कनछेदी लाल को 'बजट' का बड़ा इंतजार था.दो-तीन दिनों  से कन छेदीलाल की कसमसाहट बढ़ गई थी. कभी इधर होता, कभी उधर होता, कभी आंखें बंद कर सोच में डूब जाता, कभी आंखें गोल गोल घुमाने लगता.उसकी दयनीय हालत देखकर श्रीमतीजी से रहा नहीं गया, वह बोल पड़ी -"स्वामी  ! क्या बात है किसका इंतजार है जो तुम्हारी स्थिति  बद से कुछ बदतर दिखाई दे रही है."

Tags:
COMMENT