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‘‘मुझे ही नहीं प्रेम और आशा के साथ होस्टल में रहने वाली सभी लड़कियों को मालूम था. दोनों का कहना था कि हम दोनों का नाम लता है और लता का काम ही लिपटना होता है. सो हम दोनों एकदूसरे से लिपट कर अपने नाम को सार्थक करती हैं. उन के घर वालों को मालूम था या नहीं मैं नहीं जानती,’’ रूपम बगैर कुछ पूछे कहती गई, ‘‘लेकिन इन दोनों ने यह समझ लिया था कि एकदूसरे के साथ रहने के लिए पढ़ाई से बढ़ कर और कोई बहाना नहीं हो सकता. सो दोनों एकदूसरे से लिपट कर पढ़ती रहती थीं और अव्वल आया करती थीं. सो घर वाले भी आगे पढ़ने में सहयोग दे रहे थे. एमए तक तो दोनों होस्टल में रहती थीं. फिर मेरी शादी हो गई. एक अन्य सहेली से सुना था कि दोनों लताएं विभिन्न व्यवसायिक कोर्स कर रही हैं और होस्टल के बजाय फ्लैट में ऐज ए कपल रह रही हैं.’’

‘‘फिर आशा मैडम ने शादी कैसे कर ली?’’

‘‘यह तो प्रेम ही बता सकती है.’’

स्नेहा ने मायूसी से सिर हिलाया, ‘‘जिस दृढ़ता से सुबह उस ने पुलिस अधिकारियों से कहा था कि इकबाले जुर्म के अलावा वह और कुछ नहीं कहेगी मुझे नहीं लगता कि वह कुछ बताएगी.’’

‘‘आशा के अपने पति के साथ कैसे संबंध थे?’’

‘‘दिलीप सर जिस तरह से व्यक्ति हैं, उस से तो लगता है दोनों में बहुत प्यार था. वैसे तो मैडम व्यक्तिगत बात नहीं करती थीं, लेकिन जब भी दिलीप सर आने वाले होते थे तो उन के चेहरे और व्यवहार में भी उमंग, उत्साह और आकुलता होती थी और उन के जाने के बाद मायूसी किसी भी सामान्य दंपती की तरह.’’

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