजों में सेंधमारी करना सरल होता है. समाज चढ़ावा संस्कृति पर भरोसा करता है. उसे अपनी मेहनत पर भरोसा नहीं है. वह मंदिर के साथसाथ कोचिंग को शिक्षा का मंदिर मान कर पैसा देता है. उसे उम्मीद होती है कि कोचिंग किसी न किसी तरह से उस के सपनों को साकार कर देगी. इस के लिए पेपर लीक से ले कर परीक्षा की तैयारी के पैसे देने को तैयार रहता है.
शिक्षा व्यवस्था को बदलने में सरकार के साथ पेरैंट्स और छात्रों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी. नहीं तो देश में क्लास का अंतर कभी मिट नहीं पाएगा. जो छात्र पेपर खरीदने लायक होगा वह परीक्षा पास कर लेगा. गरीब गरीब ही रह जाएगा क्योंकि उस के पास न अच्छे स्कूल होंगे और न पेपर लीक कराने के लिए पैसे.
कैसा होता है नीट का पेपर
नीट के पेपर में आने वाले सवालों को अलगअलग श्रेणियों में बांटा जाता है. करीब 30 प्रतिशत सवाल बेसिक थ्योरी और फार्मूलों पर आधारित होते हैं. लगभग 50 प्रतिशत सवाल कौन्सैप्ट और एप्लिकेशन आधारित होते हैं. 20 प्रतिशत सवाल कठिन और विश्लेषणात्मक होते हैं. सवालों की कुल संख्या 180 होती है. 45 सवाल फिजिक्स, 45 सवाल कैमेस्ट्री के होते हैं. 90 सवाल बायोलौजी से आते हैं. इन में 45-45 सवाल बौटनी और जुलौजी के होते हैं. हर सही उत्तर पर 4 अंक मिलते हैं. गलत उत्तर पर एक अंक कट जाता है. कुल 720 अंक होते हैं. परीक्षा औफलाइन ओएमआर शीट पर होती है. सवाल के सामने बने 4 गोलों में से सही जवाब वाले एक गोले को काला करना होता है. परीक्षा का समय 3 घंटा 20 मिनट का होता है.
किस काम का एंटी पेपर लीक कानून
2024 में नीट परीक्षा में पेपर लीक के बाद देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन होने लगा. इस के दबाव में मोदी सरकार ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024 बनाया. इस को एंटी पेपर लीक कानून भी कहा जाता है. इस की जरूरत प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और संगठित धोखाधड़ी को रोकने के काम में कानूनी कार्यवाही किए जाने के लिए थी. 21 जून, 2024 से लागू इस कानून के तहत दोषियों को 3-5 साल की जेल, 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना हो सकता है. इस में दोषी पाए जाने पर परीक्षा केंद्रों और उन के सर्विस प्रोवाइडर पर 4 साल तक का प्रतिबंध और 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लग सकता है.
यह कानून यूपीएससी, एसएससी, बैंक, रेलवे और एनटीए जैसी केंद्रीय भरती संस्थाओं द्वारा आयोजित परीक्षाओं पर लागू होता है. 2024 में यह कानून बनने के बाद 2026 में नीट परीक्षा के पेपर आउट होने के कारण रद्द किया गया. ऐसे में परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था एनटीए दोषी है. तो क्या एनटीए की गवर्निंग बौडी को सजा दी जाएगी? एंटी पेपर लीक कानून लागू होने के बाद भी परीक्षाओं में नकल रुक नहीं रही है तो इस कानून को बनाने का क्या लाभ हुआ? NEET Paper Leak 2026





