Online Education: समय की बचत करने के लिए आजकल के स्टूडैंट्स औफलाइन क्लासेज के बजाय औनलाइन क्लासेज को प्रिफरैंस दे रहे हैं लेकिन इसी बीच कुछ पेरैंट्स और स्टूडैंट्स को यह शिकायत रहती है कि औनलाइन वाले टीचर्स पढ़ाने के अलावा इधरउधर की बातें ज्यादा करते हैं जिस से पढ़ाई का टाइम वेस्ट होता है लेकिन यह जानना जरूरी है कि ये इधरउधर की बातें टाइम वेस्ट नहीं बल्कि लाइफ की स्मार्ट इन्वैस्टमैंट होती हैं.

आ जकल अगर आप किसी औनलाइन क्लास में बैठ जाएं तो आप को जल्दी समझ आ जाएगा कि वहां सिर्फ किताबों की बातें नहीं होतीं. कई बार टीचर पढ़ाई के बीचबीच में अपनी जिंदगी के किस्से सुनाने लगते हैं. कभी अपने संघर्ष के दिनों की कहानी, कभी किसी स्टूडैंट की सफलता की कहानी तो कभी कोई लव स्टोरी.

कई बार यह सब टाइम वेस्ट लगता है. कई लोग कहते हैं कि ‘क्लास में पढ़ाई होनी चाहिए, ये सब बातें क्यों?’ लेकिन अगर थोड़ा सोचें तो सम?ा आएगा कि आज की जनरेशन के लिए ये बातें उतनी ही जरूरी हैं जितनी पढ़ाई.

आज के समय में बच्चों के पास जानकारी तो बहुत है लेकिन जीवन की समझ बहुत कम है. मोबाइल, इंटरनैट और सोशल मीडिया ने उन्हें हर तरह का कंटैंट तो दे दिया है लेकिन सहीगलत का फर्क सम?ाने वाला कोई नहीं है. आज के जेनजी बच्चे घर में किसी की नहीं सुनते. पेरैंट्स चाहे कितना भी समझाएं, वे एक कान से सुन कर दूसरे से निकाल देते हैं, यह सोच कर कि मम्मीपापा पुराने जमाने के हैं, वे कुछ नहीं समझते.

स्कूल में हालत और भी खराब है. ज्यादातर बच्चे वहां सिर्फ टाइम पास करने के लिए जाते हैं. क्लास में मोबाइल, दोस्तों से गप्पें या फिर टीचर की क्लास को इग्नोर करना. स्कूल टीचर भी इतने सारे बच्चों पर व्यक्तिगत ध्यान नहीं दे पाते. नतीजतन, बच्चे स्कूल से भी कुछ खास सीखे बिना निकल आते हैं.

लेकिन जब बच्चा कोचिंग या औनलाइन क्लास लेने को बैठता है तब उस की मानसिकता थोड़ी बदल जाती है. वहां पैसे दिए जाते हैं, इसलिए थोड़ी सीरियसनैस आ जाती है. टीचर छोटा सा भी पौइंट बताते हैं तो ध्यान से सुनते हैं. उन्हें पता होता है कि वे वहां पढ़ाई के लिए आए हैं. उसी दौरान अगर टीचर पढ़ाई के साथसाथ जिंदगी की कुछ बातें भी बता दें, जैसे मेहनत का महत्त्व, गलत संगत से बचना या रिश्तों को संभालना तो वह बात उन के दिमाग में ज्यादा असर करती है.

कई औनलाइन टीचर जानबूझ कर क्लास में अपने संघर्ष के किस्से बताते हैं. वे बताते हैं कि कैसे उन्होंने कम संसाधनों में पढ़ाई की, कैसे असफलताओं का सामना किया और फिर आगे बढ़े. ये बातें सुन कर कई स्टूडैंट्स को प्रेरणा मिलती है कि अगर कोई साधारण इंसान इतना आगे बढ़ सकता है तो वे भी कोशिश कर सकते हैं. इसी तरह के एक जानेमाने टीचर हैं खान सर, जो बच्चों को न सिर्फ आसान भाषा में कठिन विषय सम?ा देते हैं बल्कि पढ़ाई के बीच में ही वे टौपिक से जुड़े अपने जीवन के किसी किस्से को भी बताने लगते हैं. जो इंट्रैस्ंिटग होने के साथ प्रेरणादायी भी बन जाता है. फिजिक्सवाला, नेक्सट टौपर, वेदांतु, अनअकैडमी जैसे आज सैकड़ों औनलाइन क्लासेज चलती हैं जिन में हर सब्जैक्ट के अलगअलग टीचर्स भी होते हैं और ये सभी टीचर्स एक घंटे की क्लास में बच्चों का ध्यान बंटाने के लिए मोटिवेशनल बातें भी करते हैं.

रियल लाइफ स्किल्स जरूरी

अच्छे औनलाइन टीचर समझते हैं कि आज का छात्र सिर्फ 95 फीसदी मार्क्स या आईआईटी या नीट की तैयारी नहीं कर रहा. वह एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां उसे रियल लाइफ स्किल्स की बहुत जरूरत है : जैसे फेलियर से कैसे उबरें, रिलेशनशिप में क्या सही है क्या गलत, डिसिप्लिन कैसे बनाए रखें, गलत दोस्तों से कैसे बचें आदि. कई बार बच्चे पेरैंट्स के डर की वजह से भी उन से हर बात शेयर नहीं कर पाते और रही बात दोस्तों की तो इस उम्र में लगभग हर बच्चा अपने कैरियर के पीक पर होता है. कुछ दोस्तों से वे कटऔफ कर लेते हैं तो कुछ इन्फीरियोरिटी कौम्प्लैक्स के चलते दोस्तों से बात करने में हिचकिचाते हैं और रिश्तेदारों से तो कोसों दूर भागते हैं. ऐसे में बचते हैं तो बस कोचिंग टीचर, जिन से बात करने में स्टूडैंट्स को हिचकिचाहट नहीं होती.

दिल्ली के मानव ने इस साल बोर्ड की परीक्षा दी. उस ने नैक्सट टौपर नाम से एक औनलाइन बैच खरीदा था. सालभर साइंस पढ़ने के बाद उस ने बताया कि 12वीं क्लास में आते ही मेरे अंदर कन्फ्यूजन शुरू हो गया था कि मैं कौन सा कोर्स करूं लेकिन हर दिन उस बैच की क्लास लेने के दौरान टीचर जब अपनी स्टूडैंट लाइफ की स्ट्रगल स्टोरी सुनाते हैं तो बच्चे खुद से रिलेट करते हैं. ‘सर भी तो ऐसे ही थे’, ‘तो सर ने भी यह मुश्किल देखी थी’ यह सोच कर उन में उम्मीद जागती है.

अनुभव व कहानियां दूर करे कन्फ्यूजन

लव स्टोरी वाली बातें सुन कर वे समझते हैं कि प्यार में भी सीमाएं होती हैं. भावनाओं को कैसे हैंडल करें, ये सब किताबों में नहीं लिखा होता. असल में यह सब दुनियादारी का ज्ञान होता है जो किताबों में नहीं मिलता. किताबें आप को फार्मूले, थ्योरी और फैक्ट्स सिखाती हैं, लेकिन जिंदगी कैसे जीनी है, यह अनुभव और कहानियां सिखाती हैं.

पहले बच्चे दादादादी की कहानियां सुनते थे, पड़ोस के बड़ेबुजुर्ग से बातें करते थे, रिश्तेदारों के साथ समय बिताते थे. वहीं से उन्हें जिंदगी की समझ मिलती थी. आज वह माहौल बहुत कम रह गया है.

अब ज्यादातर समय मोबाइल स्क्रीन पर गुजरता है, वहां गहरी सीख कम ही मिलती है. ऐसे में अगर कोई टीचर क्लास में थोड़ी देर के लिए पढ़ाई से हट कर जीवन की बात कर देता है तो वह शायद उस स्टूडैंट के लिए बहुत काम की चीज होती है.

जो लोग कहते हैं कि औनलाइन क्लास में ये सब एक्स्ट्रा बातें टाइम वेस्ट हैं, वे शायद आज के बच्चों की असली समस्या नहीं सम?ा रहे. पढ़ाई तो कई जगह से हो सकती है : यूट्यूब, बुक्स, नोट्स. लेकिन दुनियादारी, जीवन के सबक, इमोशनल इंटैलिजैंस और सहीगलत की सम?ा, ये सिर्फ एक अनुभवी इंसान से ही आ सकता है.

अगर कोई टीचर अपनी क्लास में

10 मिनट दुनियादारी की बात कर लेता है और उस के बाद बच्चा 50 मिनट ज्यादा फोकस्ड रहता है, तो वे 10 मिनट वेस्ट नहीं, बल्कि सब से स्मार्ट इन्वैस्टमैंट हैं. आज की जनरेशन को नंबर्स और फार्मूले से ज्यादा जरूरत है सम?ादार इंसान बनने की. और वह समझदार इंसान बनाने का काम अब किताबें नहीं, बल्कि ये स्टोरी टैलिंग  वाले टीचर्स कर रहे हैं.

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...