उस दिन मैं अनन्या की कायल हो गई जब उसने कहा कि ये मेरी जिंदगी है जो मैनें खुद बनाई है... मेरी जिंदगी मेरी तकदीर मैंने खुद लिखी है. क्योंकि मुझे ऐसा लगता है ये वो लड़की है जिसने बेइज्जती सही लोगों के ताने सहे साथ ही  जौब के लिए परेशान हुई लेकिन आखिरकार उसने वो हांसिल किया जो पाना चाहती थी और उसकी जिंदगी में उसने ये पाने के लिए जो मेहनत की है मैं उसे समझ सकती हूं. ये बात तब की है जब अनन्या स्कूल में थी उसका पढ़ाई में बिल्कुल भी मन नहीं लगता था उसके पापा टीचर थे लेकिन फिर भी उसे पढ़ाई में ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी.

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