राष्ट्र के नाम अपने लगभग 33 मिनिट के सम्बोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्या क्या बोल गए और उनकी मंशा क्या थी यह किसी की समझ नहीं आ रहा है फिर भी जो लोग कुछ मतलब निकालने की कोशिश कर रहे हैं वह या तो उनका पेशा है या फिर भक्ति है. उनकी सारी बातें असम्बद्ध थीं और एक हद तक आत्ममुग्धता का शिकार भी थीं. लग ऐसा भी रहा था मानों कक्षा 12बी का कोई छात्र स्वेट मार्टन की किताब पढ़ते दुनिया जीतने का हौसला और जज्बा खुद में और औरों में पैदा कर रहा हो जिसका असर बेहद तात्कालिक होता है और व्यावहारिकता से तो उसका कोई संबंध होता ही नहीं.

Tags:
COMMENT