लेखक-आरएस खरे

ओमा का यह नित्य का नियम बन गया था, जब दोपहर के 2 बजते ही वे घर के बाहर पड़ी आराम कुरसी पर आ कर बैठ जातीं. वजह, यह लीसा के आने के इंतजार का समय होता.

5 साल की लीसा किंडरगार्टन से छुट्टी होते ही पीठ पर स्कूल बैग लादे तेज कदमों से घर की ओर चल पड़ती. कुछ दूरी तक तो उस की सहेलियां साथसाथ चलतीं, फिर वे अपनेअपने घरों की ओर मुड़ जातीं.

लीसा का घर सब से आखिरी में आता. डेढ़ किलोमीटर चल कर आने में लीसा को एक या दो बार अपनी पानी की बोतल से 2-3 घूंट पानी पीना पड़ता. उस के पैरों की गति तब बढ़ जाती, जब उसे सौ मीटर दूर से अपना घर दिखाई देने लगता.

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तीनमंजिला वाले मकान के बीच वाले तल्ले में लीसा अपने पापा और मम्मा के साथ रहती है. नीचे वाले तल्ले में ओमा रहती हैं (जरमनी में ग्रैंड मदर को ओमा कहते हैं) और सब से ऊपर वाली मंजिल में रूबिया आंटी और मोहम्मद अंकल रहते हैं.

ओमा इस मकान की मालकिन की मां हैं. मकान मालकिन, जिन्हें सभी किराएदार ‘लैंड लेडी‘ कह कर संबोधित करते हैं, इस तीनमंजिला मकान से तीन घर छोड़ कर चैथे मकान में रहती हैं.

80 साल की ओमा यहां अकेली रहती हैं. जरमनी में 80 साल के वृद्ध महिलापुरुष उतने ही स्वस्थ दिखते हैं, जितने भारत में 60-65 के. वे अपने सभी काम खुद करती हैं. वैसे भी इस देश में घरेलू नौकर जैसी कोई व्यवस्था नहीं है.

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