इंडियन प्रीमियर लीग सिर्फ क्रिकेट का खेल ही नहीं है बल्कि अरबों की पिच पर खेला जाने वाला सट्टेबाज खिलाडि़यों का बड़ा खेल भी है. नुक्कड़, कसबों से ले कर क्लब, पब और सफेदपोशों के अड्डों पर चलने वाले इस हाइटैक और देशव्यापी खेल की अंदरूनी पड़ताल कर रहे हैं भारत भूषण श्रीवास्तव.

तारीख 18 अप्रैल, 2013. जगह मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल. भीड़भाड़ वाले न्यू मार्केट में आईडीबीआई बैंक के नीचे गुमटियों में से एक में पान की दुकान, जिस के सामने की तरफ टीटी नगर थाना है, के पास 10-12 लोगों की भीड़ लगी थी. ये लोग कुछ लेने नहीं बल्कि सट्टा लगाने के लिए खड़े थे. दुकान में ऊपर की तरफ छोटा सा टीवी लगा था जिस में आईपीएल का मैच चल रहा है. मुकाबला दिल्ली डेयरडेविल्स और चेन्नई सुपर किंग्स टीमों के बीच था.

सड़क पर से जो लोग गुजर रहे थे. उन में से कुछ का ध्यान इस भीड़ की तरफ जाता है पर माजरा किसी को समझ नहीं आता. नजदीक जाने पर पता चला कि सट्टे के शौकीन दीनदुनिया से बेखबर अंदाजा लगाने का अपना कुदरती शौक गैर कानूनी तरीके से पूरा कर रहे हैं.  इन में से शायद ही किसी को मालूम रहा होगा कि चेन्नई सुपर किंग्स और दिल्ली डेयरडेविल्स क्या बला हैं और इन के कप्तान और खिलाड़ी कौन हैं.

बौलर रनअप लेता है तो हलचल मच जाती है. एक नौजवान शर्ट की जेब से 10 रुपए का नोट निकाल कर दुकानदार को देते हुए कहता है, चौका. दूसरा 20 रुपए का नोट थमाते हुए कहता है, विकेट. तीसरा 10 रुपए का नोट दे कर कहता है, खाली. चौथा 5 रुपए का नोट देते हुए कहता है, छक्का. अब तक बौलर ने बौल फेंक दी है जिस पर कोई चौका, छक्का तो दूर एक रन भी नहीं बना, न ही विकेट गिरा.  दुकानदार तीसरे आदमी को 20 रुपए वापस दे देता है यानी 10 रुपए का लाभ. बाकी तीनों अफसोस से सिर मलते फिर गेंदबाज को वापस जाते देखते अपनी जेबें टटोलने लगते हैं और दुकानदार नोट पेटी में डाल लेता है.

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