‘‘पापा, यह क्या किया आप ने? इतना बड़ा धोखा वह भी अपने बच्चों के साथ, क्यों किया आप ने ऐसा? आखिर क्या कमी थी हमारे प्यार में, हमारी देखभाल में, जो आप ने ऐसा कदम उठा लिया? एक ही पल में सारे रिश्तों को भुला दिया. चकनाचूर कर दिया उन सारी यादों को, उन सारी बातों को, जिन्हें याद कर के हम खुशी से पागल हुआ करते थे. गर्व किया करते थे अपने पापा पर कि हमारे पापा दुनिया के बैस्ट पापा हैं जिन्होंने कभी भी हमारी किसी भी बात को नहीं टाला, जो मुंह से निकला, फौरन ला कर दिया.

‘‘मुझे याद है, आज भी बचपन के वे दिन, जब हम स्कूल जाया करते थे और हम लेट न हो जाएं, आप अपने हाथों से एकएक निवाला खिलाया करते थे. कभी कहानी सुनासुना कर, कभी बहलाफुसला कर. और हम बहकावे में आ कर खा लिया करते थे. पता तब चलता था जब सारा खाना खत्म हो जाता था और आप जीत की खुशी से मुसकराते थे. कितना प्यार लुटाते थे हम बच्चों पर आप.

‘‘आप का सारा प्यार हमारा था, पापा. मां भी कितना खुश होती थीं हमें खुश देख कर. याद है आप को जब एक बार मुझे तेज बुखार आया था तो आप ने ही मेरे माथे पर पट्टियां रखी थीं और मैं ने आप का हाथ सारी रात नहीं छोड़ा था.

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‘‘लेकिन आप ने एक ही पल में सबकुछ खत्म कर दिया. मां के साथ भी विश्वासघात किया है आप ने. धोखा किया है. एक बार भी नहीं सोचा कि मां को गुजरे हुए अभी एक साल भी नहीं हुआ. जबतब उन की यादें आंखों के सामने उभरती रहती हैं. उन की खुशबू, उन की चूड़ी की खनक आज भी कमरे से आती होगी. उन के हाथों का स्पर्श आज भी आप के कपड़ों पर होगा. घर के हर सामान में होगा. कितना प्यार करती थी वह हम सब को.

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