पटना,  बिहार के मीठापुर इलाके की रहने वाली राधिका को उस के बेटे उमेश ने इलाज के लिए बिहार के सब से बड़े सरकारी अस्पताल पटना मैडिकल कालेज अस्पताल में भरती कराया था. उस औरत को पेट में दर्द और सूजन की शिकायत थी. डाक्टर ने उसे कुछ दवा दे कर 10 दिन बाद आने के लिए कहा. उमेश ने बताया कि दवा खाने के बाद भी उस की मां की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और दर्द काफी ज्यादा बढ़ गया. वह दोबारा अपनी मां को अस्पताल ले गया. मैडिकल इमर्जैंसी में कहा गया कि यह सर्जिकल इमर्जैंसी का मामला है, वहां ले कर जाओ. सर्जिकल इमर्जैंसी ने इसे मैडिकल इमर्जैंसी का मामला बता कर भरती करने से मना कर दिया.

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