पिछले अंक में आप ने पढ़ा

कि चुनावों के चलते सरकारी कर्मचारियों के लिए ड्यूटी पर तैनात होने के सरकारी फरमान से मानो कार्यालय में खलबली मच जाती है. सख्त आदेश के आगे ड्यूटी से बचने के सभी उपाय बेकार साबित हुए. भगतजी जैसे आरामपरस्त व्यक्ति के लिए ड्यूटी निभाना पहाड़ पर चढ़ने जैसा था. खैर, कर्तव्य निर्वाह हेतु जरूरत के साजोसामान सहित मतदान केंद्र जाने की तैयारी कर ली.

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