ज्यादा नहीं महज चार दिन पहले ही आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अपनी जिंदगी में दूसरी बार कोलकाता में माना था कि समाज में छुआछूत और भेदभाव अभी भी हैं. देश के कोने कोने की जमीनी जानकारी रखने वाले भागवत जाने क्यों शिवपुरी के दलित हादसे पर खामोश हैं कि यह क्रूरता बर्बरता और अमानवीयता की हद है. भागवत ही क्यों सारा देश खामोश है. मानो दो दलित मासूमों की सरेआम हत्या नहीं हुई हो बल्कि कुछ दबंग सवर्णों ने कान पर भिनभिनाते मच्छर मार डाले हों.

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