राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के 2 दिवसीय भोपाल दौरे के दौरान उनके आगमन से लेकर प्रस्थान तक प्रोटोकाल के लिहाज से माहौल कुछ कुछ सूना सूना सा था. एयरपोर्ट पर उनकी अगवानी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की, तब राजनैतिक हस्तियों के आगमन प्रस्थान पर ड्यूटी बजाने का लम्बा तजुर्बा रखने वाले अधिकारियों को अहसास हुआ कि कमी राज्यपाल रामनरेश यादव की है, जिन्हें यहां होना चाहिए था और राष्ट्रपति को राजभवन तक ससम्मान ले जाना चाहिए था. पर रामनरेश यादव राष्ट्रपति के आने के एक दिन पहले ही एक स्थानीय प्रायवेट नर्सिंग होम बंसल हास्पिटल में भर्ती हो गए थे क्योंकि उनकी ‘तबियत’ खराब थी.

कोई मानने के लिए तैयार नहीं कि वे सचमुच में बीमार हुए थे बल्कि चर्चा यह रही कि राज्य के चर्चित महाघोटाले व्यापम में नाम होने के चलते राष्ट्रपति उनसे मिलना नहीं चाहते थे. गौरतलब है कि जब रामनरेश का नाम इस घोटाले में आया आया था तब वे भागे भागे राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे पर बेरूखी और सख्ती दिखाते प्रणब मुखर्जी ने उन्हें मिलने के लिए वक्त नहीं दिया था. राज्यपाल हो या मुख्यमंत्री किसी को भी राष्ट्रपति की आगवानी करने का मौका मिलना किस्मत की बात होती है पर रामनरेश की बदकिस्मती की तो यह इंतहा है कि उन्हें बीमार होकर अस्पताल में भर्ती होना पड़ा और 2 दिन ठाठ से राष्ट्रपति भोपाल के राजभवन में रूके और जाते जाते राजभवन की व्यवस्थाओं की भी तारीफ करते वहां के कर्मचारियों को नसीहत यह दे गए कि अपने राज्यपाल की सेहत का ख्याल रखना. यह मशवरा था या ताना, शायद ही कोई राजनैतिक विश्लेषक तय कर पाए.

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