Family Story in Hindi : सोमनाथ और उस की पत्नी कमला की मृत्यु के बाद उन के दोस्त शशिकांत को एक सच का खुलासा करना था. एक ऐसा सच जिसे जान कर सोमनाथ के बेटेबहू पछतावे के अलावा कुछ नहीं कर सकते थे…

मे रे बचपन का पक्का दोस्त सोमनाथ करीब 5 साल पहले मेरे खाली पड़े मकान में किराए पर रहने आया था. उसे गुजरे हुए 1 साल से ज्यादा हो गया. कल उस की पत्नी कमला की तेरहवीं की रस्म पूरी हो गई. मैं उन दोनों की अनुपस्थिति में उन के घर जाते हुए अजीब सा महसूस कर रहा हूं.

‘‘मैं एक जरूरी काम से शाम को घर आऊंगा. सब लोग मुझे घर पर मिलना,’’ सोमनाथ के बड़े बेटे राकेश को ऐसी सूचना मैं ने सुबह फोन पर दे दी.

जब मैं उन के घर पहुंचा तो राकेश की 4 वर्षीय बेटी शिखा मुझे देखते ही मुझ से लिपट गई. मैं ने उसे चाकलेट दी. मेरे गाल पर पप्पी दे कर वह बाहर खेलने भाग गई.

राकेश की पत्नी अलका मेरे लिए पानी का गिलास ले आई. राकेश का छोटा भाई रोहित अपनी पत्नी दिव्या के साथ कमरे में मौजूद था. सभी मेरे बोलने की प्रतीक्षा बेचैनी से करने लगे.

पानी पी कर मैं ने गला खंखारा और गंभीर लहजे में उन सब से पूछा, ‘‘जो बातें मैं करने आया हूं उन के बारे में कुछ अंदाजा लगा सकते हो तुम लोग?’’

मैं कुछ देर चुप रहा मगर कोई कुछ नहीं बोला. फिर एक गहरी सांस छोड़ कर मैं ने ही आगे कहा, ‘‘अतीत में कुछ बातें ऐसी घटी हैं कि जिन्हें तुम्हारे दिवंगत पिता और मेरे अलावा कोई नहीं जानता. कमला भाभी भी उन से अनजान थीं. मैं कुछ घटनाओं की याद तुम्हें दिलाता चलूं तो मेरी बात तुम सब बेहतर ढंग से समझ पाओगे.’’

वे सभी बड़ी उत्सुकता से मेरे आगे बोलने का इंजतार करने लगे. मेरे अपने दिमाग में पुरानी यादें हलचल मचाने लगी थीं.

मैं ने अलका को गंभीर लहजे में संबोधित किया, ‘‘मैं अपनी बात 5 साल पहले के उस दिन से शुरू करता हूं जिस दिन तुम ने आत्महत्या करने की कोशिश की थी. सोमनाथ ने अपनी सहायता के लिए उस दिन मुझे बुलाया था.

‘‘अपने दोस्त का घबरा कर पीला पड़ा चेहरा मुझे आज भी याद है. वह आते ही मुझ से बोला था : ‘मेरी बहू नींद की गोलियां खा कर बेहोश पड़ी है. मेरे साथ अस्पताल चलो, शशिकांत,’ सोमनाथ के चेहरे पर उस दिन हवाइयां उड़ रही थीं.

‘‘मेरी जानपहचान का दायरा बहुत बड़ा है. अपने परिचित डा. सुशील के नर्सिंग होम में अलका को अपनी कार में मैं ही ले कर गया था.

‘‘मेरे रसूख के कारण ही सोमनाथ और कमला भाभी पुलिस के झंझट से बचे थे उस दिन.’’

‘‘मांजी के साथ जो रातदिन मेरा झगड़ा रहता था उस से परेशान हो कर मैं ने वह मूर्खता की थी,’’ अलका ने बेचैनी भरे अंदाज में सफाई दी.

‘‘तुम सासबहू के झगड़े से पूरा घर परेशान था. तुम ने आत्महत्या की कोशिश की तो सोमनाथ बुरी तरह डर भी गया. वह तुम्हें अलग करने को तैयार था पर उस के लिए राकेश राजी नहीं होता था,’’ मेरे मन की उदासी धीरेधीरे बढ़ने लगी.

‘‘मैं बड़ा बेटा हो कर बूढ़े व बीमार मातापिता को कैसे छोड़ कर अलग हो जाता?’’ आवेश के कारण राकेश का चेहरा लाल हो उठा.

मैं ने आगे बोलना शुरू किया,

‘‘डा. सुशील के नर्सिंग होम में एक दिन रुक कर अलका मायके चली गई थी. उस के मातापिता और बड़ेबड़े भाइयों ने सोमनाथ और कमला भाभी से खूब झगड़ा किया था. ‘अगर हमारी बेटी को कुछ हो गया तो सब को जेल में चक्कियां पिसवा दूंगा,’ ऐसी धमकी अलका के पिता ने सरेआम दी थी सोमनाथ को.

‘‘रोहित के साथ राकेश के सालों ने मारपीट भी की थी. अपने जीजा को भी कड़वी व चुभने वाली बातें कहने से वे नहीं चूके थे. ऊपर से अलका ने राकेश की सौगंध खा कर रोते हुए कहा था, ‘मैं अपनी जान दे दूंगी पर तुम्हारी मां के साथ उस घर में नहीं रहूंगी.’

‘‘नर्सिंग होम के सामने एक बाग था. वहां की एक बैंच पर सोमनाथ और मैं जा बैठे थे. उस दिन अपने दोस्त को किसी बच्चे की तरह बिलखबिलख कर रोते देख मेरी भी आंखें भर आई थीं.

‘‘रोरो कर सोमनाथ का मन कुछ हलका हुआ तो हम दोनों समस्या का समाधान ढूंढ़ने को देर तक माथापच्ची करते रहे थे, ‘कमला और अलका दोनों का अपनीअपनी जबानों पर नियंत्रण नहीं है. दोनों कड़वी और चुभती बातें करने में बहुत माहिर हैं,’ सोमनाथ ने समस्या का एक पहलू बयान किया था.

‘‘ ‘उन के बीच टकराव का मुख्य कारण क्या है?’ मैं ने चिंतित लहजे में पूछा था.

‘‘ ‘कमला खुद को घर की मालकिन समझती है. वह अलका पर हुक्म चलाना अपना अधिकार मानती है. दूसरी तरफ अलका ने उस से दबने से साफ इनकार कर दिया है. किसी तरह की रोकटोक से उसे गुस्सा आ जाता है.’

‘‘ ‘और अब तो अलका ने भविष्य में कमला भाभी के साथ न रहने की सौगंध भी खा ली है,’ मैं बोला.

‘‘ ‘और राकेश हम दोनों से दूर रहने को तैयार नहीं है. मेरी समझ में नहीं आता कि इस समस्या का समाधान कैसे होगा?’ पूछते हुए सोमनाथ की आंखें फिर से भर आई थीं.

‘‘मैं ने गहरे सोचविचार के बाद अपने दोस्त को समस्या हल करने का रास्ता सुझा दिया था, ‘चूंकि अलका अलग रहना चाहती है, इसलिए तुम राकेश को अलग होने को मजबूर कर दो. दूसरी तरफ अलका और भाभी के घर की मालकिन होने के घमंड को तोड़ने के लिए तुम मकान को ही बेच डालो.’

‘‘मेरा यह सुझाव सुन कर सोमनाथ बुरी तरह चौंका था, ‘ऐसा करने से क्या समस्या हल हो जाएगी?’

‘‘ ‘बिलकुल.’

‘‘ ‘कैसे?’

‘‘ ‘मैं तुम्हें समझाता हूं…’ अपनी बात सोमनाथ को कहनेसमझाने में मुझे पूरे 2 घंटे लगे थे.

‘‘मेरा दोस्त मेरे कहे पर पूरी ईमानदारी से चला. अलका द्वारा आत्महत्या के प्रयास को बहाना बना कर उन्होंने राकेश पर घर छोड़ देने का जबरदस्त दबाव बनाया था. मकान बेचने का फैसला भी उन्होंने सब को सुना दिया था.

‘‘तंग आ कर राकेश अपना सामान ससुराल में ले गया. बापबेटे के बीच बातचीत बंद हो गई थी. रोहित होस्टल में चला गया. सोमनाथ कमला भाभी को ले कर गांव चला गया. कुछ दिन बाद उन्होंने अपना घर खाली कर दिया.

‘‘महीने भर के अंदर उस मकान में नए लोग आ गए. तुम्हें याद होगा, मकान के बिकने की खबर तुम दोनों तक मैं ने ही पहुंचाई थी.

‘‘मकान बिकने के बाद तुम अपने ससुराल में रहने को मजबूर हो गए थे, राकेश. कितने दिन रुके थे तुम वहां?’’  मैं ने सामने बैठे राकेश से पूछा.

‘‘करीब 2 महीने,’’ राकेश ने बेचैन लहजे में जवाब दिया.

‘‘वहां तुम बहुत मजबूरी में रहे. किराए पर मकान ले कर अच्छी तरह रहना तुम्हारी सीमित आय में संभव नहीं था. इस चक्कर में तुम्हारे संबंध अपनी ससुराल वालों से भी बिगड़ गए थे न?’’

‘‘मेरे पिताजी के घर में इतनी जगह नहीं थी जो बेटीदामाद को जिंदगी भर आराम से रख लेते,’’ अपने मायके का पक्ष ले कर अलका तुनकी.

उस की बात को अनसुना कर मैं ने आगे कहा, ‘‘अपने इस मकान में किराएदार के रूप में आ कर रहने का प्रस्ताव मैं ही तुम्हारे पास ले कर गया था, क्या यह याद है तुम्हें?’’

‘‘बिलकुल याद है. आप के कारण ही हम सब लोग फिर से एकसाथ रहने की स्थिति में आए थे,’’ राकेश ने कृतज्ञता दर्शाई.

‘‘तो फिर मेरी शर्त भी तुम्हें याद होगी?’’

‘‘आप चाहते थे कि मां और पिताजी को भी हम साथ रखें. अपने दोस्त के हित को ध्यान में रख कर आप ने किराए में पूरे 2 हजार रुपए कम कर के मुझे आर्थिक संकट में फंसने से भी बचा लिया था,’’ राकेश भावुक हो उठा.

‘‘कमला भाभी भी तब तक गांव की जिंदगी से बुरी तरह ऊब कर लौटने की इच्छुक थीं. मेरा मकान किराए पर ले कर तुम ने सब के एकसाथ रहने का रास्ता खोल दिया था.’’

‘‘हर महीने 3 हजार रुपए निकालना मेरे लिए कठिन था और आज भी है. अब मां और पिताजी दोनों नहीं रहे हैं. आप किराया बढ़ाने की बात करने आए हैं क्या?’’ राकेश चिंतित हो उठा.

मैं ने मुसकरा कर जवाब दिया, ‘‘किराए के बारे में बातें हम बाद में कर लेंगे. पहले मेरे एक सवाल का जवाब दो.’’

‘‘पूछिए.’’

‘‘तुम नहीं, अलका जवाब देगी,’’ मैं अलका की ओर मुखातिब हुआ और पूछा, ‘‘इस घर में आ कर तुम ने कभी आत्महत्या करने की कोशिश क्यों नहीं की? यहां तो तुम अपने सासससुर के साथ रहती थीं?’’

कुछ देर सोचने के बाद अलका बोली, ‘‘अंकल, यहां आ कर मांजी ने मेरे पीछे पड़ना कम कर दिया था.’’

‘‘उन में आए बदलाव का कारण बता सकती हो तुम?’’

‘‘शायद यही कि पहले मैं उन के घर में रहती थी और यहां वह अपने बेटे के घर में रह रही थीं.’’

‘‘मेरे दोस्त को तुम सासबहू दोनों को शांति के साथ एकसाथ रहते देख कर बड़ी खुशी हुई थी. मरते वक्त वह इस चिंता से मुक्त था कि कहीं परिवार टूट कर बिखर न जाए,’’ अचानक ही मेरा गला भर आया तो कमरे का माहौल गमगीन हो उठा.

मैं ने थोड़ा रुक कर आगे कहना शुरू किया, ‘‘कमला भाभी और तुम दोनों ही बदली थीं. सास बहूबेटे को घर से निकल जाने की धमकी नहीं दे पाती थी. जबकि तुम्हारे लिए सासससुर के साथ रहना जरूरी था अलका, नहीं तो किराए में मेरी तरफ से मिलने वाली 2 हजार रुपए की रियायत जाती रहती.

‘‘सोमनाथ और मैं ने मिल कर जो योजना बनाई थी उस में हमें आशातीत सफलता मिली थी.’’

वहां बैठे सभी जन मेरी तरफ जिज्ञासा भरी नजरों से देखने लगे.

‘‘अब मैं तुम्हें एक रहस्य की बात बताने जा रहा हूं,’’ मैं ने अपनी आवाज धीमी की, ‘‘तुम लोगों को सोमनाथ ने बताया था कि उस ने मकान बेच दिया था. उस के बेचने से मिले 15 लाख रुपए सट्टे के चक्कर में डूब गए. यह जानकारी भी बाद में उसी ने तुम सब को दी थी. यह दोनों बातें सच नहीं थीं.’’

‘‘तब सच क्या है?’’ रोहित ने आगे झुक कर चौंकते हुए तनाव भरे लहजे में पूछा.

‘‘सच तो यह है कि सोमनाथ ने कभी अपना मकान बेचा ही नहीं था.’’

‘‘लेकिन अंकल, तब से उस मकान में जो लोग रह रहे हैं वे क्या किराएदार हैं?’’ रोहित बोला. उस के साथसाथ सभी हैरान नजर आ रहे थे.

‘‘किराएदार हैं वे जरूर पर मेरे किराएदार हैं. उन से किराया मैं वसूल करता हूं हर महीने.’’

‘‘पर आप किराया कैसे वसूल कर सकते हैं उस मकान का जिसे पिताजी ने आप को कभी बेचा ही नहीं था.’’

‘‘मेरे मकान में तुम सब रह रहे हो, इसीलिए मैं उस मकान का किराया लेता आ रहा हूं.’’

‘‘फिर इस मकान का किराया हर महीने हम से भी क्यों लेते हैं आप?’’ राकेश बोला. उन सब की आंखों में राकेश द्वारा पूछे गए इस सवाल की झलक मैं साफ देख रहा था.

अपने बैग में से बैंक की एक पासबुक निकाल कर मैं ने राकेश को पकड़ाई और भावुक स्वर में बोला, ‘‘पिछले 5 सालों से जो भी किराया मैं ने तुम से लिया है, वह सब शिखा के नाम से बैंक में जमा हो रहा है. ऐसा करने का निर्णय तुम्हारे पिता का था मेरे बच्चो.’’

एकएक कर के उस पासबुक को सब ने पढ़ा. अचानक ही अलका फफकफफक कर रो पड़ी तो हम सब बुरी तरह चौंके.

दिव्या अपनी जेठानी को चुप कराने लगी. मैं ने देखा, राकेश और रोहित की पलकें भी नम हो उठी थीं. मेरी अपनी आंखों से आंसू की बूंदें ढुलक कर गालों पर आ गई थीं.

‘‘मैं बहुत बुरी हूं…बहुत स्वार्थी हूं…बाबूजी को कितना प्यार था हम सब से…हमारे हित में कितना कुछ कर गए वह…और मैं बददिमाग उन की ठीक से सेवा भी नहीं कर सकी…’’ रुंधे गले से गुजरे वक्त को याद करती अलका खुद को लगातार कोसे जा रही थी.

सोमनाथ व कमला भाभी के मरने पर वह औपचारिक ढंग से रोई थी लेकिन इस वक्त उस की आंखों से दुख व पश्चात्ताप के असली आंसू बह रहे थे.

कुछ देर रो लेने के बाद वह सिर झुका कर बेहद उदास सी खामोश बैठ गई.

‘‘अलका, मेरी बातें ध्यान से सुनो,’’ मैं ने उस का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया, ‘‘तुम ने कभी राकेश की कसम खाई थी कि तुम कमला भाभी के साथ अपने ससुर के घर में नहीं रहोगी. अब वह नहीं रही हैं. तुम अगले महीने उस घर में लौट सकती हो क्योंकि किराएदार इस महीने के अंत में वहां से चले जाएंगे.

‘‘कमला भाभी की जगह अब तुम अपने परिवार की बड़ी बन गई हो और राकेश ने सोमनाथ की जगह ले ली है. अब घर को जोड़ कर रखना तुम दोनों की जिम्मेदारी होगी. कोई काम ऐसा न करना जिस से तुम्हारे सासससुर की…’’ कहतेकहते मेरा गला रुंध गया.

राकेश उठ कर मेरी छाती से आ लगा और भावुक लहजे में बोला, ‘‘शशिकांत अंकल, आप के कारण हम सब को मां और पिताजी की कमी कम खलेगी. आप अपना आशीर्वाद भरा हाथ सदा हमारे सिर पर रखना.’’

रोहित को इशारे से अपने पास बुला कर मैं ने उसे भी छाती से लगाया. अलका और दिव्या ने आगे आ कर मेरे पांव छुए और आशीर्वाद पाया. तभी शिखा बाहर से भागती हुई आई और मेरी गोद में चढ़ गई.

मेरे दोस्त सोमनाथ और कमला भाभी की तसवीर सामने दीवार पर टंगी थी. मुझे लगा, अपने परिवार को यों इकट्ठा व प्यार और अपनेपन से भरा देख कर वह दोनों बड़े संतुष्ट भाव से मुसकराने लगे थे. Family Story in Hindi

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