दीपा सुबक रही थी. उस की सिसकियां मेरे कानों में पड़ीं. मुझे अचरज हुआ. ये अचानक दीपा को क्या हो गया? अच्छीभली थी. आज जहां सभी अध्यापिकाएं तनख्वाह पा कर खुश थीं वहीं दीपा की खुशियों को ग्रहण लगा तो जाहिर है कोई बात तो अवश्य होगी. ‘‘किसी ने कुछ कहा?’’ मेरे कथन पर किसी तरह से उस ने अपना चेहरा ऊपर किया. उस की आंखें आंसुओं से लबरेज थीं, ‘‘बोलोगी नहीं तो पता कैसे चलेगा?’’

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