Short Story: रात के साढ़े ग्यारह बजे थे।
सिमी अस्पताल के आईसीयू के बाहर बैठी थी।
माँ भीतर ऑक्सीजन पर थीं।
“अगले चौबीस घंटे बहुत महत्वपूर्ण हैं।”डॉक्टर ने उसे सांत्वना देते हुए कहा था।
राधिका की उंगलियाँ बार-बार मोबाइल पर जा रही थीं। उसने अभी-अभी आईसीयू के बाहर उदास चेहरे वाली अपनी सेल्फी पोस्ट की।
कैप्शन था-
“माँ… तुम जल्दी ठीक हो जाओ। तुम्हारे बिना मैं कुछ नहीं…”
कुछ ही मिनटों में लाइक्स और कमेंट्स आने लगे-
“स्टे स्ट्रॉंगर डियर…”
“प्रेयर्स…”
“सो इमोशनल…”
सिमी हर नए नोटिफिकेशन पर स्क्रीन रीफ्रेश कर रही थी।
“मरीज आपको बुला रही हैं।” नर्स ने उससे कुछ झुंझला कर कहा। यह तीसरी बार था कि नर्स उसे आकर यह बता रही थी।
“हाँ… आती हूँ…”
कहकर उसने जल्दी से एक स्टोरी और डाल दी-
“हॉस्पिटल नाइट्स आर पेनफुल…”
करीब आधे घंटे बाद डॉक्टर बाहर आए।
“सॉरी… हम उन्हें बचा नहीं पाए।”
सिमी फूट-फूटकर रोने लगी।
कुछ देर बाद उसने माँ की पुरानी तस्वीर पोस्ट की-
“आर.आई.पी. मॉम…
अब मैं किसके लिए जिऊँगी?”
इस बार लाइक्स पहले से भी ज़्यादा तेज़ी से बढ़ रहे थे।
उसी समय एक नर्स ने पास आकर पूछा-
“आपकी मम्मी आपको बुला रही थीं… तब आप कहाँ थीं?”
राधिका की नज़र मोबाइल स्क्रीन पर टिक गई-
उसकी पोस्ट पर अभी-अभी पाँच हज़ारवाँ लाइक आया था। Short Story
डॉक्टर यशोधरा भटनागर
152, अलकापुरी
देवास (मध्यप्रदेश)
455001
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