Family Story: “दीना, तुम घर कब आ रही हो?” सुबह उठते ही प्रिया ने बेटी को फोन कर पूछा.
"यह बात आप कितनी बार पूछ चुकी हो, मम्मी? मुझे याद है 3 दिनों बाद आप का बर्थडे है. भला, वह दिन में कैसे भूल सकती हूं. मैं कल यहां से निकल रही हूं.”
“ठीक है, मैं तुम्हारा इंतजार करूंगी.”
“लेकिन घर मैं बर्थडे से एक दिन पहले पहुंचूंगी, मम्मी. 2 दिनों के लिए मुझे प्रशांत जी के पास रुकना है.”
“कौन प्रशांत?”
“इतनी जल्दी भूल गईं उन्हें. पापा के बैस्ट फ्रैंड प्रशांत जी.”
“तुम्हें उन से क्या काम है?”
“भला कोई काम के लिए किसी के पास जाता है? मुझे वे अच्छे लगते हैं. उन से बातचीत करना मुझे पसंद है. उन के साथ 2 दिन बिता कर मैं घर आऊंगी.”
“मुझे समझ नहीं आता कि अधेड़ उम्र के प्रशांत जी से तुम्हें इतना लगाव क्यों हो गया?”
“लगाव तो किसी भी उम्र के आदमी के साथ हो सकता है. वह उम्र कहां देखता है?”
“तुम होश में तो हो, दीना.”
“हां मम्मी, मैं मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ हूं. मैं ने आप को अपना प्रोग्राम बता दिया है. मैं कोई छोटी बच्ची नहीं हूं, पूरे 24 साल की हो चुकी हूं और अपना भलाबुरा सोच सकती हूं.”
“तुम से तो कुछ कहना ही बेकार है,” कह कर प्रिया ने फोन पटक दिया.
उसे समझ नहीं आ रहा था कि दीना को क्या हो गया है. प्रशांत उस के पापा राहुल के बहुत अच्छे दोस्त थे. 4 साल पहले राहुल की एक ऐक्सिडैंट में असमय मौत हो गई थी. माना कि प्रशांत एक अच्छा इंसान है लेकिन इतना भी नहीं कि 24 साल की एक लड़की उस के पीछे दीवानी हो जाए. वैसे भी, वह तलाकशुदा आदमी है और दीना यह बात अच्छी तरह जानती है. उसे लगा प्रशांत ने दीना को बहका दिया तभी वह मम्मी को छोड़ कर पहले उन से मिलने जा रही है.
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