असहिष्णुता, देशद्रोह और भारत माता पर हल्ले के बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच एक नई खिचड़ी पक चुकी है कि भाजपा इस साल अंबेडकर जयंती राज्य में जिला स्तर तक धूमधाम से मनाए और अंबेडकर की जन्मस्थली इंदौर के नजदीक महू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक विशालकाय सभा को संबोधित करें. दरअसल, सवर्णों को भाजपा का उमड़ रहा या दलितप्रेम रास नहीं आ रहा है. एक तरफ आरएसएस आरक्षण के मुद्दे पर पुनर्विचार की बात कर भाजपा की लुटिया डुबो देता है तो दूसरी तरफ मोदी और उन की टीम का कहना है कि आरक्षण ज्यों का त्यों रहेगा. इस समीकरण के 2 मतलब लोग निकाल रहे हैं, पहला यह कि यह संघ व मोदी की मिलीभगत है और दूसरा, अगर मिलीभगत नहीं है तो यह मोदी को डुबोने की चाल है.

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