कुछ वर्षों पहले रसायन का नोबेल पुरस्कार हासिल करने वाले भारतीय मूल के अमेरिकीब्रिटिश वैज्ञानिक वी रामकृष्णन ने एक टिप्पणी भारत की कोचिंग इंडस्ट्री के बारे में की थी. इस संबंध में पहली बात उन्होंने यह कही थी कि शुद्ध विज्ञान (प्योर साइंस) की तरफ उन का आना इसलिए संभव हुआ क्योंकि उन का दाखिला देश (भारत) के किसी मैडिकल या इंजीनियरिंग कालेज में नहीं हो पाया था. दाखिला इसलिए नहीं हुआ क्योंकि पुराने खयाल के उन के मातापिता यह मानने को तैयार ही नहीं थे कि मैडिकल-इंजीनियरिंग कालेजों का ऐंट्रैंस टैस्ट निकालने के लिए कोचिंग लेनी बहुत जरूरी है.

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