Women Empowerment: एक मर्द सिर्फ मर्द होने के कारण ही जिंदगी की रेस में बढ़त पा लेता है, ठेला लगाने से लेकर, एयर होस्टेस, मैनेजर, दरोगा, कोंस्टेबल, सेल्सगर्ल या कॉल सेंटर की जॉब करने वाली लड़कियाँ हर क्षेत्र में अपनी उपयोगिता साबित कर पा रही हैं तो उनका यह संघर्ष मर्दों के मुकाबले कही ज्यादा बड़ा है.
बिहार पुलिस में जॉइन करने वाली सीमा कुमारी की कहानी आंसू, मेहनत और कुछ कर दिखाने की जिद की है. सीमा कुमारी के घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. कोचिंग की फीस भरना भी मुश्किल था. समाज कहता था कि "लड़की है, पुलिस में क्या करेगी?", "शादी कर दो" यह बातें सीमा को रोज सुननी पड़ती थीं. स्मार्टफोन, इंटरनेट जैसी सुविधाए सीमा के पास नहीं थे.
तैयारी का दौर शुरु हुआ. घर का सारा काम करने के बाद वह अपनी पढ़ाई में लगाए गये समय को जस्टिफाई कर लिया करती थी. सीमा ने अपनी जिद को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की. महंगे कोचिंग नहीं ले पाईं तो यूट्यूब, पुरानी किताबें और लाइब्रेरी से पढ़ाई की.
पुलिस की दौड़, हाई जंप, गोला फेंक के लिए रोज सुबह 4 बजे उठकर गांव के मैदान में, बिना ट्रेनर के प्रैक्टिस करती. दिन में घर का काम करती और समय निकाल कर खेती में भी हाथ बंटाती. दिन भर की शारीरिक मेहनत के बाद वह रात में 6-7 घंटे पढ़ाई करती. सीमा के लिए इससे भी बड़ा संघर्ष था मानसिक दबाव. एक तरफ घर की जिम्मेदारी, दूसरी तरफ एग्जाम का प्रेशर.
पहले अटेम्प्ट में वो लिखित या फिजिकल में रह गई थीं लेकिन हार नहीं मानी. अपनी गलती निकाली, कमजोर विषय पर ज्यादा मेहनत की और दोबारा फॉर्म भरा. मेहनत रंग लाई. जब रिजल्ट आया और सीमा कुमारी का बिहार पुलिस लिस्ट में नाम आया तो उसके सपने पूरे हो गये. आज वही लोग जो कहते थे लड़की से नहीं होगा, अब सीना चौड़ा करके कहते हैं ये हमारे गांव की बेटी है.
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