60 साल के सरजूदास कभी नौटंकी के मुख्य कलाकार थे. वे बड़े और लंबे किरदार अदा किया करते थे. उन्हें देखने के लिए दूरदूर से लोग खिंचे चले आते थे. आज वे पटना की सड़कों पर रिकशा चला कर अपना और परिवार का पेट भरने के लिए दिनरात मेहनत करते हैं. नौटंकी के बारे में पूछने पर वे कुछ देर के लिए चुप्पी साध लेते हैं और फिर कहते हैं, ‘‘नौटंकी के जनून पर पेट की आग भारी पड़ी. कब तक नौटंकी कर के अपने मन को आनंद पहुंचाता, इस के चक्कर में घर का सुकून खत्म हो गया था. बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और न जाने किनकिन राज्यों में सैकड़ों प्रोग्राम किए पर पेट की आग बु?ाने और परिवार को पालने के लिए कोई काम तो करना ही था. नौटंकी करने के अलावा कुछ और तो आता नहीं था. कई जगह काम ढूंढ़ा पर कोई काम देने को राजी नहीं हुआ. एक दोस्त की मदद से रिकशा मिल गया. बस, उसे ही चला कर पिछले 22 सालों से गुजारा चल रहा है. नौटंकी मन के किसी कोने में दफन हो गई.’’

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