One Two Cha Cha Cha Movie Review : हम फिल्में क्यों देखते हैं? मनोरंजन के लिए. मगर आजकल ज्यादातर फिल्में ऐसी बन रही हैं जो मनोरंजन तो क्या करेंगी, उलटे भेजा फ्राई कर देती हैं. कौमेडी फिल्में भी ऐसी बन रही हैं जिन में फूहड़ता, अश्लीलता और द्विअर्थी संवाद भरे होते हैं. बौलीवुड वालों ने इसी सब को कौमेडी का पर्याय मान लिया है. साफसुथरी कौमेडी फिल्में यदाकदा ही आती हैं जो दर्शकों को गुदगुदाती हैं, एंटरटेन करती हैं और उन के भेजे को फ्रैश करती हैं. ‘वन टू चा चा चा’ एक साफसुथरी कौमेडी फिल्म है जो दर्शकों को पूरी तरह से एंटरटेन करती है.
फिल्म की कहानी मोतिहारी शहर से शुरू होती है जहां जायसवाल परिवार में उत्सव का माहौल है. परिवार के बड़े बेटे संजू (ललित प्रभाकर) की शादी/सगाई की तैयारियां चल रही हैं. तभी परिवार के सब से बड़े कुंआरे और सनकी चाचा (आशुतोष राणा) ऐलान कर देते हैं कि उन्हें भी अब शादी करनी है. चाचा की जिद देख डाक्टर इसे बाइपोलर कहते हैं और सलाह देते हैं कि उन्हें रांची के मानसिक अस्पताल ले जाना चाहिए.
यहीं से शुरू होती है मुख्य कहानी. चाचा के 2 भतीजे और उन का एक दोस्त चाचा को बांध कर और बेहोश कर एक वैन में डाल कर रांची के लिए निकलते हैं. इस रोड ट्रिप में कई मुसीबतें और हंसी के फौआरे छूटते हैं.
इस सफर में ऐसेऐसे किरदार जुड़ते जाते हैं कि कहानी का ग्राफ पूरी तरह बदल जाता है. एक सस्पैंड किया नारको अफसर, एक डांसर जिस का नाम शोभा है, जेल से भागा शातिर अपराधी भूरा सिंह और एक जोशीला पुलिस वाला- कहानी में ऐसे ट्विस्ट आते हैं जहां गोलियां चलती है, बैंक डकैती की प्लानिंग होती है और उन सब के हाथ ड्रग्स का जखीरा भी लग जाता है. दर्शक खुद को इन किरदारों के साथ इस पागलपन में शामिल महसूस करने लगता है.
आशुतोष राणा की यह कौमेडी बनावटी नहीं, स्वाभाविक लगती है. उस ने ‘वन टू चा चा चा’ शीर्षक 1978 की बौलीवुड फिल्म ‘शालीमार’ से लिया है. इस फिल्म का शीर्षक इसी गीत पर आधारित है. उस फिल्म में धर्मेंद्र, जीनत अमान और अरुणा ईरानी कलाकार थे. इस गाने को उषा उत्थप और अनुप ने गाया था और राहुलदेव बर्मन ने संगीत दिया था. One Two Cha Cha Cha Movie Review





