अखिल भारतीय गायत्री परिवार के मुखिया प्रणव पंड्या ने अपने मन की आवाज पर राज्यसभा की नामित सदस्यता को ठुकरा कर साबित कर दिया है कि वे अपने ससुर श्रीराम शर्मा आचार्य के विशाल साम्राज्य को क्षुद्र राजनीति का शिकार नहीं होने देना चाहते. उन के नाम की सिफारिश खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी.

गायत्री परिवार अपने तरीके से कर्मकांड करता है जिस में ब्राह्मणवाद नहीं है. इस में हर कोई पंडित है, कोई भी कर्मकांड वगैरा संपन्न करवा सकता है. जन्मना और कर्मणा ब्राह्मण की परिभाषा और व्यवसाय पर पंडों ने एक वक्त में खूब आंखें तरेरी थीं पर श्रीराम शर्मा आखिरकार अपनी एक अलग बादशाहत खड़ी करने में कामयाब रहे. इस परिवार के 12 करोड़ सदस्यों पर मोदी की वक्रदृष्टि थी लेकिन समझदारी दिखाते प्रणव ने अपने अभियान रूपी व्यवसाय को प्राथमिकता दी तो गलत कुछ नहीं किया और इस आकर्षक प्रस्ताव को स्वाहा कर दिया.

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