हर हिंदू एक मुहूर्त में पैदा होता है जो मरने तक तो दूर, मरने के बाद भी उस का पीछा नहीं छोड़ता. घर में बच्चा पैदा हुआ नहीं कि मांबाप सीधे पंडितपुरोहितों के पास भागते हैं. वह अपने पोथी पन्नों में ग्रहनक्षत्रों की चाल देख कर उस बच्चे के पैदा होने के समय से जोड़ कर जन्मपत्री में उस की शादी, कैरियर और उम्र तक का ब्योरा लिख डालता है. एवज में यजमान की हैसियत के मुताबिक दक्षिणा खीसे में डाल कर उस की मूर्खता पर मुसकराते भगवान को मन ही मन धन्यवाद देता है कि हे प्रभु, अच्छा मुहूर्त का चलन चलाया जिस से बैठेबिठाए मेरी और मेरे परिवार की रोजीरोटी चल रही है.

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