घरघर में शौचालय बनवाने की मुहिम बिहार में कछुए की चाल की तरह रेंग रही है. शौचालयों को बनाने के लिए केंद्र से मिले करोड़ों रुपए की रकम खर्च ही नहीं की जा रही है. नतीजतन सिर पर मैला ढोने जैसे शर्मनाक व अमानवीय काम पर लगाम नहीं लग पा रहा है. इसे मिटाने में लगी सरकार और स्वयंसेवी संगठनों की मुहिम कारगर साबित नहीं हो रही है और सूबे में करीब 10 हजार लोग अब भी सिर पर मैला ढो कर पेट की आग बुझाने को मजबूर हैं. इस कुरीति को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने कई बार समय सीमा तय की पर अब तक कामयाबी नहीं मिल सकी है. इसे 2010 तक ही खत्म करने का लक्ष्य रखा गया था पर उस के बाद तारीख दर तारीख ही पड़ती रही है.

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