Editorial : फूट डालो और राज करो का फार्मूला अपना कर आखिरकार भारतीय जनता पार्टी ने महाराष्ट्र के शहरों की म्यूनिसिपैलिटियों पर से शिवसेना, जो बाल ठाकरे ने खड़ी की थी, को हटा ही दिया. यह तारीफ की बात है कि भारतीय जनता पार्टी पूरे 30 साल तक कोशिश करती रही कि वह किसी तरह बाल ठाकरे के बेटे उद्धव ठाकरे को अपनों से लड़ने के लिए तैयार कर सके और फिर सफल हो गई.

भाजपा ने असल में कृष्ण के संदेश, कर्म करते रहो, फल की चिंता न करो, का इस्तेमाल किया जबकि पौराणिक बुद्धि न रखने वाले मगर लड़नेमरने को तैयार बाल ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे व बेटे उद्धव ठाकरे हमेशा चुनाव जीत कर तुरंत सत्ता पाने के लिए उतावले रहे. उन की फल को पाने की इच्छा के चलते शिवसेना में पहले उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे में विवाद हुआ और फिर उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे में.

भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने बचपन से विश्वामित्र का इंद्र का सिंहासन पाने के लिए वर्षों की तपस्या करने की कहानियां मन में बैठा रखी हैं और उन्होंने कभी मंत्री पद छोड़े, कभी मुख्यमंत्री पद छोड़े, कभी विभीषणों और सुग्रीवों को पटाया तो कभी अन्य को विरोधी खेमे में फिट किया.

भाजपा ने दूसरे राज्यों में भी ऐसा ही किया है पर महाराष्ट्र ऐसा उदाहरण है जहां परिवार के लोगों, एक ही मां के बेटों को आपस में लड़ाने की संस्कृति का 21वीं सदी में जम कर इस्तेमाल किया गया.

मुंबई म्यूनिसिपल कौर्पोरेशन का बजट बहुत बड़ा है और जमीनों को ले कर उस के अधिकार अपार हैं. इस पर कब्जा शत्रुओं के नाश के लिए ब्रह्मास्त्र है. वैसे भी, जांच एजेंसियों के कारण भारतीय जनता पार्टी के पास पैसे की कमी नहीं है पर मुंबई म्यूनिसिपल कौर्पोरेशन पर कब्जे का मतलब है मकानों के बनाने की अनुमति देने पर हर पार्षद की भरपूर कमाई.

दिल्ली में पिछले एक साल से दिल्ली नगरनिगम, दिल्ली विधानसभा और दिल्ली पर आधे अधिकारों से ज्यादा अधिकार रखने वाली केंद्र सरकार तीनों की हुकूमत भारतीय जनता पार्टी के पास है लेकिन कुछ फर्क पड़ा हो, ऐसा नहीं लगता.

महाराष्ट्र के नगर निकायों पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा होने पर शहरियों को तो कतई फर्क नहीं पड़ेगा पर हर मंदिर में तेल की जगह घी के दीये जलने लगेंगे, हर मंदिर के दरवाजों पर डेढ़ करोड़ रुपए किलो वाला सोना मढ़ा जाने लगेगा.

उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे, एकनाथ शिंदे, शरद पवार, अजित पवार ने साबित कर दिया कि भाजपा की राज करने के लिए लंबी तपस्या करना बेकार नहीं गया और अंतत: ठाकरे व पवार परिवार सड़कों पर आ गए हैं. राजा राम ने 14 साल का बनवास किया, पांडवों ने 13 साल के बनवास के बाद युद्ध किया तब जा कर सत्ता मिली. अगर हिंदू संस्कृति को वास्तव में कोई पूरी तरह अपना रहा है तो वह बेशक भारतीय जनता पार्टी है. स्वामी, शंकराचार्य, गुरु, महामंडलेश्वर आदि तो बेकार में हिंदूहिंदूहिंदू का नारा लगाते रहते हैं.

भारतीय जनता पार्टी को अब स्टालिन और ममता बनर्जी के घर में घुस कर उन के घरों या पार्टियों में विभाजन करना है, तभी चक्रवर्ती शासन स्थापित हो पाएगा. जनता को क्या मिलेगा, पता नहीं. Editorial

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...