Life After Death :

इसलाम में मरने के बाद के जीवन की जो भी व्याख्याएं मौजूद हैं वो हदीसों पर आधारित हैं. हजरत मुहम्मद ने अपने जीवनकाल में जो भी बातें कहीं उन्हें हदीसों के रूप में जमा करने का काम उन लोगों ने किया जो मुहम्मद साहब के मरने के दोतीन सदियों बाद पैदा हुए.

मृत्यु के बाद क्या होता है, यह बताने आज तक कोई नहीं आया लेकिन सभी धर्मों ने इस पर कहानियां जरूर गढ़ी हैं. पुरोहितों ने बड़ी चालाकी से ये कहानियां रची हैं ताकि लोगों में मरने का डर और मरने के बाद का भय पैदा हो और इस भय के नाम पर लोगों से धन ऐंठा जा सके.

इसलाम में मरने के बाद काफिर और मोमिन को अलगअलग परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है.

इब्न माजा हदीस नंबर 4262 के अनुसार- यदि मरने वाला व्यक्ति मोमिन था, तो फ़रिश्ते उस की आत्मा को लेने से पहले उस से सवालजवाब करते हैं. मोमिन इस में पास हो जाता है तब फरिश्ते उसे जन्नत के इत्र से सुगंधित करते हैं, फिर उसे अल्लाह के पास ले जाते हैं, अल्लाह कहता है: “मेरे बंदे का नाम जन्नत की किताब में लिखो और इसे वापस धरती पर ले जाओ.”

इस प्रकार आत्मा को वापस कब्र में ला कर उस के मृत शरीर में लौटा दिया जाता है और मोमिन की कब्र को जितना उस की आंखें देख सकती हैं उतना विस्तृत कर दिया जाता है लेकिन अगर यह किसी काफ़िर की आत्मा है तो फ़रिश्ते जहन्नुम दिखाने के लिए उस की आत्मा को शापित, अपमानित और भयभीत अवस्था में ऊपर ले जाते हैं और फिर उसे वापस धरती पर ला कर उसे उस के शरीर में वापस कर देते हैं, फिर व्यक्ति को उस की क़ब्र में यातना दी जाती है. उसे कब्र की दीवारों को भींच कर दबाया जाता है और उस के पास जहन्नुम की गरमी और धुआं छोड़ा जाता है.

क्या इसलाम की इस कहानी में कोई लौजिक है? पहले शरीर से आत्मा को अलग कर उसे सातवें आसमान पर ले जाया जाता है, फिर उसी आत्मा को उस के मृत शरीर में वापस फिट किया जाता है.

क्या इन बातों का कोई सिरपैर है? अगर कब्र में मुर्दे की आत्मा उस के जिस्म में घुसेड़ दी जाती है तो लाश सड़ने के बाद भी क्या वो रूह उस सड़ी हुई लाश में ही रहती है?

कई ऐसी वारदातें होती हैं जिन में कुछ शातिर चोर नई कब्रों को खोद कर ताजा दफन लाशों से और्गेन चोरी कर उन्हें बेचते हैं. लाश के अंगों को निकालने वाले लोगों को तो इसलाम कि इन बातों पर बिलकुल यकीन नहीं है तभी तो ये अंगचोर लोग रात के अंधेरे में कब्र को खोद कर ताजी दफन लाशों के और्गन चोरी करते हैं और कोई रूह या फरिश्ता उन्हें ऐसा करने से नहीं रोक पाता.

या तो कब्र में रूह वाली बात झूठी है या फिर वो रूह जो कयामत के इंतजार में जन्नत की खिड़की से जन्नत की खुशबू का मजा लेने को कब्र में बैठी है वो इतनी कमजोर और नालायक है कि अपने जिस्म की हिफाज़त भी नहीं कर सकती.

इसलाम के अनुसार फ्यूचर में किसी वक्त कयामत होगी और तब सभी मुर्दे जिंदा किए जाएंगे और उन सभी के हिसाबकिताब के बाद ही उन्हें जन्नत या दोजख में भेजा जाएगा.

अब सवाल यह उठता है कि क्या आदम से ले कर अब तक मरे लोगों की आत्माएं उन की कब्रों में ही हैं?

इजराइल और फिलिस्तीन के युद्ध में जिन लोगों कि लाशें दफन न हो सकीं उन की रूहों का क्या होगा? जो लोग अपने मुर्दों को दफन नहीं करते, कयामत तक उन की रूहें किस स्टोररूम में रखी जाएंगी?

प्लेन दुर्घटनाओं में जिन लोगों की लाशें तक नहीं मिल पाईं उन की रूहें कब तक भटकेंगी?

गरुड़ पुराण के मुताबिक, मरने के बाद आत्मा यमलोक जाती है. आत्मा को यमदूत 24 घंटे में कर्म दिखाते हैं और फिर 13 दिनों बाद यमलोक ले जाते हैं. आत्मा के मार्ग का चयन उस के कर्मों पर निर्भर करता है. मरने के बाद आत्मा 24 घंटे के अंदर एक बार फिर से धरती पर लौटती है और परिजनों द्वारा 13वीं करने के बाद उसे सूक्ष्म शरीर मिलता है. आत्मा को पैदल चल कर ही यमलोक की दूरी तय करनी पड़ती है. पाप करने वाले लोगों को मरने के बाद इस की सजा भुगतनी पड़ती है. बुरे कर्म करने वाले मनुष्यों को नरक में भेजा जाता है और अच्छे कर्म करने वाले को स्वर्ग. मरने के बाद आत्मा 13 दिन तक अपने घर में रहती है. इस दौरान परिवार के सदस्य को अलगअलग धार्मिक कर्म करते रहना चाहिए तभी आत्मा को शांति मिलती है.

मरने के बाद क्या होता है, इस सवाल पर धार्मिक नजरिया पूरी तरह आस्था पर कायम है जिस में लौजिक ढूंढ़ना बेवकूफी के सिवा कुछ नहीं.

मरने के बाद क्या होता है, इस सवाल पर बड़ीबड़ी बकवासें करने वाले पुरोहित, मुल्ला, पादरी आज तक रूह या आत्मा का कोई सुबूत नहीं दे पाए. इस से यह साबित होता है कि रूह या आत्मा का कोई वजूद ही नहीं.

विज्ञान के अनुसार, इंसान एक बायलौजिकल मशीन है जिस का सौफ्टवेयर जब तक काम करता है इंसान जिंदा रहता है और जब सिस्टम खराब हो जाता है तो इंसान मर जाता है. जो है यह शरीर ही है, इस से अलग कुछ नहीं. दिमाग के न्यूरौन्स की वजह से हम जिंदा इंसान कहलाते हैं. दिमाग के इन्हीं न्यूरौन्स कि वजह से हमारे विचार जिंदा होते हैं और जब न्यूरौन्स तक एनर्जी नहीं पहुंच पाती, हमारे विचार शून्य हो जाते हैं. इसी को मृत्यु की अवस्था कहा जाता है.

आप की धार्मिक आस्था आप को जीवनभर भ्रम में रखती है. आप जीवन को समझ ही नहीं पाते, इसलिए मृत्यु के बाद की परिकल्पनाएं आप को आकर्षित करती हैं और आप अपने कीमती जीवन को धर्म के चंगुल में उलझाए हुए लुटते चले जाते हैं. आप की इसी बेवकूफी पर धर्म का धंधा चलता है और आप की इसी नासमझी कि वजह से तमाम धार्मिक गिरोह आप की पीढ़ियों को तबाह करते हैं.

मरने के बाद क्या होगा, कोई यह बताने नहीं आया. मरने के बाद के जीवन को किसी ने नहीं देखा. इसलिए इस सवाल पर जीवन बरबाद करने की जरूरत नहीं है कि मरने के बाद आप का क्या होगा? यह सवाल ही गलत है. सही सवाल यह है कि मरने के बाद आप अपनी पीढ़ियों के लिए कैसी दुनिया छोड़ कर जाएंगे? आप को जीतेजी इस बेशकीमती सवाल का जवाब ढूंढ़ना चाहिए.

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