2 जून को मथुरा के जवाहरबाग में उठी आग की भीषण लपटों ने एक बार फिर इस देश की धार्मिक, सामाजिक व्यवस्था के वीभत्स रूप को उजागर किया है. इस घटना से सदियों से हाशिए पर रही उन जातियों की राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक ताकत पाने की लालसा व आक्रोश दिखाई दिया जो शोषित, वंचित रहते आए हैं. ये लोग वे हैं जो किसी बाबा, गुरु या नेता में अवतारी मसीहा का रूप देखते हैं और भेड़ों की तरह उन के द्वारा हांके जा रहे हैं.

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