16 दिसंबर, 2012  को दिल्ली में हुए गैंगरेप के मुख्य आरोपी राम सिंह ने 11 मार्च, 2013 को देश की सब से सुरक्षित मानी जाने वाली तिहाड़ जेल में फंदे से झूल कर आत्महत्या कर ली. उसे फांसी पर लटकना ही था क्योंकि उस ने अपराध ही ऐसा किया था. अगर यह घटना न हुई होती तो कानूनी प्रक्रिया के हिसाब से उसे फांसी होने में न जाने और कितने साल लग जाते. उस के आनेजाने, खानेपीने और सुरक्षा के नाम पर लाखोंकरोड़ों रुपए खर्च करने पड़ते. राम सिंह की मौत से कुछ समय पहले मुंबई हमले में दोषी मोहम्मद अजमल आमिर कसाब और संसद पर आतंकवादी हमले से जुड़े अफजल गुरू को फांसी दी गई. आतंकवाद पीडि़तों को देर से मिले इस न्याय ने खुशी व बड़ी राहत तो दी पर मानवाधिकारों की दुहाई देने वालों ने इस पर रोष जताया.

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