दबंग स्वभाव की वजह से मानसी ने अपने बेटे अक्षत पर बचपन से ही कड़ा नियंत्रण रखा. जबकि सुजाता ने अपने बेटे राहुल को अनुशासन में रखा लेकिन किसी बंधन में नहीं बांधा.

मानसी दीदी की चिट्ठी मिलते ही मैं एक ही सांस में पूरी चिट्ठी पढ़ गई. चिट्ठी पढ़ कर दो बूंद आंसू मेरे गालों पर लुढ़क गए. मानसी दीदी के हिस्से में भी कभी सुख नहीं रहा. कुछ दुख उन्हें उन के हिस्से के मिले, कुछ कर्मों से और कुछ स्वभाव से. इन तीनों में से कुछ भी यदि उन का ठीक होता तो शायद उन्हें इतने दुख नहीं भुगतने पड़ते. दीदी के बारे में सोचती मैं अतीत में खो सी गई.

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