भ्रष्टाचार को मुद्दा बना कर2 साल पहले शुरू किए गए जन आंदोलन में अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल के साथ पूरा देश सरकार के खिलाफ आक्रोशित दिखा. लेकिन वक्त की बदलती करवट ने अन्ना और अरविंद केजरीवाल की राहें जुदा कर दीं. ‘आम आदमी पार्टी’ बना कर अरविंद केजरीवाल अब सियासत के रास्ते उस अधूरी लड़ाई को पूरा करने के लिए चुनावी मैदान में कूद पड़े हैं. क्या है उन की रणनीति, यह जानने के लिए बुशरा खान ने उन से बातचीत की.

चुनावी मैदान में उतरने जा रहे नए राजनीतिक दल ‘आम आदमी पार्टी’ यानी ‘आप’ ने दिल्ली में होनेवाले विधानसभा चुनाव में भ्रष्टाचार को मुख्य मुद्दा बनाने का निश्चय किया है. दिल्ली के मतदाताओं से भ्रष्टाचार के खिलाफ मतदान करने की अपील कर रही ‘आप’ के संस्थापक अरविंद केजरीवाल 2 साल पहले समाजसेवी अन्ना हजारे द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध और जनलोकपाल बिल पास किए जाने के लिए छेड़े गए जनआंदोलन में कंधे से कंधा मिला कर चलते रहे थे. मगर जब उन्हें महसूस होने लगा कि राजनीति में गहरे तक पैठ बना चुके भ्रष्टाचार को आंदोलन से दूर नहीं किया जा सकता, इस के लिए राजनीति में उतर कर ही वहां मौजूद गंदगी साफ करनी होगी तो उन्होंने आखिरकार 2 अक्तूबर, 2012 को ‘आम आदमी पार्टी’ बनाने की विधिवत घोषणा कर दी.  इन दिनों अरविंद पूरी तरह कमर कस कर चुनावों की तैयारी में जुटे हैं. चुनावों में उन का मुख्य मुद्दा जनता को भ्रष्टाचार और भ्रष्ट नेताओं से नजात दिलाना है. पेश हैं अरविंद केजरीवाल से हुई बातचीत के खास अंश :

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