लेखक-रोहित और शाहनवाज

सरकार द्वारा किसानों पर खालिस्तानी, देशद्रोही, माओवादी, टुकड़ेटुकड़े गैंग, जैसे तमाम मनगड़ंतआरोपों और लांछनों को लगाने के बावजूद,किसान अनोदोलन पिछले एक महीने से और भी मजबूत होता दिख रहा है. यह आन्दोलन अपने मजबूत इरादों के साथ 21वीं सदी में किसान आन्दोलन का नया इतिहास भी लिख रहा है. और इस ने सरकार द्वारा लगाए गए आरोपों को न सिर्फ धुंधला किया बल्कि झूठा भी साबित कर दिया है. किन्तु सरकार के तरकश में मानो लग रहा है उन तीरों की कमी हो गई है जिन तीरों से उस ने छात्र, दलित, जनवादी और सीएए विरोधी आंदोलनों को कुचला था. इसीलिए अब लग रहा है कि सरकार के पास ‘विक्टिम प्ले’ का आखरी हथियार बचा है जिसे वह इस समय भुनाने पर लगी हुई है.

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