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संवेदनशील और मार्मिक कहानी
दिसंबर (द्वितीय) 2025 अंक में प्रकाशित कहानी ‘बदबू’ सच्चाई को बेबाकी से उकेरती हुई अपनी भाषा में बेहद संवेदनशील, मार्मिक और बोधगम्य तरीके से वैचारिक तथ्यों को उजागर करती है. इस से यह बेहद पठनीय बन पड़ी है. बहुत अरसे बाद ऐसी जीवंत कहानी पढ़ने में आई. दीपान्विता राय बनर्जी
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समाज का आईना दिखाती कहानी
दिसंबर (द्वितीय) 2025 अंक में छपी कहानी ‘बदबू’ बहुत ही मार्मिक है. आज भी कितनी ऐसी ‘निद्रा’ (कहानी की पात्र) हैं जो इसी बदबू के साथ जीने को मजबूर हैं. वे इंसाफ के लिए लड़ रही हैं पर इंसाफ उन से कोसों दूर है और रेपिस्ट पैरोल पर बाहर निकल कर जिंदगी के मजे ले रहे हैं.
आखिर कब रुकेगी यह दहशत? कब औरतें, लड़कियां बेफिक्री से बाहर निकल पाएंगी? कब उन्हें लगेगा कि राह चलते कोई आवारा उन का पीछा नहीं कर रहा है? देश तरक्की कर रहा है मगर लड़कियां, औरतें आज भी डर के साए में जी रही हैं. नहीं पता उन्हें कि कब, कहां, कौन उन के साथ क्या कर दे. सगे भाई, बाप पर भी भरोसा नहीं रहा अब तो. मिनी सिंह
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बच्चों के मुख से
मेरी बड़ी बहन गरमी की छुट्टियों में अरुणाचल प्रदेश की तरफ घूमने गई. उन की छोटी बेटी चैरी बहुत बोलती है. वहां के लोगों की आंखें थोड़ी छोटी होती हैं. वह सब को देखती रही, फिर बोली, ‘‘मम्मी, यहां के सारे लोग दिनरात सोते ही क्यों रहते हैं?’’ उस की सुलभ बात सुन कर हंसी आ गई. लिटल महेंद्रा
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मेरी 3 वर्षीय बेटी मेरे पास आ कर बोली, ‘‘पापाजी, मेले को हात में मचल ने काता है. आप भी मचल के हात में कातना.’’
मैं कुछ समझ पाता, इस के पूर्व ही मेरी पत्नी जोर से हंसने लगी. वास्तव में बच्ची मच्छर के काटने पर शिकायत कर रही थी. चेतनपुरी गोस्वामी
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मेरा 7 वर्षीय इकलौता बेटा सोमेश बहुत ही बातूनी व तेज दिमाग है. हमारा संयुक्त परिवार है. परिवार में ज्यादा बच्चे होने के कारण जो भी फल व मिठाइयां आती हैं, मेरी सासूमां सभी बहुओं के बीच में बांट देती हैं ताकि बच्चे आपस में लड़ाई न करें.
एक दिन शाम के समय सभी बच्चे मेरे कमरे में खेल रहे थे. सोने का समय हुआ तो सभी बच्चे चले गए. बस, मेरा बेटा ही रह गया.
वह कहता है, ‘‘मम्मी, अपन दादी से बोलेंगे कि बच्चों की पाती फिर से करें. दादी ने किसी ताईजी को 3-3 तो किसी ताईजी को 2-2 बच्चे दे दिए. बस, आप को ही एक बच्चा दिया. मैं दादी को अभी जा कर बोलता हूं कि मेरी मम्मी को भी 2 बच्चे दो, जिस से मेरी मम्मी के कमरे में भी हम 2 बच्चे हो जाएंगे.’’
यह सुनते ही मेरा हंसी के मारे बुरा हाल हो गया. रीमा
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