चिंता मानव जीवन की स्वाभाविक प्रक्रिया है. चिंता किसे नहीं होती और कब नहीं थी? पहले चिंता के क्षेत्र और दायरे कम थे. अब चिंता की परिधि व प्रकार बढ़े हैं. पर चिंतित होने की कोई बात नहीं है. आज बेहतर समाधान भी हाजिर हैं. ये समाधान तकनीकी विकास से संबंधित हैं और विशेषज्ञ सेवाओं से संबंधित भी. आवश्यकता होने पर चिंता के समाधान के लिए व्यावसायिक सेवाएं भी ली जा सकती हैं. जीवन के हर पल को बेहतर बनाने का प्रयास करना हमारा कर्तव्य है, फिर भी जकड़ ही लेती है कोई न कोई चिंता. 

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