बेटी तो नाजों से पाली जाती है, लेकिन हमारी बेटी के नाजनखरे कुछ अधिक ही थे. इन नाजनखरों से उस ने हमारी नाक में दम कर रखा था, इसलिए जब वह छात्रावास चली गई तो मैं ने चैन की सांस ली. लेकिन जबजब वह छुट्टियों में घर आ जाती तो रहीसही कसर पूरी कर लेती.

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